दुनिया

रामदेव रूढ़िवादी नहीं क्रांतिकारी : नेपाल में वामपंथी क्रांति के नाम पर हजारों युवाओं की आहुति लेने वाले वाले प्रचंड का बयान

Janjwar Desk
26 Nov 2021 2:24 PM GMT
रामदेव रूढ़िवादी नहीं क्रांतिकारी : नेपाल में वामपंथी क्रांति के नाम पर हजारों युवाओं की आहुति लेने वाले वाले प्रचंड का बयान
x
नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सशस्त्र अंग जनमुक्ति सेना के शीर्ष नेता रह चुके नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल प्रचंड के नजर में बाबा रामदेव रूढ़िवादी नहीं रह गए हैं। इनके मुताबिक योग गुरु बाबा रामदेव क्रांतिकारी व बड़े प्रगतिशील है।

जनज्वार। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सशस्त्र अंग जनमुक्ति सेना के शीर्ष नेता रह चुके नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल प्रचंड के नजर में बाबा रामदेव रूढ़िवादी नहीं रह गए हैं। इनके मुताबिक योग गुरु बाबा रामदेव क्रांतिकारी व बड़े प्रगतिशील है। नेपाल में वामपंथी क्रांति के नाम पर हजारों युवाओं की आहुति लेने वाले वाले प्रचंड के इस बयान को सुनकर अधिकांश लोगों को भले ही आश्चर्य हो, पर विचारों के मामले में हर कोई यह कह रहा है इनका यह एक नया अवतार है।

नेपाल में योग गुरु रामदेव के स्वामित्व वाले दो टेलीविजन चैनलों को बिना पंजीकरण के संचालित किए जाने के बाद हंगामा मचा हुआ है। पिछले दिनों नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा व कम्युनिस्ट पार्टी आफ नेपाल माओइस्ट सेंटर के चेयरमैन पुष्प कमल दहल प्रचंड ने दो टीवी चैनल आस्था नेपाल टीवी और पतंजलि नेपाल टीवी का शुभारंभ किया था। ये दोनों चैनल धार्मिक व योग से संबंधित कार्यक्रमों के लिए शुरू किए गए हैं। इस दौरान ही पुष्प कमल दहल प्रचंड ने बाबा रामदेव को लेकर यह बयान दिया।

बताया जा रहा है कि बहुराष्ट्रीय कंपनी पतंजलि ने उन दो चैनलों में निवेश किया है, जहां रामदेव और आचार्य बालकृष्ण मुख्य प्रवर्तक हैं। नेपाली कानून के अनुसार, मीडिया और फिल्म क्षेत्रों में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है। लेकिन अगर किसी विदेशी टेलीविजन चैनल को नेपाल से संचालित करने की जरूरत है, तो उसे सभी आवश्यक कानूनी और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। उधर नेपाल के सूचना व प्रसारण विभाग के महानिदेशक गोगन बहादुर हैमल ने कहा है कि दोनों चैनलों की ओर से पंजीयन के लिए कभी आवेदन नहीं दिया गया। इनके द्वारा चैनल शुरू करने की तय प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि हमने पाया कि ये चैनल बगैर कानूनी औपचारिकता पूरी किए चालू किए गए हैं और बगैर इजाजत के इनका प्रसारण ढांचा तैयार किया गया है तो हम इनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हैमल ने कहा कि हम पतंजलि नेपाल द्वारा जारी बयान पर भरोसा नहीं कर सकते। हमने सचाई का पता लगाने के लिए एक कमेटी का गठन किया है।

उधर पतंजलि योगपीठ नेपाल ने बयान जारी कहा है कि उसने कंपनी रजिस्ट्रार के कार्यालय के माध्यम से टेलीविजन चैनल्स की सत्यापन प्रक्रिया का पालन किया है। इसके साथ ही टीवी चैनल्स से संबंधित निकायों से अन्य इजाजतों की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। हम टीवी चैनल्स का वास्तविक प्रसारण नहीं करते हैं, हम इसके लिए सिर्फ तकनीकी तैयारी करते हैं। हमने सिर्फ टेलीविजन प्रसारण कार्यालय का उद्धाटन किया है। टीवी चैनल्स पर योग, आयुर्वेद शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, आध्यात्मिक दर्शन के कार्यक्रम प्रसारित होंगे। हम तय प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही प्रसारण शुरू करेंगे।

पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने कहा कि आस्था टीवी के पास नेपाल में डाउनलिंकिंग के लिए लाइसेंस हैं, जो 2024 तक वैध है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री देउबा ने दो चैनलों आस्था नेपाल टीवी और पतंजलि नेपाल टीवी के लिए ट्रायल रन 19 नवंबर 2021 को शुरू किया है और इन चैनलों के कंटेंट नेपाली भाषा में हैं। पूर्ण प्रसारण के लिए ट्रायल रन हेतु व्यावसायिक अनुमति के लिए 30 दिनों का समय मिला है।'उन्होंने कहा कि 19 दिसंबर के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूर्ण प्रसारण शुरू होगा। उन्होंने कहा, 'नेपाल के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस तथ्य को पहले ही स्वीकार कर लिया है कि आस्था नेपाल टीवी और पतंजलि नेपाल टीवी को नियमों और नियमन के बाद ही शुरू किया जाएगा।

इस बीच, नेपाल के स्थानीय पत्रकारों के संगठन फेडरेशन आफ नेपालीज जर्नलिस्ट्स ने बयान जारी कर कहा है कि देश में मीडिया में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है और पतंजलि चैनलों की लांचिंग कानून का उल्लंघन है।

मालूम हो कि इससे पहले जून में बाबा रामदेव के कोरोनिल किट पर हिमालयी राष्ट्र नेपाल ने प्रतिबंध लगा दिया था। जिसकी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहुत चर्चा रही। अब दो चैनलों के शुरूवात को लेकर नेपाल में हंगामा मचा हुआ है। खास बात या है कि नेपाल की राजनीति में वामपंथी आंदोलन के अगुवा की भूमिका में रहे पुष्प कमल दहल प्रचंड इस पूरे मामले में बाबा रामदेव के साथ खड़े दिख रहे है। जिस रामदेव के राजनीतिक चरित्र को लेकर भारतीय राजनीति में आलोचना होती रही है। कांग्रेस की सरकार के समय भ्रष्टाचार को लेकर बाबा रामदेव जो विरोध में मुखर थे आज उन्हीं सवालों पर भाजपा के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

ऐसे रामदेव के पक्ष में कमल दहल प्रचंड खड़े नजर आ रहे हैं। जिनके नेतृत्व में चली सशस्त्र क्रांति के बाद 2006 में नेपाल में राजशाही का अंत हुआ था। इस दौरान हुए समझौते के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी) सरकार में शाम‌िल हुई। वर्ष 2008 में पहली बार चुनाव के बाद प्रचंड ने सरकार का नेतृत्व किया था। वह 18 अगस्त 2008 से 25 मई 2009 तक प्रधानमंत्री रहे थे।तीन अगस्त 2016 को वह दूसरी बार प्रचंड प्रधानमंत्री बने थे।

वे कम्युनिस्ट पार्टी नेपाल ऑफ नेपाल (माओवादी) तथा इसी पार्टी के सशस्त्र अंग जनमुक्ति सेना के भी शीर्ष नेता रहे हैं। जनमुक्त‌ि सेना ने नेपाल में 1996 से 2006 तक सशस्त्र संघर्ष चलाया था। इस संघर्ष में लगभग 13,000 नेपाली नागरिकों मारे जाने का अनुमान लगाया जाता है। वे 1986 में प्रचंड नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के मशाल ग्रुप के महासचिव बने यही पार्टी बाद में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नाम से मशहूर हुई।

1990 में नेपाल में लोकतंत्र की वापसी के बाद प्रचंड अडंरग्राउंड हो गए। इस समय तक उन्हें नेपाली राजनीति में ज्यादा पहचान हासिल नहीं हुई थी और पार्टी द्वारा होनेवाले कार्यो का श्रेय पार्टी के नेता डॉक्टर बाबुराम भट्टराई को मिलता रहा। लेकिन प्रचंड वैश्विक रूप से तब सुर्खियों में आये जब 1996 में वह पार्टी के सशस्त्र विंग के सर्वेसर्वा बने।

ऐसे क्रांतिकारी व्यक्तित्व के व्यक्ति के नजर में बाबा रामदेव रुढ़िवादी के बजाय प्रगतिशील व क्रांतिकारी नजर आने लगे तो बहस होना स्वाभाविक है। राजशाही के अंत के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी देने वाले लोगों के राजनीतिक विरासत के साथ खड़े नेपालियों के जेहन में प्रचंड को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। ये लोग प्रचंड में किसी बड़े राजनितिक बदलाव को लेकर आश्चर्य में है।

Next Story

विविध

Share it