आंदोलन

दलित युवा जगदीश की निर्मम हत्या के खिलाफ लालकुआं से लेकर पिथौरागढ़ तक गुस्सा, वीभत्स हत्याकांड को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी

Janjwar Desk
6 Sep 2022 9:22 AM GMT
दलित युवा जगदीश की निर्मम हत्या के खिलाफ लालकुआं से लेकर पिथौरागढ़ तक गुस्सा, वीभत्स हत्याकांड को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी
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Almora Kand : समय रहते शासन प्रशासन ने नवविवाहित दंपती गीता और जगदीश के सुरक्षा देने संबंधी पत्र का संज्ञान लिया होता तो जगदीश चंद्र की हत्या नहीं होती, इस मामले में जल्द न्याय नहीं मिला तो प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जायेगा...

Almora Kand : अल्मोड़ा के भिकियासैंण में युवा दलित नेता जगदीश चन्द्र की अंतर्जातीय विवाह के चलते हुए निर्मम हत्या के मामले में लोगों का गुस्सा चरम पर है। कुमाउं मण्डल के कई शहरों में वीभत्स हत्याकांड को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है।

पिथौरागढ़ में आक्रोशित युवाओं ने डीएम ऑफिस पर नारेबाज़ी के साथ प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर घटना में शामिल सभी दोषियों पर कठोर कार्यवाही के साथ साथ इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से की गयी लापरवाही की जाँच और दोषी कर्मियों पर कार्यवाही की माँग की। युवाओं ने उत्तराखंड में जातिगत अत्याचार एवं उत्पीड़न की घटनाओं की बढ़ती संख्या के चलते प्रशासन द्वारा जातिगत हिंसा के मामलों में अतिरिक्त तत्परता एवं संवेदनशीलता से कार्यवाही करने की माँग करते हुए कहा कि पुलिसबल को जातिगत हिंसा के मामलों की जाँच करने, उनसे निपटने हेतु अलग से प्रशिक्षण देने जैसे तरीक़ों पर भी विचार किया जाए।

इकट्ठा हुए इन युवाओं ने अल्मोड़ा पुलिस प्रशासन के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी के साथ समाज की जातिवादी मानसिकता के खिलाफ आवाज़ उठाई। यहां पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्र रावत ने कहा कि "हत्या से 12 दिन पूर्व ही युवक-युवती ने अंतर्जातीय विवाह किया था और युवती के परिजनों से लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों के चलते उन्होंने कुछ दिन पूर्व ही एसएसपी को पत्र लिखकर सुरक्षा प्रदान करने की माँग की थी। इतना संवेदनशील मामला होने के बावजूद पुलिस द्वारा नवविवाहित दंपती को सुरक्षा प्रदान नहीं की गयी।

पुलिस प्रशासन की इस भारी लापरवाही एवं चूक के चलते एक दलित युवक को अपनी जान गँवानी पड़ी। यह बेहद आक्रोशित करने वाला एवं शर्मनाक है।" कृष्णा ने कहा कि "यह बेहद आक्रोशित करने वाला है कि जातिगत हिंसा के बढ़ते मामलों के बावजूद प्रशासन के रवैय्ये में कोई बदलाव आता नहीं दिख रहा। इस मामले में प्रशासन से लिखित अपील करने के बावजूद सुरक्षा प्रदान न करना और शिकायत पर कार्यवाही करने में ढिलाई बरतना पुलिस प्रशासन के कर्तव्यबोध, कार्यशैली और उनकी न्यायप्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"

छात्रा एकता ने कहा कि "इस जातीय हिंसा की घटना ने हमारे समाज को शर्मसार कर दिया है। हमारे समाज में जातीय घृणा की इतना गहरी पैठ है ये घटना इसका उदाहरण है।"

छात्र दीपक ने कहा कि "अनूसूचित जाति-जनजाति पर होने वाले अत्याचारों से बचाव के लिए क़ानून के अस्तित्व में होने के बावजूद पुलिस प्रशासन इस क़ानून के पालन में एवं अनूसूचित जाति-जनजाति समुदाय को सुरक्षा प्रदान करने में असफल नज़र आ रहा है।"


छात्रा शीतल ने कहा कि "पुलिस की संवेदनशीलता इस जातीय हिंसा की घटना रोक सकती थी। इन मामलों में ऐसी असंवेदनशीलता अक्षम्य है, दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही की जानी चाहिए।"

इस अवसर पर अभिषेक, मोहित, रजत, गार्गी, निधि खर्कवाल, गणेश, विक्की, गोविंद, एकता, शीतल, ललित, कमल, पंकज, रमेश, रवि समेत अनेकों युवा उपस्थित रहे।

लालकुआँ में इस घटना के विरोध में नैनीताल जिला के लालकुआँ के कार रोड मेन मार्केट मे विभिन्न संगठनों द्वारा का बाजार में जुलूस निकाला गया, जिसमें जातिवादी मानसिकता का पुतला दहन किया गया। कार रोड चौराहे पर हुई सभा में कार्यकर्ताओं ने जगदीश चंद्र के हत्यारों का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर तत्काल अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने, जगदीश के परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने, जगदीश के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने तथा जगदीश चंद्र तथा उसकी पत्नी द्वारा पुलिस प्रशासन को सुरक्षा के लिए दिए गये प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की गई।

इस प्रदर्शन में प्रगतिशील युवा संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, सर्वोदय शिल्पकार सेवा समिति, सर्व श्रमिक निर्माण कर्मकार संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, शिल्पकार समाज संगठन, मुंशी हरिप्रसाद टम्टा समिति, अंबेडकर पार्क सेवा समिति, आदि से जुड़े अनेक महिलाओं तथा युवाओं की भागीदारी रही।

भवाली में नगर पालिका हॉल में आयोजित बैठक में उपपा नेता निवासी पनुवाद्योखन सल्ट जगदीश चंद्र की निर्मम हत्या में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की गई। साथ ही मृतक जगदीश चंद्र एवं उसकी पत्नी गीता को न्याय दिलाने के लिए जनता से आगे आने की अपील करते हुए कार्यकर्ताओं ने हाथ में बैनर लेकर जात पात खत्म करने और हत्यारों को फांसी दिए जाने के नारों के साथ कोतवाल उमेश कुमार मलिक के माध्यम से राष्ट्रपति को पत्र भेजा।

वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते शासन प्रशासन ने सुरक्षा देने संबंधी उनके पत्र का संज्ञान लिया होता तो जगदीश चंद्र की हत्या नहीं होती। इस मामले में जल्द न्याय नही मिला तो प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जायेगा। वक्ताओं ने कहा कि राज्य को देवभूमि कहा जाता है, यहां देवताओ का निवास कहा जाता है। लेकिन इस तरह से जगदीश की हत्या करना यहां के लोगो के अंदर की घृणा को उजागर करता है। जबकि हमारा संविधान धर्म जाति भेद खत्म कर समानता की बात कहता है। यह इतना दर्दनाक हादसा है जिसने सबको अंदर तक झकझोर दिया है। समाज में जातिवाद के खिलाफ जागरूकता लानी जरूरी है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हो।

नैनीताल में मोमबत्ती जलाकर जघन्य जगदीश हत्याकांड के विरोध में प्रदर्शन किया गया

पूर्व पालिकाध्यक्ष दयाल आर्या ने कहा कि झकझोर देने वाली यह घटना उस सरकार के समय हो रही है जो सबका साथ सबका विकास की बात कह रही है। घटना बताती है कि सरकार कुछ भी कहे, धरातल पर इन बातों का कोई मतलब नहीं है। इस तरह सामाजिक भेदभाव खत्म नही हो सकता। इस तरह की घटनाओ से देश की छवि खराब हो रही है। विदेशो तक में भारत की छवि को ऐसी घटनाओं से आघात पहुँच रहा है। इस मौके पर पूर्व पालिकाध्यक्ष दयाल आर्या, तरुण जोशी, खष्टी बिष्ट, नरेश पाण्डे, हरेंद्र आर्या, सुरेश आर्या, अरुण कुमार, पंकज कुमार, मोहन चन्द्र, बबलू, मनोज कुमार, गौतम, जितेंद्र आर्या आदि मौजूद रहे।

नैनीताल में मोमबत्ती जलाकर इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किया गया। जगदीश चंद्र की हत्या की नैनीताल पीपुल्स फोरम द्वारा घोर भर्त्सना करते हुए जातिवादी दलित मानसिकता के खिलाफ तल्लीताल गांधी मूर्ति के पास मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में प्रोफेसर उमा भट्ट, प्रोफेसर शीला रजवार, प्रोफेसर शेखर पाठक, प्रदीप पांडे, कैलाश जोशी, दिनेश उपाध्याय, माया चीलवाल, भारती जोशी, हरीश पाठक प्रियंका, भूमिका, जिया पाठक, तुषार पाठक, किशोर कुमार जोशी, परिवर्धन डांगी सहित तमाम लोग शामिल रहे।

हल्द्वानी में आयोजित शोक सभा में वक्ताओं ने समाज में जाति और वर्ण भेद की इस घृणित मानसिकता और सामाजिक अपराध के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। सबने एकमत होकर सरकार से जगदीश चंद्र के परिवार को मुआवजा देने और उनकी पत्नी को आर्थिक, सामाजिक जीवन की सुरक्षा के लिए सरकारी नौकरी देने की माँग हुई। वक्ताओं ने कहा कि अपराधियों को कठोरतम देकर समाज में ऑनर किलिंग की मानसिकता के खिलाफ एक नजीर बनानी आवश्यक है। साथ ही सामाजिक न्याय और उनकी पत्नी को सम्मान जनक जीवन जीने के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों से सहयता के लिए आगे आने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

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