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राज्य गठन के 22 वर्ष पूरे हो जाने के बावजूद नहीं बन पाया शहीदों के सपनों का उत्तराखंड, पोस्टरों में दिखा समूचा आंदोलन

Janjwar Desk
9 Nov 2022 12:26 PM GMT
राज्य गठन के 22 वर्ष पूरे हो जाने के बावजूद नहीं बन पाया शहीदों के सपनों का उत्तराखंड, पोस्टरों में दिखा समूचा आंदोलन
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Uttarakhand Foundation day 2022 : नये राज्य का लाभ भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, माफियाओं और पूंजीपतियों ने उठाया है जबकि जनता के हाल बदहाल हैं। रोजगार न होने के कारण एक ओर पहाड़ से युवाओं का लगातार पलायन हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर पर्यटन के नाम पर पहाड़ों को ऐशगाह बनाया जा रहा है...

Uttarakhand Foundation day 2022 : उत्तराखंड राज्य के 23वें स्थापना दिवस के मौके पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने महाविद्यालय परिसर में उत्तराखंड आंदोलन की महत्त्वपूर्ण झलकियों को पोस्टरों के माध्यम से जीवंत कर दिया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से आज की पीढ़ी के छात्र-छात्राओं ने राज्य आंदोलन के दौरान हुई मुश्किलों को बेहद करीब से अनुभव करते हुए पोस्टर प्रदर्शनी की सराहना की। पोस्टर प्रदर्शनी में राज्य आंदोलन के दमन, महिलाओं के संघर्षों, युवाओं के आंदोलन का मिला जुला कोलाज प्रस्तुत किया गया।

प्रदर्शनी के दौरान परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि और विनोद ने छात्रों को प्रत्येक पोस्टर के माध्यम से राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुये बलिदानियों की याद दिलाते हुए उन्हें बताया कि उत्तराखंड राज्य का गठन इन्हीं बलिदानियों की बदौलत हुआ है। लेकिन आज राज्य गठन के 22 वर्ष पूरे हो जाने के बावजूद भी शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन सका है।

नये राज्य का लाभ भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, माफियाओं और पूंजीपतियों ने उठाया है जबकि जनता के हाल बदहाल हैं। रोजगार न होने के कारण एक ओर पहाड़ से युवाओं का लगातार पलायन हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर पर्यटन के नाम पर पहाड़ों को ऐशगाह बनाया जा रहा है। हालिया अंकिता भंडारी हत्याकांड इसी का परिणाम है।


आज शिक्षा के निजीकरण, भयंकर बेरोजगारी और लगातार बढ़ते अपराधों से जिस तरह पूरे देश की जनता पीड़ित है उसी तरह उत्तराखंड की जनता भी पीड़ित है। देश की सरकारों ने शिक्षा-स्वास्थ्य सभी को बाजार के हवाले कर दिया है। पढ़ लिखने के बाद भी हमारे युवा पूरे देश की तरह उत्तराखंड के सिडकुल में बहुत कम वेतन वाली ठेकेदारी की नौकरियों में खटने को विवश हैं। शहीदों ने जिस राज्य की संकल्पना की थी, उससे उत्तराखंड आज भी कोसों दूर है। जिसके लिए युवा पीढ़ी को ही आगे आना होगा। इस मौके पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि, विनोद, राज, सौरभ, प्रशांत सहित कई छात्र मौजूद रहे।

जबकि दूसरी ओर इस मौके पर राज्य निर्माण आंदोलनकारियों, विभिन्न सामाजिक राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शहीद पार्क लखनपुर में राज्य निर्माण आंदोलन में शहीद आंदोलनकारियों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी। इस दौरान लोगों ने शहीदों के सपनों को साकार करने, राज्य की अवधारणा को लागू करने का संकल्प दोहराया।

शहीद पार्क लखनपुर में राज्य आंदोलनकारी उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी के संचालन में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने 22 साल बाद भी राज्य की अवधारणा से जुड़े सवालों का समाधान न करने, खटीमा मसूरी मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को आज तक सजा न देने पर रोष जताया। वक्ताओं का कहना था कि इन 22 सालों में सरकारी शिक्षा, सरकारी चिकित्सा बद से बदतर हो गई है। नौकरियों को दलालों के द्वारा सरकारी संरक्षण में बेचा जा रहा है। अपराधी माफियाओं की सत्ता में गहरी घुसपैठ हो गई है।

पहाड़ों से पलायन जारी है। राज्य की परिसंपत्तियों पर आज भी उत्तर प्रदेश का स्वामित्व है। वक्ताओं ने सरकारों पर राज्य की अवधारणा को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य विरोधी सत्तारूढ़ पार्टियों ने पर्वतीय राज्य की अवधारणा को ध्वस्त कर दिया है। राज्य आंदोलनकारियों, जन संगठनों, राज्य निर्माण की ताकतों को एकजुट होकर शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए आगे आने की अपील की।

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