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जिस जितिन प्रसाद के सहारे ब्राह्मणों को साधने का असफल प्रयास कर रही BJP, खुद उनकी ही पण्डित पार्टी में पड़ने लगी फूट

Janjwar Desk
10 Jun 2021 3:31 PM GMT
जिस जितिन प्रसाद के सहारे ब्राह्मणों को साधने का असफल प्रयास कर रही BJP, खुद उनकी ही पण्डित पार्टी में पड़ने लगी फूट
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जितिन प्रसाद भाजपा में शामिल हो गए हैं.लेकिन भाजपा के लिए उनका फायदा उठा पाना आसान नहीं होगा.

जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने की बड़ी गहरी चर्चा हो रही है। नफा-नुकसान तलाशे जा रहे हैं। तो दूसरी तरफ भाजपाई मंडली और मूढ़मति गोदी मीडिया ने इन्हें बड़ा ब्राह्मण नेता बताना शुरू कर दिया है। जो कि जमीनी हकीकत से एकदम भिन्न है...

जनज्वार ब्यूरो। जितिन प्रसाद के भाजपा में जाने से पार्टी गदगद है। लेकिन उलट इसके कानपुर वाले विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद जितिन द्वारा खूद की ब्राहमण छवि परोसने के लिए बनाई गई पार्टी ब्राहमण एकता परिषद से लोग छिकटने लगे हैं।

ब्राह्मण पिता, राजपूत माता और एक पंजाबी खत्री नेहा सेठ से विवाहित जितिन प्रसाद के सहारे ब्राह्मणों को लुभाकर चुनाव जीतेगी भाजपा? यह बात आज उन्नाव से जितिन की ब्राहमणों का दिल जीतने के लिए बनाई पार्टी से जिलाध्यक्ष कमलेश तिवारी ने यह कहकर स्तीफा दे दिया की वह जितिन के बाजपा में जाने के पक्ष में नहीं हैं।

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने की बड़ी गहरी चर्चा हो रही है। नफा-नुकसान तलाशे जा रहे हैं। तो दूसरी तरफ भाजपाई मंडली और मूढ़मति गोदी मीडिया ने इन्हें बड़ा ब्राह्मण नेता बताना शुरू कर दिया है। जो कि जमीनी हकीकत से एकदम भिन्न है।

भाजपाई बनने के बाद जितिन प्रसाद ने कहा कि 'वे अपने लोगों के काम कराने के लिए अपने परिवार की तीन पीढ़ियों की कांग्रेसी परंपरा के विरुद्ध उसे छोड़ रहे हैं। वे अपने पिता जितेंद्र प्रसाद की शाहजहांपुर सीट से सिर्फ 36 साल की उम्र में पहली बार 2004 में सांसद निर्वाचित होने के बाद राज्य मंत्री बना दिये गये थे।'

बता दें कि जितिन के दादा कुंवर ज्योति प्रसाद प्रदेश में विधायक रहे। पिता कुंवर जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के महासचिव और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी (1991), पीवी. नरसिम्हा राव (1994) के राजनीतिक सलाहकार, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष (1995) तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष रह चुके थे। राजीव गांधी ने उन्हें विदेशों में 'भारत महोत्सव' आयोजित करने का दायित्व भी सौंपा था।

सीआइए को मात देते हुए इंदिरा गांधी की कूटनीतिक दूरदर्शिता के फलस्वरूप 1975 में सिक्किम का भारत में विलय और इसका 22वां राज्य बनने से पहले वहां के हालात देखते हुए रानी जून 1974 में अपने कुछ विश्वसनीय लोगों के साथ कुंवर जितेंद्र प्रसाद के नैनीताल स्थित आवास में कुछ समय तक ठहरी थीं।

नेहरू-गांधी परिवार के निकट रहे जितेंद्र प्रसाद ने साल 2000 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव में सोनिया गांधी के खिलाफ ताल ठोक दी थी, क्योंकि उनकी पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी के रूप में दो बच्चों की मां और एक हिमाचली राजपूत कामता सिंह को यह कांग्रेसी वंशवाद पसंद नहीं था।

ब्राह्मण पिता, राजपूत माता और एक पंजाबी खत्री नेहा सेठ से विवाहित जितिन प्रसाद के बारे में गोदी मीडिया कह रहा है कि यूपी में 'ब्राह्मण राजनीति' चमकाएंगे जितिन प्रसाद। जैसे उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए किया था और बंगाल के चुनाव परिणाम जिसकी ताजा तस्वीर है। लगातार तीन चुनाव हारे हुए इस चेहरे को अपने झूठ प्रसारक गोदी मीडिया के सहारे हीरो बनाकर भाजपा अब उत्तर प्रदेश में अपनी खस्ता हालत सुधारने का असफल प्रयास कर रही है।

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