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PM Kisan Scam : हजारों करोड़ का पीएम किसान घोटाला- फर्जी लाभार्थियों के सहारे सत्ता हासिल कर रही है BJP !

Janjwar Desk
11 May 2022 3:30 PM GMT
PM Kisan Scam : हजारों करोड़ का पीएम किसान घोटाला- फर्जी लाभार्थियों के सहारे सत्ता हासिल कर रही है BJP !
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PM Kisan Scam : असम के मामले का खुलासा बताता है कि अधिकांश लाभार्थियों के नाम 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव से पहले जोड़े गए, साफ है कि अपने लोगों के हाथ वैधानिक तरीके से 6000 रुपये थमाकर बीजेपी की सरकार ने वोट खरीदा है....

सौमित्र रॉय का विश्लेषण

PM Kisan Scam : यह पिछले साल 29 अक्टूबर की बात है। असम के कृषि निदेशालय की सहायक अधिकारी हिमाद्रि शेषाद्रि ने जब पीएम किसान (PM Kisan Scam) की वेबसाइट खोलकर आधिकारिक रूप से लॉग इन किया तो पता चला किसी ने रातों-रात पासवर्ड बदल दिया है। NIC की मदद से जब नए पासवर्ड से डैशबोर्ड को लॉग इन किया गया तो पता चला कि 34 के बजाय 36 लोग डैशबोर्ड संभाल रहे हैं। असम में 33 जिले हैं और कृषि निदेशालय को मिलाकर 34 होने चाहिए थे।

बाद में जब तक पूरा मामला खुला तो पता चला कि एक यूजर नेम राजस्थान और दूसरा उत्तरप्रदेश के था और पूरी पड़ताल होने से पहले ही पीएम किसान (PM Kisan) में सालाना 6000 रुपये पाने वाले 15 लाख फर्जी किसान जुड़ चुके थे।

देश में 42 लाख फर्जी लाभार्थी

ये सिर्फ असम का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का 3000 करोड़ का लाभार्थी घोटाला है। फरवरी 2019 से जुलाई 2021 तक केंद्र सरकार ने 11.08 करोड़ किसानों को 1.37 लाख करोड़ रुपये बांटे। लेकिन खुद कृषि मंत्री ने पिछली जुलाई में लोकसभा को बताया कि लाभार्थियों में 42 लाख फर्जी किसान हैं।

सरकार का आंकड़ा कितना सही?

हालांकि, यह आंकड़ा भी संदेह के दायरे में है, क्योंकि अकेले असम में पीएम किसान योजना के 31 लाख लाभार्थियों में से 15 लाख फर्जी हैं। इनमें सरकारी नौकर, दो से ज्यादा खातों में 6-6 हजार लेने वाले लोग, मृतक और गुमशुदा लोग तक शामिल हैं। लेकिन सरकार के आंकड़ों में असम में 8.3 लाख ही फर्जी किसान लाभार्थी हैं। यानी सरकारी अनुमान करीब आधे का है। असम में देश के सबसे ज्यादा फर्जी किसान लाभार्थी हैं। देश की बात करें तो कुल 3000 करोड़ रुपये हर साल घोटाले के रूप में आधिकारिक तौर पर फर्जी लाभार्थियों के खाते में जाते हैं।

लाभार्थियों का सियासी गणित

असम के मामले का खुलासा बताता है कि अधिकांश लाभार्थियों के नाम 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव से पहले जोड़े गए। साफ है कि अपने लोगों के हाथ वैधानिक तरीके से 6000 रुपये थमाकर बीजेपी की सरकार (BJP Govt) ने वोट खरीदा है। सत्तर के दशक में साड़ी, धोती, 100 रुपये और शराब की बोतल देकर वोट खरीदे जाते थे। अब ज़माना बदल गया है तो सत्ता ने योजनागत रूप से कानूनी रास्ता निकाल लिया है। उत्तरप्रदेश में इसी साल के विधानसभा चुनाव में भी लाभार्थी वर्ग ने विपक्ष का सारा गणित बिगाड़ दिया था।

क्या इसलिए पैसा नहीं लौटा रहे हैं राज्य?

केंद्रीय कृषि मंत्री प्रधानमंत्री किसान योजना में 3000 करोड़ के देशव्यापी घोटाले की बात मानते हैं। वे राज्यों से फर्जी किसानों को लाभार्थियों की सूची से बाहर निकालकर घोटाले के पैसे लौटाने की बात करते हैं, लेकिन कोई राज्य इसे गंभीरता से नहीं लेता।

आखिर सालाना 6000 रुपये मौजूदा कमरतोड़ महंगाई में राहत के उस भत्ते की माफिक है, जो सरकारें अपने मुलाजिमों को देती हैं। चुनाव आने पर यह वोट में तब्दील हो जाता है। यह सच असल में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस भाषण की मानिंद है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार की तिजोरी से निकले 1 रुपये में से 15 पैसे ही गरीबों तक पहुंचते हैं। राजीव भ्रष्टाचार का संकेत दे रहे थे, यहां तो सरकार खुद ही भ्रष्टाचार में लिप्त है।

वास्तव में देखा जाए तो यह सिर्फ 3000 करोड़ का नहीं, बल्कि 50 हज़ार करोड़ का घोटाला हो सकता है, अगर देश के सभी राज्यों की सिरे से तफ्तीश हो। यह आम जनता का पैसा है और इस पैसे से सरकार अपने सियासी फायदे के लिए फर्जी लाभार्थी खड़े कर लाखों वास्तविक किसानों का हक़ मार रही है।

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