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Afghan refugee Girl Sharbat Gula : नेशनल ज्योग्राफिक की 'अफगान रिफ्यूजी गर्ल' की हकीकत आई दुनिया के सामने, इटली में शरणार्थी बन काट रही जिंदगी

Janjwar Desk
2 Aug 2022 10:41 AM GMT
Afghan refugee Girl Sharbat Gula  : नेशनल ज्योग्राफिक की अफगान रिफ्यूजी गर्ल की हकीकत आई दुनिया के सामने, इटली में शरणार्थी बन काट रही जिंदगी
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Afghan refugee Girl Sharbat Gula : हेपेटाइटिस सी से पीड़ित शरबत गुला के पति का कई साल पहले निधन हो गया था, समय और कठिनाई ने उनकी जवानी मिटा दी है, मगर हरी आंखों में अभी भी चमक कायम है....

Afghani refugee Girl Sharbat Gula : साल 1985 में जिस हरी आंखों वाली लड़की की तस्वीर पूरी दुनिया में पसंद की गई, जिसका पता अब चल पाया है। तालिबानी मूल की इस लड़की शरबत गुला ने तालिबान के आते ही देश छोड़ दिया। नीली आंखों वाली शरबत गुला, जिसका 1985 में नेशनल ज्योग्राफिक के कवर पर प्रकाशित प्रभावशाली चित्र युद्धग्रस्त अफगानिस्तान का प्रतिबिंब था, देश छोड़कर भाग गई और अब रोम में रह रही है। ऐसा कई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है।

गुला की उम्र अब चालीस से अधिक हो चुकी है और उनके 4 बच्चे हैं। अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी और तालिबान शासन कायम होने के कुछ समय बाद गुला को इटली की राजधानी रोम में ले जाया गया था। इतालवी सरकार ने एक बयान में कहा, 'प्रधानमंत्री के कार्यालय ने इटली में उनका स्थानांतरण किया।'

शरबत गुला तब महज 12 साल की थीं, जब पाकिस्तान के शरणार्थी शिविर में एक फोटोग्राफर ने उनकी ये तस्वीर ली। पूरी दुनिया की नजर उनकी हरी आंखों पर आकर टिक गईं। अपनी ऐतिहासिक तस्वीर में हरी आंखों वाली शरबत गुला ने सर पर हेडस्कार्फ बांधा था, जिसकी आंखों में दर्द भरा हुआ था। मशहूर होने के कुछ साल बाद 2016 में शरबत को पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर फर्जी पहचान पत्र के साथ देश में रहने का आरोप लगा और वापस युद्धग्रस्त देश अफगानिस्तान भेज दिया गया। तब से वह वहीं रह रही थीं।

शरबत गुला और उनके चार बच्चों को पेशावर में पाकिस्तान से लगभग 37 मील उत्तर पश्चिम में तोरखम सीमा के पार अफगान अधिकारियों को सौंप दिया गया था। घटनास्थल पर मौजूद दो सीमा शुल्क अधिकारियों के अनुसार, वह दुखी दिख रही थीं। वहां से उन्हें काबुल ले जाया गया, जहां तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनकी पत्नी रूला ने राष्ट्रपति भवन में शरबत के लिए एक स्वागत समारोह की मेजबानी की और एक नए घर की चाबी सौंपी।

गनी ने कहा था, 'एक बच्ची के रूप में उन्होंने लाखों लोगों के दिलों पर राज किया है, क्योंकि वह विस्थापन का प्रतीक थीं। जो सुंदरता, तेज उनके चेहरे पर दिख रहा था उसने लाखों दिलों को जीत लिया। यह 1980 के दशक और 1990 के दशक तक की सबसे प्रसिद्ध तस्वीरों में से एक बन गई। उनका स्वागत करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। हमें यह देखकर गर्व होता है कि वह अपनी मातृभूमि पर गरिमा और सुरक्षा के साथ रह रही हैं।' लेकिन जब तालिबान ने देश पर एक बार फिर कब्जा किया, तो गुला ने एक बार फिर अफगानिस्तान छोड़ दिया।

1985 में अफगानिस्तान पर सोवियत कब्जे के बीच पाकिस्तान में एक शरणार्थी शिविर में युद्ध फोटोग्राफर स्टीव मैककरी द्वारा तस्वीर उतारे जाने के बाद गुला अफगान दुर्दशा का प्रतीक बन गई थी। तब वह महज 12 वर्ष की थी।

'मैंने इन अविश्वसनीय हरी आँखों वाली इस छोटी लड़की को देखा, और मुझे तुरंत लगा कि यह वास्तव में ऐसी तस्वीर थी जिसे मैं लेना चाहता था।' स्टीव मैककरी ने कहा था।

गुला के इस अद्भुत चित्र को नेशनल ज्योग्राफिक के जून 1985 के अंक के कवर पर रखा गया था, जिसे 'अफगानिस्तान के युद्धग्रस्त फ्रंटियर के साथ' शीर्षक दिया गया था।

भले ही गुला की तस्वीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा मिली, लेकिन उनकी पहचान 2002 तक अज्ञात रही।उन्हें मैककरी और नेशनल ज्योग्राफिक के पत्रकारों की एक टीम ने अफगानिस्तान के पहाड़ों में पाया। उस वक्त उनकी तीन बेटियां थीं और पति बेकर का काम कर रहे थे।

हेपेटाइटिस सी से पीड़ित शरबत गुला ने मीडिया को बताया कि उनके पति का कई साल पहले निधन हो गया था। हालाँकि 'समय और कठिनाई ने उनकी जवानी मिटा दी थी' उस समय पत्रिका ने रिपोर्ट किया, 'आँखें अभी भी चमकती हैं, उनका तेज अब भी कायम हैं।'

मैककरी ने द गार्जियन को बताया, 'अफगान खुद को उसी स्थिति में पाते हैं, जैसे वे 1980 के दशक में थे। वे सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं, विस्थापित हो रहे हैं और शरण मांग रहे हैं।'

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