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पर्यावरण

पीलीभीत : 118 साल बाद दुधवा नेशनल पार्क में मिला दुर्लभ आर्किड का पौधा

Janjwar Desk
5 July 2020 9:25 AM GMT
पीलीभीत : 118 साल बाद दुधवा नेशनल पार्क में मिला दुर्लभ आर्किड का पौधा
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इस फोटो का प्रयोग सिर्फ प्रतीकात्मक उद्देश्य से किया गया है.

यह दुर्लभ आर्किड प्रजाति पीलीभीत में आखिरी बार 1902 में देखी गई थी, इसे युरोफिया ओबटुसा नाम दिया गया है...

लखीमपुर। उत्तर प्रदेश के दुधवा नेशनल पार्क में लुप्तप्राय प्रजातियों की श्रेणी में रखा गया एक दुर्लभ आर्किड पौधे की किस्म पाई गई है।

आमतौर पर ग्राउंड आर्किड (युलोफिया ओबटुसा) के रूप में लोकप्रिय इस किस्म को कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इनडेंजर्ड स्पीसेज (सीआईटीईएस) के तहत 'लुप्तप्राय प्रजाति' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

इस खोज की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दुधवा या राज्य के किसी अन्य वन क्षेत्र के इतिहास में कभी भी इस आर्किड को नहीं देखा गया है।

करीब 118 साल पहले इंग्लैंड के केव हर्बेरियम ने आर्किड का दस्तावेजीकरण किया था। यह प्रजाति पीलीभीत में साल 1902 में आखिरी बार देखी गई थी।

दुधवा क्षेत्र के निदेशक संजय पाठक ने कहा, 30 जून को मुदित गुप्ता (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) और फजलुर रहमान (कट्रानियाघाट फाउंडेशन) के साथ, मैं दुधवा रिजर्व में किशनपुर और सोनारीपुर रेंज में घास का एक सर्वेक्षण कर रहा था, तभी हमने पौधों का एक समूह देखा जो नाजुक फूलों के गुच्छों के साथ लंबे घास जैसी टहनियों के साथ उगा था। हालांकि पहले ये कभी रिपोर्ट नहीं किए गए थे, तो जिज्ञासावश हमने उन्हें क्लिक किया। हमने बाद में पौधे की पहचान करने के लिए पर्यावरणविदों और वनस्पति विज्ञानियों से संपर्क किया। हमने मोहम्मद शरीफ सौरभ से संपर्क किया, जो बांग्लादेश के ढाका में नोर्थ साउथ विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान और प्रबंधन विभाग में काम करते हैं। उन्होंने अपने देश में इससे थोड़े अलग आर्किड किस्म का दस्तावेज तैयार किया था।

उन्होंने कहा कि आर्किड और इसके विवरणों की पहचान करने में तीन दिन लग गए और शनिवार को आर्किड को दुर्लभ प्रजाति 'यह दुर्लभ आर्किड प्रजाति पीलीभीत में आखिरी बार 1902 में देखी गई थी, इसे युरोफिया ओबटुसा नाम दिया गया है...' के रूप में दर्ज किया गया।

पाठक ने आगे कहा कि इस आर्किड प्रजाति के बारे में कोई प्रमाणित रिकॉर्ड भारत में उपलब्ध नहीं थे, हालांकि कुछ रिपोर्टाें में उत्तर भारत और नेपाल में इसकी उपस्थिति का उल्लेख किया गया है।

संयोग से फजलुर हमान ने ही जुलाई 2012 में दुधवा टाइगर रिजर्व में दुर्लभ लाल कुकरी सांप को फिर से खोजा था।

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