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Sikkh Pagadi: सिक्ख सैनिक को मिली पगड़ी पहनने की इजाजत, अमेरिकी सेना के 246 वर्षों के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

Janjwar Desk
28 Sep 2021 3:26 AM GMT
Sikkh Pagadi: सिक्ख सैनिक को मिली पगड़ी पहनने की इजाजत, अमेरिकी सेना के 246 वर्षों के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा
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(अमेरिकी सेना के 246 साल के इतिहास में पहली बार एक सिक्ख सैनिक को पगड़ी पहनने की इजाजत मिली है) प्रतीकात्मक तस्वीर

Sikkh Pagadi: अमेरिकी सेना के एक सैनिक ने पगड़ी के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और अंततः उसे कामयाबी भी मिल गई है, उस सैनिक को पगड़ी पहनने की इजाजत दे दी गई है

Sikkh Pagadi: (जनज्वार)। सिक्ख समुदाय (Sikkh Cummunity) के लिए सिर पर बांधी जानेवाली पगड़ी का विशेष महत्व होता है। यह एक तरह से उनकी पहचान भी मानी जाती है। साथ ही सिक्ख समुदाय के लिए धार्मिक नजरिए से भी पगड़ी (Pagadi) बहुत अहम होती है। अमेरिकी सेना के एक सैनिक ने पगड़ी के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और अंततः उसे कामयाबी भी मिल गई है। उस सैनिक को पगड़ी पहनने की इजाजत दे दी गई है और रिपोर्ट्स के मुताबिक 246 साल के अमेरिकी सैन्य इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।

अमेरिकी मरीन कॉर्प्स (American Martine Corps) में 26 साल के एक सिख अफसर को अब पगड़ी पहनने की इजाजत दे दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना के 246 साल के इतिहास (History of American Force) में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी सिख अफसर को पगड़ी पहनने की अनुमति दी गई है। हालांकि, सैनिक ने पूर्ण धार्मिक आजादी (Communal freedom) की मांग की है और ऐसा नहीं होने पर वह अपने कोर के खिलाफ मुकदमा करने पर भी विचार कर रहा है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच साल से लगभग हर सुबह लेफ्टिनेंट सुखबीर तूर (Lft. Sukhbeer Tur ) यूनाइडेट स्टेट्स मरीन कॉर्प्स की वर्दी पहन रहे थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब उन्हें एक वफादार सिख की पगड़ी भी पहनने का मौका मिल गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीन कॉर्प्स के 246 साल के इतिहास में तूर पहले व्यक्ति हैं जिन्हें पगड़ी पहनने की अनुमति मिली है।

वहीं, सिक्ख सैनिक तूर ने एक इंटरव्यू में कहा कि आखिरकार मुझे अपने विश्वास और अपने देश में किसी एक को चुनने का अवसर नहीं आया। मैं जैसा हूं, वैसा ही रहते हुए दोनों का सम्मान करता हूं। तूर ने कहा कि जब उन्हें इसी साल कैप्टन (Captain) के रूप में प्रमोट किया गया तो उन्होंने अपील करने का फैसला किया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सैनिक तूर ने इस अधिकार को हासिल करने के लिए लंबा संघर्ष किया है। इस साल जब वह पदोन्नति पाकर कैप्टन बने तो उन्होंने अपील का फैसला किया।

वाशिंगटन पोस्ट की इस रिपोर्ट के अनुसार यह इतने लंबे समय तक चला इस तरह का पहला मामला था। बता दें कि वाशिंगटन (Washington) और ओहायो (Ohayo) में पले बढ़े भारतीय प्रवासी के बेटे तूर को कुछ सीमाओं के साथ ड्यूटी के दौरान पगड़ी पहनने की अनुमति मिली है। लेकिन युद्ध क्षेत्र में तैनात होने पर वह ऐसा नहीं कर सकेंगे।

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