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कोविड -19

यूपी: रमना गांव में कोरोना से हुई मौत लेकिन अस्पताल ने डेथ सर्टिफिकेट थमा दिया निमोनिया और टायफाइड का

Janjwar Desk
19 May 2021 2:35 PM GMT
यूपी: रमना गांव में कोरोना से हुई मौत लेकिन अस्पताल ने डेथ सर्टिफिकेट थमा दिया निमोनिया और टायफाइड का
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(रामरथी सिंह की मौत से एक दिन पहले आयी थी कोविड पॉजिटिव की रिपोर्ट, मिला निमोनिया और टायफायड से मौत का सर्टिफिकेट)

वाराणसी के सीएमओ डॉ वी बी सिंह ने बताया की यदि परिजनों की ओर ऐसी कोई लिखित शिकायत की जाएगी तो उसपर नियमानुसार जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी...

जनज्वार डेस्क। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक चौंकाने वाला मामल सामने आया है। जहां एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज की मौत कोरोना वायरस की वजह से हो गयी लेकिन उनके परिजनों को दिये डेेथ सर्टिफिकेट में निमोनिया और टायफ़ायड कारण बताया गया है। अस्पताल के इस कारनामे से मृतक के परिजन हैरान और परेशान हैं।

जानकारी के मुताबिक ये मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के आदर्श गांव रमना गांव का है। मृतक रमाशंकर के पोते जयप्रकाश ने बताया कि 3 दिन कब भीतर ही हमारे परिवार के दो वरिष्ठ सदस्य की कोरोना से मौत हो गई। दोनों ही अलग-अलग निजी अस्पताल में भर्ती थे। 27 अप्रैल को रामरथी सिंह की मौत हुई उसके दो दिन बाद 29 अप्रैल को साईं नाथ हॉस्पिटल में रमाशंकर सिंह की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि मौत के एक दिन पहले मेरे दादा रमाशंकर सिंह की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, लेकिन डेथ सर्टिफिकेट में उनके मौत का कारण निमोनिया और टाइफाइड को बताया गया। जबकि दूसरे सदस्य के मौत का अब तक डेथ सर्टिफिकेट ही नहीं मिला है।

जयप्रकाश सिंह ने बताया कि अस्पताल से दादा के मौत के गलत सर्टिफिकेट जारी करने की शिकायत करने दो दिन पहले हमलोग अस्पताल गए थे। लेकिन अस्पताल के प्रबंधन से मुलाकात नहीं हो सकी। बुधवार को फिर से अस्पताल जाकर गलत सर्टिफिकेट की शिकायत करेंगे यदि सुनवाई नहीं हुई तो फिर स्थानीय पुलिस और सीएमओ ऑफिस में भी इसकी शिकायत की जाएगी।

रमाशंकर के परिवार के रामगोपाल बताते हैं कि चाचा 15 दिन और बड़े पापा एक हफ्ते बीमार रहे थे। उन्हें सर्दी, जुखाम व बुखार की समस्या हुई। तीन चार दिन हमने घर पर ही इलाज किया लेकिन फिर हम एक अस्पताल उन्हें ले गए। वहां डॉक्टर ने बताया कि उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो गया है। फिर तीन-चार अस्पताल हम दौड़े लेकिन कहीं ऑक्सीजन मिल ही नहीं रहा था। उनका केवल कोविड रैपिड टेस्ट हुआ। उनका आरटीपीसीआर नहीं किया गया। मौत होने के बाद उनका कोविड डेथ सर्टिफिकेट नहीं दिया गया।

उन्होंने बताया कि अधिकांश मामलों में यही हो रहा है कि मरीज अस्पताल जा रहे हैं। नाक के जरिए जो टेस्ट होता है उसका रिजल्ट दो ढाई दिन में आ रहा है। मरीज बहुत तेजी से मर रहे हैं। चालीस लोग अब तक गांव में मर चुके हैं। ये कोविड से हुई मौतों की गिनती में भी नहीं आएंगे। हेल्पलाइन नंबर दे दिया जाता है लेकिन कोई फोन कॉल नहीं उठाता है। होता कुछ भी नहीं है।

रामगोपाल ने बताया कि जो सरकार के द्वारा आंकड़े दिए जा रहे हैं और जो वास्तव में मौतें हो रही हैं उनमें बहुत बड़ा फासला है। कम से कम 20 गुना का अंतर होगा। कोविड से कितनी मौतें हुई इसका सच कभी पता नहीं चलेगा।

वाराणसी के सीएमओ डॉ वी बी सिंह ने डेथ सर्टिफिकेट को लेकर कहा कि यदि परिजनों की ओर ऐसी कोई लिखित शिकायत की जाएगी तो उसपर नियमानुसार जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

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