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Exclusive : यूपी में कानपुर बिधनू पुलिस की बर्बरता फिर आई सामने, जमीन विवाद में पीड़ितों को थाने ले जाकर पीटा बुरी तरह

Janjwar Desk
22 March 2021 9:58 AM GMT
Exclusive : यूपी में कानपुर बिधनू पुलिस की बर्बरता फिर आई सामने, जमीन विवाद में पीड़ितों को थाने ले जाकर पीटा बुरी तरह
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पुलिसिया बर्बरता की कहानी कहते पीड़ितों के पीठ के निशान

साहब हम दरोगा जी से बहुत गिड़गिड़ाए, पैर पड़े पर वो दारू पिये थे, उनके मुँह से बुरी बदबू आ रही थी, हमारी कोई बात नहीं सुन रहे थे बस मारते ही चले जा रहे थे, हमारे सिर को जाँघों के बीच में फंसाकर बुरी तरह पूरी रात मारा है साहब...

मनीष दुबे की रिपोर्ट

जनज्वार, कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर की बिधनू पुलिस की बर्बरता फिर एक बार सामने आई है। आरोप है कि पुलिस ने परिवारिक जमीनी विवाद में एक पक्ष से रूपये लेकर दूसरे पक्ष को थाने ले जाकर पट्टे से पिटाई की है। पीड़ितों ने अपनी पीठ दिखाते हुए पुलिसिया बर्बरता की एक-एक दास्तान सुनाई। पिटाई करने के बाद पीड़ितों को धमकी भी दी गई की अगर डॉक्टर अथवा किसी और से पिटाई की बाबत कुछ बताया तो कई धाराएं लगाकर तुम लोगों को जिलाबदर कर दूँगा।

कानपुर के बिधनू के गांव खड़ेसर में रहने वाले 38 वर्षीय राजेश कुमार यादव पुत्र होरी लाल यादव, 34 वर्षीय सर्वेश यादव पुत्र होरीलाल, 16 वर्षीय राहुल पुत्र जगतपाल ने 'जनज्वार' संवाददाता से बात करते हुए पुलिसिया उत्पीड़न की एक-एक कहानी बताई। उन्होने कहा कि 'गुरूवार 18 मार्च की रात साढ़े दस बजे वह घर पर सो रहे थे। बिधनू चौकी इंचार्ज सत्य प्रकाश कुरील, सौरभ गूजर व मनोज हम तीनो भाईयों को जस की तस कन्डीशन में उठा ले गए।' लगभग रोते हुए राजेश यादव हमसे कहता है कि साहब, 'पहले चौकी में मारा है। इसके बाद 19 मार्च को थाने ले गए। थाने में थानेदार साहब ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए हमारी ताबड़तोड़ पिटाई कर दी।'

पीड़ित राजेश बताता है कि 'एक डण्डे में मोटा पट्टा बंधा हुआ था। हम लोगों को गर्दन से पकड़कर अपनी जांघों के बीच फंसाकर अन्य पुलिसवालों ने थाने में हाथ, पैर, कमर में उसी पट्टे से बेतहासा मारा। राजेश का आरोप है कि उसके चाचा श्रीराम पैसे वाले हैं। जमीन पर कब्जा करने की नियत से पुलिस-थाने में पैसे खिलाकर उसे पिटवाया है। 19 मार्च को हमारे शरीर की कोई चोंट नहीं दिखाने दी गई व फर्जी मेडिकल कराकर हमारा 151 की धारा में चालान कर दिया गया। राजेश कहता है कि हमने सोंचा था कि जज साहब को चोंटे दिखाएंगे पर उस दिन वह छुट्टी पर थे।'

पुलिसिया बर्बरता का शिकार हुए तीनों भाई

राजेश कहता है कि 'रात को ये लग रहा था कि हम लोग कल की सुबह ही नहीं देख पाएंगे। हम तीनो भाईयों को इतना मारा, इतना मारा कि देखिए आज पाँच दिन हो गए पीठ के निशान नहीं जा रहे हैं। बगल में खड़े राहुल की तरफ इशारा करते हुए सर्वेश कहता है कि बताओ ये तो नाबालिग है, इस तक पर रहम नहीं किया। जब वहां से हमें मेडिकल के लिए भेजा तो थानेदार विनोद सिंह ने धमकी भी दी, कहा कि अगर डॉक्टर या किसी और जगह जाकर पिटाई करने की बात बताई तो समझ लेना कहीं का नहीं छोड़ूंगा। एसओ बिधनू ने कहा कि तुम लोगों पर कई धाराएं लगाकर जिलाबदर कर दूँगा।'

इस पूरे मामले में 53 वर्षीय मुन्नू पुत्र स्वर्गीय अनंतू कहते हैं कि इन लोगों का परिवारिक विवाद है। चाचा श्रीराम यादव से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। चाचा के पुत्रों धीरेन्द्र यादव, शैलेन्द्र व जीतेन्द्र उर्फ जीतू ने पुलिस को कुछ रूपया खिला दिया है। पीड़ितों के ट्यूबवेल तक पर कब्जा कर लिया है। ये लोग कुछ कहते हैं तो मारते-पीटते हैं। पुलिस उनकी ही सुनती है। क्योंकि पुलिस को उनसे रूपया मिला है। रात को इन सभी को उठा ले गए बाकी देखो सब आपके सामने है।

पीड़ित राजेश कहता है कि 'साहब हम दरोगा जी से बहुत गिड़गिड़ाए, पैर पड़े पर वो दारू पिये थे। उनके मुँह से बुरी बदबू आ रही थी। हमारी कोई बात नहीं सुन रहे थे बस मारते ही चले जा रहे थे और बहुत बुरी तरह पूरी रात मारा है साहब। राजेश कहता है कि दरोगा जी कह रहे थे तुम साले यादवों तुम्हें जीने का कोई अधिकार नहीं है। तुम सबको मर जाना चाहिए, मैं मारूंगा तुम्हें। साहब अब गांव तक जाने में बहुत डर लगता है कि कहीं फिर ना ले जाएं और गिरा के मारें। राजेश यह भी कहता है कि अब सब घर-बार बेंचके हम गांव खाली कर देंगे। इतनी आफत कौन झेलेगा, ये लोग मार डालेंगे। दुश्मनो से जादा डर तो अब पुलिस से लगता है।'

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