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बंगाल ओपिनियल पोल: मोदी-शाह की मजहबी नफरत की शिकस्त के आसार से ममता समर्थकों में उत्साह का संचार

Janjwar Desk
26 March 2021 6:55 AM GMT
बंगाल ओपिनियल पोल: मोदी-शाह की मजहबी नफरत की शिकस्त के आसार से ममता समर्थकों में उत्साह का संचार
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ओपनियन पोल में कुल 294 विधानसभा सीटों में से टीएमसी को 160 सीटें मिलने का अनुमान है, 5 साल पहले हुए चुनाव के मुकाबले टीएमसी को 51 सीटों का नुकसान नजर आ रहा है, टीएमसी को 2016 के चुनाव में यहां 211 सीटों पर जीत हासिल हुई थी......

जनज्वार ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी जोरों पर है। कल यानी 27 मार्च को पहले चरण की वोटिंग होने जा रही हैं। सभी तैयारियां अतिम चरण में हैं। पश्चिम बंगाल में इस बार किसकी सरकार बनेगी, इसको लेकर टाइम्‍स नाउ- सी वोटर ओपिनियन पोल सामने आया है। पहले चरण के मतदान से पहले कराए गए इस पोल में बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी की सरकार बनती दिख रही है पर उनको पिछले चुनावों की तुलना में कई सीटों का नुकसान भी हो रहा है।

इसके अलावा उनके वोट शेयर में भी 2.8 प्रतिशत की गिरावट आने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद ममता के समर्थकों के मन में इस पोल से नए उत्साह का संचार हुआ है। चूंकि मोदी-शाह जिस तरह किसी युद्ध लड़ने की शैली में नफरत की राजनीति को आजमा कर बंगाल पर कब्जा करने की कोशिश करते रहे हैं, उनको बंगाल के लोग करारा जवाब देने का मन बना चुके हैं।

ओपनियन पोल में कुल 294 विधानसभा सीटों में से टीएमसी को 160 सीटें मिलने का अनुमान है। 5 साल पहले हुए चुनाव के मुकाबले टीएमसी को 51 सीटों का नुकसान नजर आ रहा है। टीएमसी को 2016 के चुनाव में यहां 211 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वहीं, 2016 के विधानसभा चुनाव में महज तीन सीटों पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी को इस चुनाव में 112 सीटें मिलने का अनुमान है। उसे 109 सीटों का लाभ मिलता नजर आ रहा है।

पोल के अनुसार, टीएमसी के वोट शेयर में 2.8 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। 2016 के चुनाव में यह 44.9 फीसदी था, जो 2021 के चुनाव में 42.1 प्रतिशत होने का अनुमान है। वहीं, बीजेपी के वोट शेयर में 27.2 फीसदी की बड़ी बढ़त का अनुमान है। 2016 में जहां यहां 10.2 फीसदी था, वहीं 2021 में यह 37.4 फीसदी रहने का अनुमान है।

सर्वे के मुताबिक, इस बार के चुनावों में कांग्रेस और वामदल गठबंधन को सबसे अधिक नुकसान होने का अनुमान है। 2016 चुनाव में जहां उन्‍हें 76 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, वहीं इस बार उन्‍हें 22 सीटें मिलने का अनुमान है। इस तरह उन्‍हें 54 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इसी साल जनवरी में अपना 66वां जन्मदिन मनाया है। उनका जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक बेहद सामान्य परिवार में हुआ था। ममता बनर्जी साल 2011 से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं और प्रदेश की नौवीं सीएम हैं। इससे पहले वह देश की संसद में बंगाल की सबसे युवा सांसद और भारत सरकार की केंद्रीय मंत्री भी रही हैं।

वह राज्य के मुख्यमंत्री पद पर कार्य करने वाली पहली महिला हैं। 19 मई 2016 को वह लगातार दो बार जीतने वाली एकमात्र महिला मुख्यमंत्री बनी थीं। आठवें मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के अंत में जबरदस्त जीत के तुरंत बाद उन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप भी लगे थे। वर्ष 1997 में बनर्जी ने खुद को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग कर लिया था। इसके बाद उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की, जिसे टीएमसी या एआईटीएमसी भी कहा जाता है।

ममता बनर्जी ने अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी के सदस्य के रूप में की थी। 1976 में वह राज्य महिला कांग्रेस की महासचिव चुनी गईं। 1984 में कोलकाता के जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से उन्होंने अनुभवी साम्यवादी नेता सोमनाथ चटर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा और ये चुनाव जीत कर सबसे युवा भारतीय सांसद बन गईं। उन्होंने अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव पद पर भी काम किया। 1991 में नरसिम्हाराव की सरकार में वे मानव संसाधन, युवा कल्याण–खेलकूद और महिला-बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री भी रहीं।

उनके द्वारा प्रस्तावित खेल–कूद विकास योजना को सरकार से समर्थन न मिलने पर उन्होंने विरोध के तौर पर अपना इस्तीफा दे दिया था। 1996 में कांग्रेस से मतभेद के चलते उन्होंने पार्टी छोड़कर अपना अलग दल बनाने का फैसला किया और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। उनकी पार्टी ने काफी कम समय में बंगाल की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ कड़ी चुनौती खड़ी कर दी।

1999 में ममता बनर्जी एनडीए गठबंधन सरकार में शामिल हो गईं और उन्हें रेल मंत्री के पद पर नियुक्त किया गया। वित्तीय वर्ष 2000-2001 के दौरान उन्होंने 19 नई ट्रेनों की घोषणा की। 2001 में उन्होंने एनडीए सरकार से भी गठबंधन तोड़ लिया लेकिन 2004 में वे फिर से एनडीए से जुड़ीं और कोयला और खदान मंत्री का पद संभाला। 2006 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। ये उनकी पार्टी की सबसे बड़ी असफलता थी।

इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने यूपीए सरकार से गठबंधन किया और ममता बनर्जी फिर एक बार रेल मंत्री बनाई गईं। साल 2011 का विधानसभा चुनाव उनके सियासी सफर में एक नया मोड़ ले कर आया। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत के साथ ही 20 मई 2011 को ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बन गईं।

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