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2021 में दुनिया की सबसे दरिद्र अर्थव्यवस्था वाला देश बनेगा भारत, रेटिंग एजेंसी मूडीज का आकलन

Janjwar Desk
6 Sep 2020 4:00 AM GMT
2021 में दुनिया की सबसे दरिद्र अर्थव्यवस्था वाला देश बनेगा भारत, रेटिंग एजेंसी मूडीज का आकलन
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File photo 

एजेंसी ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय गणित का बड़े उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव होगा, इस कारण अगले कुछ सालों तक उनका कर्ज बोझ काफी ऊंचा होगा.....

जनज्वार। मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने भारत को सर्वाधिक कर्ज बोझ वाली अर्थव्यवस्था होने की संभावना जताई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2021 तक भारत उभरते बाजारों में सबसे अधिक कर्ज बोझ वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा।

यह संभावना ऐसे समय में जताई गई है, जब कोरोना लॉकडाउन से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय गणित का बड़े उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव होगा। इस कारण अगले कुछ सालों तक उनका कर्ज बोझ काफी ऊंचा होगा।

मूडीज का कहना है कि उभरते बाजार की अर्थव्यवस्थाओं में बढ़े प्राथमिक घाटे की वजह से उनका कर्ज बोझ 2019 के मुकाबले 2021 तक 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इनमें से कुछ पर ऊंचे ब्याज भुगतान का भी बोझ होगा जिससे उनका कर्ज बोझ और बढ़ेगा। मूडीज ने कहा कि बड़े उभरते बाजारों वाली अर्थव्यवस्थाओं में ब्राजील, भारत और दक्षिण अफ्रीका का कर्ज बोझ सबसे ज्यादा हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि कमजोर वित्तीय प्रणाली और आकस्मिक देनदारियों के चलते भारत, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की के लिये यह जोखिम ज्यादा है।

हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक केन्द्र सरकार का राजकोषीय घाटा लॉकडाउन के कारण कमजोर राजस्व संग्रह के चलते वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों (अप्रैल- जुलाई) में ही पूरे साल के बजट अनुमान को पार कर गया है।

जबकि CAG (महालेखा नियंत्रक) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई के दौरान राजकोषीय घाटा इसके वार्षिक अनुमान की तुलना में 103.1 प्रतिशत यानी 8,21,349 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एक साल पहले इन्हीं चार माह की अवधि में यह वार्षिक बजट अनुमान का 77.8 प्रतिशत रहा था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश वित्त वर्ष 2020- 21 के बजट में राजकोषीय घाटे के 7.96 लाख करोड़ रुपये यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

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