जनज्वार विशेष

श्रीलंका में भारत को लगा झटका, कोलंबो बंदरगाह पर बनने पर वाले ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल की परियोजना रद्द

Janjwar Desk
8 Feb 2021 8:05 AM GMT
श्रीलंका में भारत को लगा झटका, कोलंबो बंदरगाह पर बनने पर वाले ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल की परियोजना रद्द
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भारत का कहना है कि चीन के दबाव में श्रीलंका सरकार ने इस परियोजना को बंद किया है। परंतु अडानी समूह के इसमें जुड़े होने की वजह से सोशल मीडिया में इसकी ज्यादा चर्चा हो गई है।

वरिष्ठ पत्रकार दिनकर कुमार का विश्लेषण

श्रीलंका की सरकार ने कोलंबो बंदरगाह पर बनने पर वाले ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल की परियोजना रद्द कर दी है। अदानी को लगा यह झटका मोदी के घटते प्रभाव को दर्शा रहा है। यह भारत सरकार की परियोजना थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर श्रीलंका गए थे और वहां से लौटने के बाद इस परियोजना का काम गौतम अडानी की कंपनी को दिया गया था। श्रीलंका सरकार के फैसले के बाद भारत सरकार किसी तरह से फिर इस परियोजना को हासिल करने के प्रयास में लगी है। इसे रणनीतिक परियोजना बताया जा रहा है और इसके लिए दबाव डालने के मकसद से विदेश मंत्री ने श्रीलंका को निशाना भी बनाया है।

तमिल मछुआरों के मारे जाने का मुद्दा उठा कर सरकार ने श्रीलंका पर हमला किया है। पर श्रीलंका इसे बहाल करने को तैयार नहीं है। हालांकि उसने वेस्टर्न कंटेनर टर्मिनल का काम भारत को देने का प्रस्ताव दिया है। क्या वह ठेका भी अडानी समूह को ही मिलेगा?

बहरहाल, भारत का कहना है कि चीन के दबाव में श्रीलंका सरकार ने इस परियोजना को बंद किया है। परंतु अडानी समूह के इसमें जुड़े होने की वजह से सोशल मीडिया में इसकी ज्यादा चर्चा हो गई है। कहा जा रहा है कि भारत में तो सारे ठेके और सरकारी संपत्तियों पर पहला हक अदानी का दिख रहा है पर दुनिया के दूसरे देशों में ऐसा नहीं हो रहा है। श्रीलंका सरकार ने अडानी का प्रोजेक्ट रद्द किया है तो उधर ऑस्ट्रेलिया में अडानी को मिले खदान के विरोध में आंदोलन चल रहा है। पिछले साल के आखिर में जब भारतीय टीम क्रिकेट शृंखला खेलने ऑस्ट्रेलिया गई थी तो पहले टेस्ट मैच में सिडनी में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अडानी की परियोजना के विरोध में बैनर लेकर मैदान में आ गए थे।

श्रीलंकाई बंदरगाह प्राधिकरण (एसएलपीए) के श्रमिक संघ ने आरोप लगाया है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार एक प्रमुख कोलंबो पोर्ट टर्मिनल के विकास और संचालन का कार्य अदानी समूह को सौंपने के लिए द्वीप-राष्ट्र पर अनुचित दबाव डालती रही है। क्या मोदी सरकार श्रीलंका में बढ़ती चीनी उपस्थिति के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर ऐसा करती रही है या मोदी सरकार प्रधानमंत्री के करीबी सहयोगी अदानी के एक व्यापार समूह द्वारा टर्मिनल को संचालित करने की मांग कर रही है? आसन्न सौदे पर विवाद के कारण कोलंबो बंदरगाह पर यूनियनों और प्रबंधन के बीच टकराव हुआ।

क्या भारत की मोदी सरकार अडानी समूह को एक महत्वपूर्ण बंदरगाह टर्मिनल के संचालन के लिए श्रीलंका सरकार पर दबाव डाल रही है? इस आशय के दावे अब महीनों से चले आ रहे हैं और श्रीलंका में ट्रेड यूनियन आसन्न सौदे का विरोध करती रही है। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि मोदी सरकार ने पूर्वी कंटेनर टर्मिनल के विकास और संचालन के लिए अदानी की कंपनी को कैसे नामित किया।

कोविड-19 महामारी के कारण वर्तमान में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था काफी खराब है। 12 जनवरी 2021 को, हाल के महीनों में दूसरी बार, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में सरकार ने अपने अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों और लेनदारों से अपील की कि वे अनुसूचित ऋण चुकौती और बॉन्ड पेआउट के लिए कुल 6.8 बिलियन डॉलर का भुगतान करें। ऐसे समय में भारत सरकार की तरफ से अडानी के लिए एक महत्वपूर्ण पोर्ट टर्मिनल सौदा पर ज़ोर देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोलंबो बंदरगाह श्रीलंका के सबसे महत्वपूर्ण राजस्व जनरेटर में से एक है। इन परिस्थितियों में एक सवाल यह उठता है कि क्या श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे की सरकार बाहरी दबाव का सामना करने और अपने देश के लिए एक अच्छा सौदा करने की स्थिति में है।

श्रीलंका का कोलंबो बंदरगाह दक्षिण एशिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। भारत के आयात-और-निर्यात कार्गो का अनुमानित 70% कोलम्बो बंदरगाह (बड़े पैमाने पर अंतरमहाद्वीपीय कंटेनर जहाजों द्वारा कोलंबो को भेज दिया जाता है और उससे आगे भेज दिया जाता है) के माध्यम से ट्रांस-शिप किया जाता है और छोटे फीडर के जहाजों द्वारा भारतीय बंदरगाहों के लिए और आगे भेजा जाता है)। इसके चार पूरी तरह से परिचालन टर्मिनल - जया कंटेनर टर्मिनल, यूनिटी कंटेनर टर्मिनल, साउथ एशिया गेटवे टर्मिनल और कोलंबो इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल - 80% से अधिक क्षमता पर संचालित किए जाते हैं।

कोलंबो बंदरगाह पर एक पांचवें टर्मिनल के पहले चरण के हिस्से के रूप में एक कंटेनर बर्थ का निर्माण - ईस्ट कंटेनर टर्मिनल (ईसीटी) - 2015 में पूरा हो गया था। हालांकि, बंदरगाह श्रमिकों के यूनियनों ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2020 तक बर्थ का संचालन शुरू नहीं हुआ था। श्रीलंकाई सरकार भारत और जापान के साथ निजी क्षेत्र को टर्मिनल के विकास को सौंपने की उम्मीद में परिचालन बंद कर रही थी।

मूल रूप से श्रीलंका सरकार ने जो योजना बनाई थी, उसमें से यह एक महत्वपूर्ण विचलन था। एशियाई विकास बैंक द्वारा 2015 में प्रकाशित एक परियोजना दस्तावेज़ के अनुसार, जो आंशिक रूप से बंदरगाह के विस्तार को वित्तपोषित करता था, टर्मिनलों को एक सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) समझौते के माध्यम से बनाया गया था।

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