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धार्मिक स्थलों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर लगे रोक, इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका दाखिल

Janjwar Desk
28 May 2021 3:14 AM GMT
धार्मिक स्थलों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर लगे रोक, इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका दाखिल
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PHOTO- NEWS BHARTI. 
याचिका में मंदिरों, मस्जिदों व गिरिजाघरों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी है। इससे पहले भी हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गयी है। जिनमें सिर्फ मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की मांग की गयी थी।

जनज्वार ब्यूरो, लखनऊ। गुरुवार 27 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में मंदिरों, मस्जिदों और गिरजाघरों में प्रार्थना और अजान के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह याचिका अधिवक्ता आशुतोष कुमार शुक्ल ने दायर की है।

यह पहली याचिका है जिसमें मंदिरों, मस्जिदों और चर्चों से लाउड स्पीकर हटाने की मांग की गई है। इससे पहले भी हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गयी है। जिनमें सिर्फ मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की मांग की गयी थी। इन तत्वों की सिर्फ़ मस्जिद की अजान से नींद खराब होती थी।

याचिका में मंदिर, मस्जिद और चर्च में प्रार्थना और अजान के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है। याची का कहना है कि लाउडस्पीकर के शोर के कारण पास में रहने वाले लोगों की नींद में खलल पड़ती है। यह शोर टॉर्चर जैसा है।

याची ने कहा है - कोविड की दूसरी लहर में कई राज्यों में लगाए गए लॉकडाउन के कारण प्रत्येक नागरिक घर पर है। कर्मचारी ऑफिस का काम घर से कर रहे हैं। बच्चे भी घर में ऑनलाइन क्लास के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। वकील भी घर से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा सुनवाई में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में धार्मिक स्थलों में लाउडस्पीकर के प्रयोग से खलल पड़ रहा है।

याची ने तर्क दिया है कि हर आदमी को उतनी ही आसानी से सोने का हक है जितना आसानी से वह सांस लेता है। अच्छी नींद, अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। नींद ऐसी मौलिक, आधारभूत आवश्यकता है जिसके बिना जिंदगी का वजूद ही खतरे में पड़ जाएगा। किसी की नींद में खलल डालना उसे यातना देने के समान है, जो कि मानव अधिकार के उल्लंघन की श्रेणी में आता है । याचिका में कहा गया है कि धार्मिक संगठनों का लाउडस्पीकर या दूसरे साउंड एमप्लीफायर के उपयोग का अधिकार अनुच्छेद-25 में मिला पूर्ण, अनिर्बंधित अधिकार नहीं है। इसके साथ सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य की शर्तें भी जुड़ी हुई है।

इस मामले में याचिकाकर्ता ने एक पुराने मामले का संज्ञान भी दिया है। याचिकाकर्ता ने अफजल अंसारी बनाम यूपी सरकार मामले में हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया है। जिसमें अदालत ने कहा था कि अज़ान तो इस्लाम का आवश्यक एवं अटूट अंग है लेकिन अजान का लाउडस्पीकर पर बोला जाना धर्म का आवश्यक हिस्सा नहीं है। शुक्ल ने कहा है कि इस आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया है कि लाउडस्पीकर के दुरुपयोग के खिलाफ अब तक 7 शिकायतें हो चुकी है। इनमें से 6 अज़ान में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ थीं।

सोनू निगम व इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति का भी दिया हवाला-

शिकायत में कहा गया कि प्रसिद्ध गायक सोनू निगम को भी लाउडस्पीकर पर अजान से तकलीफ थी, जिसे उन्होंने ट्वीट के जरिए सार्वजनिक किया था।

सोनू निगम ने अपने ट्वीट में लिखा था- भगवान सबको खुशियां दें मैं मुसलमान नहीं हूं और मुझे सुबह अजान से जागना पड़ता है।आखिर भारत से यह जबरदस्ती की धार्मिकता कब खत्म होगी।

याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर की शिकायत का हवाला भी दिया है। आपको बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर ने लाउडस्पीकर में अजान के कारण होने वाली समस्या को लेकर प्रयागराज के जिला अधिकारी को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि पास की मस्जिद से हर रोज दी जाने वाली है अजान से उनकी नींद 5:30 बजे खुल जाती है। उसके बाद उन्हें नींद नहीं आती।

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