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कोविड -19

11 से 15 मई के बीच देश में चरम पर होगा कोरोना का कहर : आईआईटी के वैज्ञानिकों ने बताया

Janjwar Desk
23 April 2021 1:22 PM GMT
11 से 15 मई के बीच देश में चरम पर होगा कोरोना का कहर : आईआईटी के वैज्ञानिकों ने बताया
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)

देश में शुक्रवार 23 अप्रैल को एक दिन में संक्रमण के 3,32,730 नए मामले सामने आये हैं, जबकि 2263 लोगों की मौतों की खबर है, जिन कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा है उनकी संख्या बढ़कर 24,28,616 पहुंच चुकी है...

जनज्वार। देश में हर रोज कोरोना मरीजों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। अब इस बार के कोरोना केसों के चरम को लेकर आईआईटी के वैज्ञानिकों ने बताया है कि हमारे देश में 11 से 15 मई के बीच यह पीक पर हो।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के वैज्ञानिकों के मुताबिक अपने गणितीय मॉडल के आधार पर उन्होंने यह अनुमान लगाया है कि भारत में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर 11 से 15 मई के बीच चरम पर होगी और उस समय देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 33 से 35 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि इसके बाद मई अंत तक मामलों में कमी आने की बात भी कही जा रही है।

गौरतलब है कि हमारे देश में शुक्रवार 23 अप्रैल को एक दिन में संक्रमण के 3,32,730 नए मामले सामने आये हैं, जबकि 2263 लोगों की मौतों की खबर है। देश में जिन कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा है उनकी संख्या बढ़कर 24,28,616 पहुंच चुकी है।

आईआईटी कानपुर और हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने एप्लाइड दस ससेक्टिबलए अनडिटेक्डए टेस्टड (पॉजिटिव) ऐंड रिमूव एप्रोच (सूत्र) मॉडल के आधार पर अनुमान लगाया है कि मामलों में कमी आने से पहले मध्य मई तक उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 10 लाख तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और तेलंगाना नए मामलों के संदर्भ में 25 से 30 अप्रैल के बीच नयी ऊचांई छू सकते हैं, जबकि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ शायद पहले ही नए मामलों के संदर्भ में चरम पर पहुंच गए हैं।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल ने कहा है कि हमने पाया कि 11 से 15 मई के बीच उपचाराधीन मरीजों की संख्या में वृद्धि होने की तार्किक वजह है और यह 33 से 35 लाख हो सकती है। यह तेजी से होने वाली वृद्धि है, लेकिन उतनी तेजी से ही नए मामलों भी कमी आने की संभावना है और मई के अंत तक इसमें भारी कमी आएगी।

वैज्ञानिकों ने अब तक इस अनुसंधान पत्र को प्रकाशित नहीं किया है और उनका कहना है कि सूत्र मॉडल में कई विशेष पहलू हैं जबकि पूर्व के अध्ययनों में मरीजों को बिना लक्षण और संक्रमण में विभाजित किया गया था। नए मॉडल में इस तथ्य का भी संज्ञान लिया गया है कि बिना लक्षण वाले मरीजों के एक हिस्से का पता संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की जांच या अन्य नियमों के द्वारा लगाया जा सकता है।

इस महीने की शुरुआत में गणितीय मॉडल के माध्यम से वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि देश में 15 अप्रैल तक संक्रमण की दर अपने चरम पर पहुंच जाएगी, लेकिन अब यह तारीख 11 से 15 मई के बीच बतायी जा रही है।

आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल का जो बयान मीडिया में आ रहा है उसके मुताबिक मौजूदा चरण के लिए हमारे मॉडल के मापदंड लगातार बदल रहे हैं, इसलिए एकदम सटीक आकलन मुश्किल है। यहां तक कि रोजाना के मामलों में मामली बदलाव से चरम की संख्या में हजारों की वृद्धि कर सकते हैं।'

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