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बंगाल चुनाव : राजद ने कांग्रेस-वाम छोड़ तृणमूल की ओर बढाया दोस्ती का हाथ, बिहारी वोटरों का लाभ दिलाने की कवायद

Janjwar Desk
2 Feb 2021 3:17 AM GMT
बंगाल चुनाव : राजद ने कांग्रेस-वाम छोड़ तृणमूल की ओर बढाया दोस्ती का हाथ, बिहारी वोटरों का लाभ दिलाने की कवायद
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तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का फाइल फोटो।

राजद ने कांग्रेस-वाम से अपने पुराने गठजोड़ को किनारे करते हुए तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन की पेशकश की है। हालांकि इससे बंगाल इकाई के नेता संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि तृणमूल ही भाजपा को यहां सत्ता से बाहर रख सकती है, लिहाजा उसी से दोस्ती की जा सकती है...

जनज्वार। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन प्रमुख धु्रुवों के अलावा इस बार वहां की राजनीति के लिए छोटे घटक भी प्रभावी भूमिका निभाने जा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस, भाजपा व वामा मोर्चा-कांग्रेस गठजोड़ के अलावा बंगाल की राजनीति में असदु्ददीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम, हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो व तेजस्वी यादव के राजद ने भी अपनी सक्रियता बढा दी।

ओवैसी व सोरेन की पार्टी जहां अलग चुनाव लड़ कर ममता बनर्जी के लिए चुनौतियां बढाने का संकेत दे दिया है, वहीं लालू प्रसाद यादव के राजद ने तृणमूल को बिहारी वोटरों का लाभ दिलाने की पेशकश की है। इसको लेकर सोमवार को राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी व श्याम रजक ने कोलकाता में मुख्यमंत्री व टीएमसी चीफ ममता बनर्जी के भतीजे व तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी से मुलाकात की। इन तीनों नेताओं की मुलाकात में पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में राजद की भूमिका पर चर्चा की गयी।

सिद्दीकी और रजक तेजस्वी यादव के निर्देश पर अभिषेक बनर्जी से मिलने पहुंचे थे और तेजस्वी का तृणमूल के लिए उनका यह संदेश था कि भाजपा को हर हाल में हराना है। मालूम हो कि बिहार में राजद का कांगे्रेस-वाम मोर्चा से और झारख्ंाड में झामुमो-कांग्रेस से गठजोड़ है, जबकि उसने बंगाल में वाम मोर्चा-कांग्रेस गठजोड़ के बजाय तृणमूल की ओर दोस्ती का हाथ बढाया है।

इस मुलाकात के बाद सिद्दीकी व रजक ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने तृणमूल नेता को बताया कि बंगाल में बिहार के लोगों की अच्छी तादाद है और उनका वोट किसी कीमत पर भाजपा को नहीं मिले इसके लिए वे प्रयास कर रहे हैं। इन नेताओं ने कहा कि वे तृणमूल के पास दोस्ती के लिए इसलिए आए क्योंकि इस पार्टी के पास ही बंगाल में भाजपा को रोकने की ताकत है। इन नेताओं ने कहा कि पूर्व में कोलकाता में हमारी पार्टी से विधायक भी रहे हैं।

दिलचस्प बात यह कि इस बैठक से राजद के प्रदेश स्तरीय नेताओं को दूर रखा गया। राजद के बंगाल प्रदेश अध्यक्ष बिंद्रा राय ने कहा कि उनका दल बंगाल मंे अबतक वाम मोर्चा के साथ रहा है, वाम से जो सम्मान मिलता है वह तृणमूल के साथ नहीं मिल रहा है। उन्होंने अपनी राय दी है कि वाम-कांग्रेस गठजोड़ के साथ ही राजद को चुनाव लड़ना चाहिए।

हेमंत के दौरे से बिफरी थीं ममता बनर्जी

पिछले सप्ताह झारखंड के मुख्यमंत्री व झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने बंगाल के आदिवासी बहुल झारग्राम इलाके में एक जनसभा की थी और राज्य में विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। हेमंत के इस ऐलान के बार ममता बनर्जी बुरी तरह बिफर पड़ी थीं। पश्चिम बंगाल में आदिवासी आबादी अच्छी खासी है और झारखंड से लगे कई इलाकों में उनकी बहुलता है। तृणमूल कांग्रेस की चिंता यह है कि हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो के अलग से चुनाव लड़ने से इन वोटों में बिखराव आएगा जिससे उन्हें नुकसान हो सकता है। ममता ने नाराजगी वश यह बयान दिया था कि हेमंत सोरेन जाकर झारखंड संभाले, यहां के लोगों को हर सुविधा हम देते हैं, इसलिए वे हमारा साथ देंगे।

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