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योगी के शहर गोरखपुर में दलित टोले पर सवर्णों का बर्बर हमला, गर्भवती महिला समेत आधा दर्जन लोग जख्मी

Janjwar Desk
14 Jun 2020 6:28 PM GMT
योगी के शहर गोरखपुर में दलित टोले पर सवर्णों का बर्बर हमला, गर्भवती महिला समेत आधा दर्जन लोग जख्मी
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दबंग सवर्णों ने हमले में इंसान तो छोड़िये बेजुबान जानवरों तक को नहीं बख्शा
​हथियारों से लैस सवर्णों का हमला इतना बर्बर था कि उन्होंने न गर्भवती महिला को बख्शा और न बेजुबान जानवरों को, कई मोटरसाइकिलों और गाड़ियों को भी बुरी तरह किया क्षतिग्रस्त...

गोरखपुर, जनज्वार। दलित उत्पीड़न की खबरें हमारे देश में आमतौर पर सामने आती रहती हैं। उच्च जातियों द्वारा उत्पीड़न के नाम पर दलितों को मौत के घाट तक उतार दिया जाता है।

दलित उत्पीड़न का एक मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र में आने वाले गांव पोखरी में आया है, जहां 13 जून को सवर्ण जाति के दबंगों ने गांव के दलितों टोले पर दिनदहाड़े हथियारों से लैस होकर हमला कर दिया, जिसमें एक गर्भवती महिला समेत आधा दर्जन लोग बुरी तरह से जख्मी हो गए।

पुलिस के पास मामला पहुंचने के बावजूद पहले तो गंभीर से घायलों को इलाज तक मुहैया नहीं कराया गया, बाद में पीड़ित पक्ष का दबाव बढ़ा तो मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

पीड़ित पक्ष से बात करने के बाद इंकलाबी नौजवान सभा के सुजीत कुमार कहते हैं, दलित बनाम राजपूत का मामला पहली बार 29 अप्रैल को सामने आया था। गांव के कोटेदार सुरेश चंद्र और ग्राम प्रधान शैलेंद्र चंद्र जो कि राजपूत जाति के ही हैं, दोनों के बीच पहले से ही तनातनी है। ग्राम प्रधान शैलेंद्र मनरेगा के तहत रोड बनवा रहे थे। काम करने वालों में सवर्णों के हमले में बुरी तमरह घायल हुए रामगति भी ​थे। 29 अप्रैल को रामगति जब रोड ​बना रहे थे तभी कोटेदार सुरेश चंद्र आए और उन्होंने रामगति से कहा कि मेरे खेत से रोड नहीं फेंकी जाएगी। रामगति ने जब कोटेदार से ​कहा कि मैं तो मजदूर हूं, आपको मना करना है तो ग्राम प्रधान शैलेंद्र चंद्र से कहिए।

इतना सुनते ही कोटेदार सुरेश चंद्र ने दलित रामगति को मां-बहन और जातिसूचक गालियां देनी शुरू कर दीं और धमकाकर काम बंद करा दिया। अपनी इस बेइज्जती और गाली—गलौज किये जाने से नाराज दलित रामगति ग्राम प्रधान के साथ थाने चले गये, मगर थानेदार ने मुकदमा लिखने की जगह समझौता कराने पर जोर ​दिया। रामगति का कहना था,'बात—बात में जाति का औकात बताना, मां—बहन की गालियों से पहले बात न शुरू करना, इनका काम बन गया है, आखिर हम कब तक सहेंगे।' रामगति के कहने के बावजूद थानेदार ने तब मुकदमा नहीं लिखा।

दलित बनाम सवर्ण के बीच अप्रैल से ही चल रही तनातनी दोबारा 12 जून को बढ़ गयी। इस गांव में 40-45 दलितों के और 60-65 घर सवर्णों के हैं। यानी यह सवर्ण बहुल गांव है।

पीड़ित दलित परिवारों से मिलकर लौटे राकेश सिंह बताते हैं, गांव में 12 जून को काली मेला लगा था। मेले में गांव के सभी समाज के लोग पहुंचे, लेकिन वहां भी राजपूत जाति के लड़के दलित युवकों को गालियां बकने लगे। मना करने पर वह ललकारने लगे, जिसके बाद झगड़ा हुआ और राजपूत जाति के लड़कों की मौके पर संख्या कम होने कारण उन्हें वहां से भागना पड़ा। 12 जून की ही शाम को पास के पकड़ी चौराहे पर दलित रामगति के बेटे ने अंडे का ठेला लगा रखा था। वहां पहुंचकर राजपूत ​जाति के दो लड़के शेरू चंद और पिंटू चंद रामगति के बेटे को यह कहते हुए मारने लगे कि मेले में तुम लोग बहुत हीरो बन रहे थे। यहां भी दलित जाति के कुछ नौजवान बीचबचाव के लिए आ गये और सवर्ण हमलावरों को भागना पड़ा। लेकिन इस बात को गांव में राजपूतों ने कथित इज्जत और मूंछ का सवाल बना लिया। इसी के बाद दबंग सवर्णों ने दलितों पर सामूहिक हमले की तैयारी की।

13 जून की सुबह लाशें पाटने की तैयारी में थे सवर्ण

राकेश सिंह आगे कहते हैं, जाति की इज्जत का मामला बनते ही कोटेदार और ग्राम प्रधान एक हो गए। इन दोनों ने पिंटू चंद और शेरू चंद के साथ मिलकर आसपास के कई राजपूत गांवों के युवाओं को इकट्ठा किया। इधर दलित पक्ष के लोग भी अपने बचाव में तैयार थे, लेकिन दलित परिवारों के बड़े-बुजुर्गों के बीच में आने से मामला शांत हो गया। मगर सवर्ण दबंग अपनी जातिवादी सामंती ठसक में यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे कि दलित आकर हमारे आगे झुककर माफी क्यों नहीं मांग रहे? उसके बाद फिर दुबारा झुंड बनाकर राजपूत युवाओं ने हमला किया,​ जिसमें एक गभवती महिला समेत करीब आधा दर्जन महिला-पुरुष बुरी तरह से घायल हो गये हैं। दबंगों की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है​ कि घायल दलितों का थानेदार मेडिकल कराने को तैयार नहीं था। थानेदार प्रवीण सिंह का जोर था कि पहले दलित बैठकर समझौता कर लें, फिर दवा-इलाज हो, जब​कि घायल ​दलित ​परिवार इस बात पर टिके थे कि पहले उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।

बहुत दबाव के बाद एफआईआर दर्ज की गयी है, मगर पीड़ित पक्ष उसकी कॉपी उपलब्ध नहीं करवा पाया। एक और एफआईआर दलितों के खिलाफ सवर्णों ने भी दर्ज करवायी है।

इंकलाबी नौजवान सभा के सुजीत कुमार कहते हैं, उत्तर प्रदेश में जब से योगी की सवर्ण सामंती सरकार आई है, दलित-गरीबों पर सामंती दबंगो-अपराधियों के हमले अनवरत जारी हैं। ऐसा प्रतीत होता है को प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। बीते वर्ष जिस तरह से सवर्ण सामंती आपराधियों ने सहारनपुर जनसंहार को अंजाम दिया, तबसे लेकर अभी तक पूरे प्रदेश सहित, गोरखपुर के अस्थोला, सोपारा, रघुपुर, लाखुन, झगहा, ओझोली, सहित विभिन्न गांवों में सामंती-अपराधियों की दबंगई को हम सबने देखा। इसमें जनसंहार से लेकर दलितों की बर्बर पिटाई, महिलाओं के बलात्कार, अपराध की घटनाओं में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रदेश की योगी सरकार इन घटनाओं को नियंत्रित करने बजाय सवर्ण सामंती अपराधियों को संरक्षण देने का काम रही है, जिससे प्रदेश में अपराधियों के हौसले बढ़ गए हैं।

मामला संज्ञान में आने के बाद इंकलाबी नौजवान सभा ने इस घटना के लिए गांव में अपनी फैक्ट फाइंडिंग टीम गयी, जिसमें इनौस प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, भाकपा माले जिला कमेटी सदस्य श्याम चरन, बांसगांव ब्लाक कमेटी सदस्य तसामूल, भोला प्रसाद शामिल थे।

जांच टीम में शामिल लोग पीड़ित पक्ष से बात करने के बाद बताते हैं, यह मामला सीधे-सीधे सवर्ण सामंती दबंगई है। पीड़ितों ने हमें बताया कि राजपूत जाति से आने वाले पोखरी गांव के सुरेंद्र चंद, शेलेन्द्र चंद, शेरू चंद, पिंटू चंद के नेतृत्व में आसपास के कई गांव के राजपूत बिरादरी के लगभग 25-30 लोगों ने दलित टोले पर हथियारों से हमला किया, जिसमे दलित टोले के 55 वर्षीय रामगति पुत्र गब्बू, अभिषेक, अतुल, पुत्र रामगति, पुत्री अंकिता पत्नी मीरा, रामसिंगार, संतोष तथा एक गर्भवती महिला सहित कई लोगों पर जानलेवा हमला किया गया।

इंकलाबी नौजवान सभा से जुड़े सुजीत कुमार कहते हैं कि मुख्यमंत्री के जिले का मामला होने के बावजूद यहां के स्थानीय किसी अखबार ने यह खबर नहीं छापी। इसलिए मामले की जानकारी हम तक देर से पहुंची।

पीड़ित दलितों ने बताया कि उनके घर के बाहर खड़ी 4 मोटरसाइकिल, एक इलेक्ट्रॉनिक ऑटो को भी पूरी तरह से दबंगों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। दबंगों ने पशुओं तक को भी नहीं छोड़ा। दलितों के दरवाजे पर बंधी गाय-भैंस को भी बुरी तरह से मारा पीटा गया। भैंस जो आठ महीने की गाभिन थी, उसे इतनी बुरी तरह पीटा कि उसका गर्भपात हो गया।

पीड़ित कहते हैं, जब पुलिस से हमने इसकी शिकायत की और वह घटनास्थल पर पहुंची तो बजाय हमलावरों पर कार्रवाई करने के वह वह मामले को मैनेज करने में लग गयी। पीड़ित पक्ष को इलाज तक मुहैया कराने को पुलिस तैयार नहीं हुई। भारी जनदबाव के बाद पीड़ितों लोगों को गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर किया गया, जिसके बाद उनका इलाज और एफआईआर दर्ज हो पायी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी अभी तक दबंग जाति के किसी हमलावर की गिरफ्तारी नहीं की गयी है। दूसरी तरफ दबंग राजपूत दलितों को लगातार मुकदमा वापस लेने और जान से मारने तक की धमकी दे रहे हैं।

डरे-सहमे पीड़ित दलित कहते हैं, यदि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर अपराधियों के खिलाफ़ कानूनी कार्यवाही नहीं करेगा तो हम पर हमले और बढ़ेंगे, स्थिति विस्फोटक हो सकती है, क्योंकि हमें लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। हमारा सामूहिक नरसंहार करने की भी धमकी दबंग जाति के अपराधी लोग दे रहे हैं।

फैक्ट फाइंडिंग टीम ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मारपीट के मुख्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी कर कानूनी कार्यवाही करे और पीड़ित दलितों को समुचित इलाज की व्यवस्था कर उन्हें सुरक्षा प्रदान करे। इसी के साथ दलित टोले को हुए नुकसान की भरपाई भी दबंग जाति के हमलावरों से वसूल करे।

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