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Anger in Commonwealth Countries : ब्रिटेन की राजशाही के खिलाफ राष्ट्रमंडल के देशों के बीच उठने लगे हैं विरोध के स्वर, अब ये बड़ा देश भी इस लिस्ट में हुआ शामिल

Janjwar Desk
1 Jun 2022 1:15 PM GMT
Anger in Commonwealth Countries : ब्रिटेन की राजशाही के खिलाफ राष्ट्रमंडल के देशों के बीच उठने लगे हैं विरोध के स्वर, अब ये बड़ा देश भी इस लिस्ट में हुआ शामिल
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Anger in Commonwealth Countries : ब्रिटेन की राजशाही के खिलाफ राष्ट्रमंडल के देशों के बीच उठने लगे हैं विरोध के स्वर, अब ये बड़ा देश भी इस लिस्ट में हुआ शामिल

Anger in Commonwealth Countries : ब्रिटेन की महरानी एलिजाबेथ जिस साम्राज्य में पैदा हुई थीं वो तो कबका खत्म चुका है, लेकिन अब भी ब्रिटेन की महारानी ब्रिटेन से भी काफी दूर के कई इलाकों पर राज करती हैं। वर्तमान में ब्रिटेन की महारानी दुनिया के 14 और देशों की राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिनमें कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी और द बहामास शामिल हैं...

Anger in Commonwealth Countries : जहां ब्रिटेन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सिंहासन पर आसीन होने के सात दशक पूरा होने का जश्न मनाया जा रहा है, तो दूसरी ओर राष्ट्रमंडल के कुछ सदस्य देशों में कुछ लोग इस मौके पर खुद को राजशाही और उसके औपनिवेशिक इतिहास से आधिकारिक रूप से अलग करने की मांग (Anger in Commonwealth Countries) कर हे हैं।

डीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार जमैका को गणतंत्र बनाने के लिए अभियान चलाने वालीं शिक्षाविद रोसालिया हैमिलटन का कहना है, "मैं जब महारानी के बारे में सोचती हूं, तो मुझे एक प्यारी सी बुजुर्ग महिला नजर आती हैं, यह उनके बारे में नहीं है। यह उनके परिवार की दौलत के बारे में है जो हमारे पूर्वजों से अर्जित की गई है। हम एक ऐसे बीते हुए काल की विरासत (Anger in Commonwealth Countries) से जूझ रहे हैं जो बड़ा ही दर्दनाक रहा है।

अन्याय भरा है ब्रिटेन की राजशाही का इतिहास

ब्रिटेन की महरानी एलिजाबेथ जिस साम्राज्य में पैदा हुई थीं वो तो कबका खत्म चुका है, लेकिन अब भी ब्रिटेन की महारानी ब्रिटेन से भी काफी दूर के कई इलाकों पर राज करती हैं। वर्तमान में ब्रिटेन की महारानी दुनिया के 14 और देशों की राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिनमें कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी और द बहामास शामिल हैं। अब से कुछ दिनों पहले तक ऐसे देशों की संख्या 15 थी। पर बारबाडोस ने बीते साल नवंबर में खुद को ब्रिटेन की राजशाही की छतरी से से अलग कर लिया। उसके बाद जमैका जैसे अन्य कई कैरेबियाई देश भी ऐसा ही करना चाहते हैं।

फिलहाल ​महारानी की सत्ता पर काबिज होने के 70 वर्ष पूरा होने पर ब्रिटेन जो जश्न मनाया जा रहा है उसका लक्ष्य है युनाइटेड किंग्डम और राष्ट्रमंडल के देशों की विविधता को दर्शाना। लेकिन एक स्वागत करने वाले और विविध समाज की छवि वाले ब्रिटेन इस दौरान कुछ नुकसान भी पहुंच रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक कैरिबियन से आए सैकड़ों, या शायद हजारों, लोग जो दशकों तक ब्रिटेन में वैध रूप से रहे थे, उन्हें आवास, रोजगार और चिकित्सा के अवसर नहीं दिए गए, क्योंकि उनके पास अपने दर्जे को साबित करने के लिए कागज नहीं थे। इस मुद्दे (Anger in Commonwealth Countries) पर ब्रिटिश सरकार ने माफी मांगी है और हर्जाना देने का भी वादा किया है, लेकिन इस मामले को लेकर ब्रिटेन और कैरिबियन के लोगों में नाराजगी अब भी बनी हुई है।

उपनिवेशवाद की त्रासदी को नहीं भूल पा रहे राष्ट्रमंडल के देश

वर्षगांठ के जश्न (Anger in Commonwealth Countries) के तहत ही महारानी के पोते राजकुमार विलियम और उनकी पत्नी केट मार्च में बेलीज, जमैका और बहामास की यात्रा पर गए थे। यात्रा का उद्देश्य इन देशों से रिश्तों को मजबूत करना था, लेकिन हुआ ठीक उसका उल्टा। एक मेड़ के पीछे से बच्चों से हाथ मिलाते और एक सैन्य परेड में एक खुली लैंड रोवर गाड़ी में बैठे शाही दंपति की तस्वीरों में कई लोगों के जहन में उपनिवेशवाद की यादें ताजा कर दीं। वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर सिंथिया बैरो-गिल्स कहती हैं कि लगता है कि ब्रिटेन के लोग कैरिबियन में शाही यात्राओं को मिलने वाली हरी प्रतिक्रियाओं के प्रति काफी अंधे हैं। जमैका में विरोध करने वालों ने मांग की कि ब्रिटेन दासता के लिए हर्जाना दे और प्रधानमंत्री एंड्रू होलनेस ने नम्रतापूर्वक विलियम से कहा कि देश आगे बढ़ रहा है। इसे देश के गणतंत्र बनने की योजना के संदर्भ में एक इशारा माना जा रहा है।

राष्ट्रमंडल से अलग होना चाहते हैं कई देश

अगले महीने एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने महारानी के बेटे राजकुमार एडवर्ड से कहा कि उनका देश भी एक दिन महारानी को राष्ट्राध्यक्ष के पद से हटा देगा। विलियम ने इस भावना की मजबूती को माना और कहा कि भविष्य का फैसला लोगों के हाथों में है। उन्होंने बहामास में कहा, "हम गर्व और आदर से आपके भविष्य के बारे में आपके फैसलों का समर्थन करते हैं। संबंध बदलते हैं। दोस्ती लंबे समय तक रहती है।

साल 1952 में महारानी बनी थीं एलिजाबेथ

आपको बता दें कि साल 1952 में ब्रिटेन के राजा जॉर्ज षष्टम की मौत के बाद जब एलिजाबेथ महारानी (Anger in Commonwealth Countries) बनी थीं, तब वो केन्या में थीं। केन्या सालों तक चले एक हिंसक संघर्ष के बाद 1963 में आजाद हुआ था। 2013 में ब्रिटेन की सरकार ने 1950 के दशक के "माउ माउ" आंदोलन के दौरान केन्या के हजारों लोगों को यातना देने के लिए माफी मांगी और अदालत के बाहर हुए एक समझौते के तहत करोड़ों रुपए दिए। केन्या के कई लोगों के लिए ब्रिटिश साम्राज्य की यादें आज भी ताजा हैं। केन्याई कार्टूनिस्ट, लेखक और टिप्पणीकार पैट्रिक गाथारा कहते हैं, "शुरुआत से ही उनके शासन पर उनके साम्राज्य की क्रूरता के कभी न मिटने वाले दाग लगे हुए हैं। उन्होंने आज तक उस दमन, उत्पीड़न, अमानुषीकरण और बेदखली के लिए माफी मांगना तो दूर, उसे स्वीकार भी नहीं किया है। ब्रिटेन के अधिकारियों को उम्मीद है कि गणराज्य बनने वाले देश 54 सदस्य देशों वाले राष्ट्रमंडल में रहेंगे। इनमें से अधिकांश देश पूर्व ब्रिटिश कॉलोनियां हैं और रानी उनकी रस्मी रूप से मुखिया हैं।

पर अब ऑस्ट्रेलिया भी राष्ट्रमंडल से हटने की कवायद (Anger in Commonwealth Countries) करने वाले देशों की सूची में शामिल हो गया है। ऑस्ट्रेलिया के नए प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने अपने मंत्रिमंडल में एक गणराज्य के लिए सहायक मंत्री भी शामिल किया है, जिसे रानी को राष्ट्राध्यक्ष के पद से हटाने की दिशा में एक सांकेतिक कदम माना जा रहा है। सिडनी से सांसद मैट थिस्सलथ्वेट इस कार्यभार को संभालेंगे।

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