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चाबहार रेल लिंक के बाद ईरान ने भारत को दिया एक और बड़ा झटका, इस अहम प्रोजेक्ट से भी किया बाहर

Janjwar Desk
17 July 2020 11:21 AM GMT
चाबहार रेल लिंक के बाद ईरान ने भारत को दिया एक और बड़ा झटका, इस अहम प्रोजेक्ट से भी किया बाहर
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ईरान ने गैस फील्ड फारजाद-बी ब्लॉक के डिवेलपमेंट पर अकेले ही आगे बढ़ने का फैसला लिया है। पहले इस प्रोजेक्ट में भारत की गैस कंपनी ओएनजीसी भी शामिल थी, लेकिन अब ईरान ने कहा कि वह इस प्रोजेक्ट को अकेले ही पूरा करेगा...

जनज्वार। भारत को चाबहार-जाहिदान रेलवे परियोजना से बाहर किए जाने के बाद ईरान से अब एक और करारा झटका लगने की खबर है। ईरान ने गैस फील्ड फारजाद-बी ब्लॉक के डिवेलपमेंट पर अकेले ही आगे बढ़ने का फैसला लिया है। पहले इस प्रोजेक्ट में भारत की गैस कंपनी ओएनजीसी भी शामिल थी, लेकिन अब ईरान ने कहा कि वह इस प्रोजेक्ट को अकेले ही पूरा करेगा। विदेश मंत्रालय की ओर से भी ईरान के इस कदम की पुष्टि की गई है।

बता दें कि भारत साल 2009 से ही गैस फील्ड का कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए कोशिशें कर रहा था। फरजाद-बी ब्लॉक में 21.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट का गैस भंडार है। आइए जानते हैं, भारत के लिए चाबहार प्रोजेक्ट और फरजाद-बी ब्लॉक डिवलेपमेंट है कितना अहम…

पीएम नरेंद्र मोदी ने 2016 में ईरान के दौरे पर गए थे। 15 साल बाद भारत के किसी पीएम का यह ईरान दौरा था। दोनों देशों के बीच इस दौरान काफी गर्मजोशी देखने को मिली थी और पीएम नरेंद्र मोदी ने मिलियन डॉलर के निवेश से ईरान में चाबहार पोर्ट स्थापित करने का करार किया था। इस परियोजना में भारत और ईरान के अलावा अफगानिस्तान भी शामिल है। चाबहार-जाहिदान रेलवे प्रोजेक्ट भी इसी से जुड़ा हुआ है, जिससे भारत को बाहर करने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि ईरान ने इस दावे को गलत करार देते हुए कहा है कि भारत के साथ रेलवे प्रोजेक्ट को लेकर कोई डील ही नहीं हुई थी।

चाबहार पोर्ट से जाहिदान को जोड़ने वाले इस रेल प्रोजेक्ट को लेकर ईरान ने यह भी कहा है कि यदि भारत चाहे तो बाद में इसमें शामिल हो सकता है। भारत के लिहाज से बात करें तो यदि उसे ईरान के रेल प्रोजेक्ट में भागीदारी मिलती है तो वह यूरोप तक अपने सामान को पहुंचा सकता है। इसके अलावा ईरान ने चीन के साथ 400 मिलियन डॉलर का जो करार किया है, उसके तहत चीनी कंपनियां आने वाले 25 सालों में निवेश करेंगी।

यह निवेश चाबहार सेक्टर में भी होना है, जो भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। जानकार मानते हैं कि ईरान का फैसला चाबहार पोर्ट के जरिए रणनीतिक हित साधने की भारत की कोशिशों को झटका देने वाला है। चाबहार पोर्ट सिर्फ भारत की अफगानिस्तान नीति और अफगान में पाकिस्तान की घुस'पैठ को कम करने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि जिस रेल प्रोजेक्ट से भारत को बाहर किए जाने की खबर है, वह भविष्य में भारतीय के सामान कम लागत में यूरोप तक पहुंचाने में मदद करता।

इस रेल प्रोजेक्ट के जरिए चाबहार पोर्ट को जाहिदान से जोड़ा जाना है। सूत्रों के मुताबिक भारत की तैयारी इससे भी कहीं आगे की थी और वह इस लाइन को तुर्केमिनिस्तान के बोर्डर साराख तक ले जाने की योजना बना रहा था। इस तरह देखें तो कारोबार और रणनीति दोनों ही मोर्चों पर भारत को इससे नुकसान हुआ है।

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