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भारत में सबसे ज्यादा बलात्कार दलित महिलाओं के साथ क्यों ?

Janjwar Desk
2 Oct 2020 9:47 AM GMT
भारत में सबसे ज्यादा बलात्कार दलित महिलाओं के साथ क्यों ?
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भारत में महिलाओं और खासकर दलित महिलाओं के साथ होने वाले रेप केसों में 90 प्रतिशत का कारण जाति है....

जनज्वार। हाथरस के थाना चंदपा इलाके में 14 सितंबर को 19 साल की दलित लड़की के साथ उस समय गैंगरेप हो गया, जब वो सुबह के समय दस बजे अपने मां और भाई के साथ पशुओं का चारा लेने के लिए खेतों पर घास लेने के लिए गई थी। लड़की का भाई घास काटने के बाद चारा लेकर खेतों से घर चला जाता है और पीड़िता की मां कुछ दूरी पर जाकर घास काटने लगती है। इसी दौरान पीड़िता को अकेला पाकर गांव के रहने वाले चार युवक बाजरे के खेत में खींचकर ले जाते है और उसकी रेप कर देते है।

1 अक्टूबर को संत रविदास नगर (भदोही) जिले में घटित एक 14 वर्षीय दलित नाबालिग लड़की की खेत में सिर कूचकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी जाती है, जिस पर पीड़िता के परिजन बताते है कि किशोरी दिन में 12 बजे घर से लगभग डेढ़ सौ मीटर दूर सड़क की ओर गई थी। जहां दुष्कर्म के इरादे से उसे बाजरे की खेत की ओर खींच ले जाया गया। किशोरी के विरोध करने पर उसे मारपीट कर लहूलुहान कर दिया जाता है। किशोरी के घर न लौटने पर परिवार के लोग देखने गये तो वह खेत में अचेत अवस्था में लहूलुहान पड़ी थी। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश के ही लखनऊ में गुडंबा क्षेत्र में रहने वाली 11वीं की दलित छात्रा के साथ विपिन नामक युवक ने नौकरी लगवाने के नाम पर कागजात के साथ अपने घर बुला कर अपने दोस्तों के साथ छात्रा को 1 हफ्ते तक बंधक बनाकर उसके साथ रेप किया जाता है। उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं के साथ होने वाली ये तीन खबरें पिछले दो हफ्तों में हुई। इन सब दुष्कर्मा में एक बात जो सामान्य थी वो पीड़िता का दलित होना।

पिछले 2 ही दिनों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लगातार गैंगरेप के मामलों को दर्ज किया, जिसमें पीड़िता दलित है। इस दौरान जनज्वार ने दलित मामलों से संबंधित जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से बात की जिसमें हमारा एक ही सवाल था कि भारत में सबसे ज्यादा रेप दलित महिलाओं के साथ ही क्यों हो रहे हैं ?

मामले पर एक्टिविस्ट और दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर कौशल पंवार का कहा, भारत में महिलाओं और खासकर दलित महिलाओं के साथ होने वाले रेप केसों में 90 प्रतिशत का कारण जाति है। अगर आप किसी गांव में जाए तो वहां पर दलितों की बस्तियों का पता पूछने पर ही आप से पहले कई तरह की पड़ताल की जाएगी। शहरों में तो काफी हद तक जातिवाद है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी जाति के नाम पर अलग-अलग गांवों का बंटवारा किया गया है, जिसके कारण स्थानीय लोगों को पता होता है कि ये लोग किस समाज से है और इनकी क्या हैसियत है।

दूसरा कारण उच्च जाति के अंदर डर का भी है। आजादी के दौरान बाबा साहब अंबेडकर और उसके बाद कांशीराम जैसे नेताओं के आने से काफी हद तक जब दलितों को अपने अधिकारों के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने हक को मांगना शुरू कर दिया। इस दौरान ग्रामीण इलाकों में जब शिक्षित महिलाओं ने आवाज़ उठाना शुरू किया तो महिलाओं के साथ इस तरह के दुष्कर्म करके उन्हें डराया जा रहा है। उच्च जाति के लोग रेप कर के दिखाना चाहते है कि हम लोग अभी भी तुम लोगों से ऊपर है।

अगर किसी तरह की आवाज़ उठाने की कोशिश की गई तो हर दलित महिला के साथ ऐसा ही किया जाएगा। उच्च जाति के पास प्रशासन से लेकर राजनीति तक पहुंच भी एक बड़ा कारण महिलाओं के साथ रेप करने पर उनको हिम्मत देता है। अपराधियों के पास राजनीति से लेकर प्रशासन तक सरंक्षण प्राप्त होता है। उनको पता होता है कि रेप करने के बाद भी हमारे खिलाफ ये लोग कुछ नहीं कर पाएंगे।

इसी पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लक्ष्मण यादव का कहना था कि भारत में जाति के आधार पर भेदभाव दलित और आदिवासियों को केवल बलात्कार पर ही नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी झेलने को मिलता है। बलात्कार कर के उसकी हत्या कर देना जातिवादी मानसिकता का चरम स्तर है। इसको ऐसे समझा जाए कि महिला होने के नाते आज के समय में सिर्फ दलित ही नहीं हर महिला शोषित और पीड़ित है। उनके साथ आज भी बलात्कार किए जाते हैं। लेकिन ये ही चीज जब जाति के आधार पर महिला के साथ की जाती है तो उच्च जाति का जो पुरूष है। उसके अंदर रेप करने की हिम्मत और हिंसा बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि रेप करने वाले को पता है कि ये महिला दलित है और राजनीति से लेकर कानूनी व्यवस्था तक इसकी कोई पहुंच नहीं है। क्योंकि रेप करने के बाद भी ये किसी तरह से हमारे खिलाफ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकती। हाथरस के मामले पर भी आपको देखने को मिला था कि किस तरह डीएम समेत पुलिस प्रशासन द्वारा पीड़िता के परिवार को डराया जा रहा था।

देश में दलित महिलाओं के हालात

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की इस रिपोर्ट के अनुसार दलित महिलाओं ( एससी) के खिलाफ कुल 45,935 आपराधिक घटनाएं हुईं। इसका मतलब है कि करीब 12 प्रतिशत आपराधिक घटनाएं दलित महिलाओं के साथ हुईं। 3,486 दलित महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं दर्ज की गईं। उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं के खिलाफ अपराध की सबसे अधिक 11,829 घटनाएं दर्ज हुईं, जो पूरे देश में दलित महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं का 25.8 प्रतिशत है। इसके बाद राजस्थान का नंबर आता है, जहां 6,794 घटनाएं दर्ज की गईं। इस मामले में तीसरे नंबर पर बिहार है। क्रमश: राजस्थान (554 ) उत्तर प्रदेश (537) और मध्यप्रदेश (510) में दलित महिलाओं के साथ सबसे अधिक बलात्कार की घटनाएं दर्ज हुईं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरों (NCRB) के 2017 के आकंड़ों की बात की जाए तो इसी दौरान उत्तर प्रदेश को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य माना गया था। 2017 में उत्तर प्रदेश में अकेले 56111 हजार से ज्यादा केस महिलाओं के साथ हुए दुष्कर्म से संबंधित मामलों में आए थे। इसके बाद 2018 में इन केसों में बढ़ोतरी होकर कुल 59445 और 2019 में 59853 मामले महिलाओं के साथ हुए दुष्कर्म से संबंधित मामले सामने आए जो किसी भी अन्य राज्य की तुलना में काफी ज्यादा है।

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