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Female population in India 2020: भारत में पहली बार महिलाओं की आबादी पुरुषों से ज्यादा, हकीकत या फसाना?

Janjwar Desk
27 Nov 2021 4:48 PM GMT
Female population in India 2020: भारत में पहली बार महिलाओं की आबादी पुरुषों से ज्यादा, हकीकत या फसाना?
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Female population in India 2020: एक दिन अचानक देश और फिर दुनिया के बड़े और छोटे समाचार संस्थानों के अखबारों, समाचार चैनलों और समाचार पोर्टलों पर हेडलाइंस उभरती है, पहली बार देश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक|

महेंद्र पाण्डेय की रिपोर्ट

Female population in India 2020: एक दिन अचानक देश और फिर दुनिया के बड़े और छोटे समाचार संस्थानों के अखबारों, समाचार चैनलों और समाचार पोर्टलों पर हेडलाइंस उभरती है, पहली बार देश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक| आजकल लोगों के पास समय कम है और अधिकतर लोगों के लिए समाचार हैडलाइन ही रहता है| हालांकि हैडलाइन के बाद लगभग हरेक जगह बताया गया था कि पांचवें नेशनल फॅमिली एंड हेल्थ सर्वे (Fifth National Family & Health Survey) के अनुसार देश में प्रति 1000 पुरुषों पर 1020 महिलायें हैं, पर कहीं भी इस सर्वे और जनगणना (Census of India) में अंतर नहीं बताया गया| अनेक प्रतिष्ठित समाचारपत्रों ने तो अपने समाचार में प्रख्यात अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन (Dr Amartya Sen) द्वारा वर्ष 1990 में भारत के सन्दर्भ में जनगणना के आंकड़ों के आधार पर कहे गए "द केस ऑफ़ मिसिंग वीमेन" (The case of missing women) पर भी सवाल खड़ा कर दिया| अनेक समाचारपत्रों ने केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Health & Family Welfare Ministry) के एडिशनल सेक्रेटरी, विकासशील, का वक्तव्य भी प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने कहा है कि यह महिला सशक्तीकरण (Women empowerment) के लिए उठाये गए कदमों का नतीजा है और अब कम से कम महिलाओं की संख्या के सन्दर्भ में भारत विकसित देशों के समकक्ष खड़ा है| सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने महिलाओं की अभूतपूर्व संख्या पर खुशी जताई| जाहिर है जल्दी ही प्रधानमंत्री जी, मंत्री और संतरी इसे इस सरकार की उपलब्धि बताना शुरू करेंगें और इन संके साथ महिलाओं का शोषण भी चलता रहेगा|

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में लगभग 25 करोड़ परिवार थे, और इनके सर्वेक्षण के आधार पर बताया गया था कि प्रति एक हजार पुरुषों के बदले महिलाओं की संख्या 940 है| इससे पहले वर्ष 2001 की जनगणना में महिलाओं की संख्या 933 थी| अब इन 25 करोड़ परिवारों पर किये गए सर्वेक्षण की तुलना में देखें तो राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण के लिए महज 6.5 लाख परिवारों को चुना गया, जो देश के 707 जिलों में स्थित हैं| इसमें भी चुनिन्दा परिवारों के सभी सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है और पुरुषों और महिलाओं की संख्या में बड़ा अंतर है| सर्वेक्षण में लगभग 7 लाख महिलाओं और महज 1 लाख पुरुषों को शामिल किया गया था| यह सर्वेक्षण वर्ष 2019 से 2021 के बीच किया गया था, यानि कोविड 19 के कारण स्थितियां सामान्य नहीं थीं| आश्चर्य यह है कि महज 6 लाख परिवारों के सर्वेक्षण के आधार पर सरकार 25 करोड़ से अधिक परिवार वाले देश में महिलाओं की संख्या बढाने में जुटी है|

सर्वेक्षण में महिलाओं की स्थिति तो इसके पहले किये गए सर्वेक्षणों से भी समझी जा सकती है| वर्ष 2005-2006 के तीसरे सर्वेक्षण में महिलाओं की संख्या पुरुषों के बराबर थी, यानि 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या भी 1000 थी| इसके बाद वर्ष 2015-2016 के सर्वेक्षण में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 991 ही रह गयी, और अब यह संख्या पुरुषों से अधिक यानि 1020 तक पहुँच गयी| इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि आंकड़े सर्वेक्षण के समय, परिस्थितियों और आप क्या बताना चाहते हैं, के अनुसार बदलते रहते हैं|

इस सर्वेक्षण के नतीजों को यदि देश का आइना माना जाता है तो जिसकी सबसे अधिक चर्चा की जानी चाहिए, उस मामले पर सभी खामोश हैं| पिछले कुछ महीनों से बीजेपी शासित प्रदेशों की सरकारें, बीजेपी समर्थक और नेता देश में जनसंख्या बृद्धि की खूब चर्चा कर रहे हैं| कर्नाटक विधान सभा में यह चर्चा की जा रही है, जबकि उत्तर प्रदेश और आसाम में इस सन्दर्भ में क़ानून बनाने की तैयारी है| बिहार और गुजरात में भी इसकी चर्चा है| संसद में भी बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा और अनिल अग्रवाल प्राइवेट बिल पर चर्चा कराने की तैयारी में हैं| इन सबके बीच सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार औसत दम्पति के महज 2 बच्चे ही हैं, और शहरी क्षेत्रों में तो यह दर 1.6 ही है| जाहिर है, कम से कम सर्वेक्षण के अनुसार तो जनसख्या विस्फोट की बात बेमानी है, और इस बेमानी भ्रम को बीजेपी फैला रही है|

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