Modi राज में उच्च शिक्षा का हाल : पहले कलंकित हुई कुलपतियों की गरिमा, अब नई तैनाती से ही परहेज

जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट
जनज्वार। उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार का ढिढोरा पीटनेवाली भाजपा सरकार में सबसे अधिक कुलपतियों की गरिमा कलंकित हो रही है। कहीं वित्तिय अनियमितता के आरोप लगे तो कहीं नियुक्ति में भ्रष्टाचार के। अब हालात यह है कि नई कुलपतियों के तैनाती से ही सरकार परहेज करने लगी है। मात्र यूपी में ही पांच बड़े विश्वविद्यालयों के कुलपति का पद खाली पड़ा है। जिसका कार्य कार्यवाहक के सहारे चलाया जा रहा है। ऐसे में शैक्षणिक समेत अन्य महत्वपूर्ण निर्णय व उनके अनुपालन का कार्य प्रभावित हो रहा है।
अक्टूबर माह में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आरएल गोधारा के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी किए थे। जिसके लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। राजभवन को प्रशासनिक व वित्तिय अनियमितता की शिकायत मिली थी।
पिछले जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में खबर आई की यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आगरा के डा भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति को प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितताआंे के आरोप में हटा दिया गया।कुलपति प्रोफेसर अशोक कुमार मितल को हटाते हुए शिकायतों के जांच के लिए सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई।
जुलाई माह में ही बिहार के छपरा स्थित जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डा. फारूक अली पर भी वितीय व प्रशासनिक अनियमितता व कालेजों के नवसंबद्धता देने में गड़बडी़ के आरोप लगे।राजभवन के संयुक्त सचिव राजकुमार सिन्हा ने पत्र भेजते हुए सात दिन के अंदर जवाब मांगा था।
गत जुन माह में बिहार के राजभवन ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो देवी प्रसाद सिंह को वित्तिय अनियमितता के आरोप में लंबी छुटटी पर भेज दिया। आदेश दिया गया कि आरोपों की जांच तक अनिवार्य अवकाश पर रहेंगे। इनके खिलाफ जांच के लिए ललित नारायण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया।
लखनउ स्थित किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति को गत अगस्त माह में लोकायुक्त की नोटिस मिली। यह नोटिस सामाजिक कार्यकर्ता श्रीकांत सिंह द्वारा कुलपति के खिलाफ वित्तिय और प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत के आधार पर जारी की गई। शिकायतकर्ता ने कोविड-19 की जांच किट महंगी दर पर खरीदने,नियम विरूद्ध प्रमोशन करने,कम योग्य व्यक्ति की नियुक्ति जैसे आरोप लगाए थे।
पटना हाईकोर्ट ने पिछले अगस्त माह में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति हनुमान प्रसाद पांडेय,कुलसचिव डा आरके ठाकुर और सीसीडीसी अमिता शर्मा के खिलाफ जांच की याचिका को निष्पादित करते हुए मामले को लोकायुक्त के समक्ष रखने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता उमर शेख ने लोकहित याचिका दायर कर इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार व वित्तिय अनियमितता का आरोप लगाया था। यह आरोप लगा था कि काफी संख्या में अवैध नियुक्ति का अनुमोदन और नियमितीकरण किया गया है। इसके तहत कुलपति द्वारा करोड़ों रूपये के अवैध भुगतान किया गया है और 37 अवैध नियुक्तियां की गई है।
असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने वितीय अनियमितता एवं सरकारी धन के दुरूपयोग के आरोप में डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति रणजीत तमु ली को गत फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में निलंबित कर दिया। डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के साथ-साथ संस्थान के अन्य कर्मचारी संगठनों व लाहोवाल की विधायक ऋतुपर्णा बरूआ ने राज्यपाल को पत्रक सौंपकर तमुली पर अनियमितता व सरकारी धन के दुरूपयोग के आरोप लगाए थे।
एक वर्ष पूर्व यूपी के भारतखण्डे संगीत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसएस काटकर के खिलाफ कई बड़े घोटाले व मनमानी समेत 15 आरोप लगे थे। इन आरोपों के आधार पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुलपति के खिलाफ जांच के आदेश दिए। एक ही फर्म को बार बार विश्वविद्यालय में काम देना,बिना टेण्डर के मनमानी तरीके से काम कराने,यूनिवर्सिटी के काॅपर्स फण्ड के सापेक्ष बिना शासन की अनुमति के लोन लेने जैसे आरोप भी शामिल थे। आखिरकार पिछले वर्ष दिसंबर माह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुलपति को बर्खास्त कर दिया।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति आरएल हंगलू के खिलाफ दो वर्ष पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्टपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर प्रशासनिक जांच कराने की सिफारिश की थी। इनके खिलाफ वितीय अनियमितता और प्रशासनिक कुप्रबंधन की शिकायतें मिली थी। इन सब जांचों से घिरे कुलपति ने आखिरकार वर्ष 2020 के पहली जनवरी को इस्तिफा दे दिया।
दो वर्ष पूर्व यूपी के बरेली स्थित रूहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल और वित अधिकारी सुरेश चंद्र मिश्र पर वितीय अनियमितता के आरोप लगे थे। यह कहा गया था कि उनके कार्यकाल में150 करोड़ रूपये की वितीय अनियमितता हुई थी। यह आरोप लगे थे कि विश्वविद्यालय का पैसा पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में लगाया गया था,जबकि ये पैसा किसी राष्टीयकृत बैंक में जमा किया जाना चाहिए था।
स्थाई कुलपतियों की नियुक्ति करने में हो रहा विलंब
उत्तर प्रदेश प्रदेश के एकमात्र तकनीकी राज्य विश्वविद्यालय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से लेकर बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय जैसे करीब पांच राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद खाली पड़े हैं। यहां दूसरों को अतिरिक्त कार्यभार देकर काम चलाया जा रहा है।
डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक का कार्यकाल बीते अगस्त माह में पूरा हो चुका है। वर्तमान में वह कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनका कार्यकाल पूरा होने के कई महीनों पहले से ही नए कुलपति की तलाश की जा रही है लेकिन, अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी। वर्तमान में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के निदेशक और उपकुलपति प्रो. विनीत कंसल को यहां का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) के कुलपति प्रोफेसर समशेर को बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। यहां प्रोफेसर जेवी वैशम्पायन का कार्यकाल समाप्त हो गया, जिसके बाद यह व्यवस्था की गई है।
गोमती नगर में स्थित भातखण्डे संगीत संस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति श्रुति सडोलीकर काटकर को कुछ महीने पहले वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता के आरोपों में हटा दिया गया था। उसके बाद से ही यहां किसी कुलपति की नियुक्ति नहीं हो पाई है। यहां की जिम्मेदारी कमिश्नर आलोक रंजन देख रहे हैं।
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अशोक कुमार मित्तल को अनियमितता के आरोप में पद से हटा दिया गया था। इनका कार्यभार लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। इसके बाद से आज तक स्थाई कुलपति नियुक्त नहीं हुए हैं।
मेरठ के मंडलायुक्त सुरेन्द्र सिंह को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व कुलपति का कार्यकाल पूर्ण होने की वजह से यह व्यवस्था की गई है। मंडलायुक्त सुरेन्द्र सिंह को जीबीयू के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है ताकि विश्वविद्यालय की शैक्षिक एवं प्रशासनिक कार्यों का निष्पादन सुचारु रूप से जारी रहे।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में नए कुलपति की तलाश शुरू हो गई है। विवि में कुलपति प्रो.एनके तनेजा का 28 नवंबर को कार्यकाल पूरा हो रहा है। यहां के लिए नए कुलपति की तलाश चल रही है। उधर उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान, सैफई के कुलपति डॉक्टर राजकुमार सिंह को कार्यकाल खत्म होने से पहले ही शासन ने छुट्टी पर भेज दिया था। उनका कार्यकाल बीती 31 मई को पूरा हो रहा था। उनको हटाए जाने के बाद से ही नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया चल रही है।





