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अर्णब के समर्थन में उतरी BJP, स्मृति बोलीं-जो गोस्वामी के साथ नहीं, वे फासीवाद के पक्ष में

Janjwar Desk
4 Nov 2020 7:30 AM GMT
अर्णब के समर्थन में उतरी BJP, स्मृति बोलीं-जो गोस्वामी के साथ नहीं,  वे फासीवाद के पक्ष में
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Photo: social media

अर्णब ने पुलिस द्वारा खुद उनके साथ और परिजनों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है, उन्हें सुसाइड से संबंधित एक पुराने मामले में हिरासत में लिया गया है...

जनज्वार। रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णव गोस्वामी को मुंबई पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की बीजेपी ने निंदा करते हुए इसे मीडिया की आजादी पर हमला बताया है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जहां इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया वहीं स्मृति ईरानी ने कहा कि जो लोग अर्णब के समर्थन में खड़े नहीं हैं, वे फासीवाद के समर्थन में हैं।

अर्णव को आज बुधवार की सुबह मुंबई स्थित उनके घर से पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया है। अर्णब ने पुलिस द्वारा खुद उनके साथ और परिजनों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। उन्हें सुसाइड से संबंधित एक पुराने मामले में हिरासत में लिया गया है।

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए। इन ट्वीट में उन्होंने कहा कि यह प्रेस की आजादी पर हमला है। यह घटना उस आपातकाल की याद दिला रही है, जब प्रेस के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया था।


वहीं स्मृति ईरानी ने यहां तक कह दिया कि स्वतंत्र प्रेस के लिए इस वक्त जो अर्णब के समर्थन में खड़े नहीं हैं, वे फासीवाद के समर्थन में हैं। उन्होंने ट्वीट कर अपनी बात रखी है। ट्वीट में उन्होंने लिखा कि आप उन्हें पसंद नहीं करते , उन्हें स्वीकार नहीं करते, आप उनके अस्तित्व को भी तुच्छ समझ सकते हैं, पर आप यदि आप चुप रहते हैं, तो दमन का समर्थन करते हैं।


हिरासत में लिए जाने के बाद अर्नब गोस्वामी का आरोप है कि मुंबई पुलिस ने उनकी सास, ससुर, बेटे और पत्नी के साथ मारपीट की। इसे लेकर उनके न्यूज़ चैनल रिपब्लिक टीवी पर एक वीडियो भी चलाया गया है, जिसमें यह दिखाया गया है।

अर्नब पर एक मां और बेटे को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप लगा है। मामला 2018 का है। एक इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी माता ने साल 2018 में खुदकुशी कर ली थी। उस मामले की जांच अभी राज्य का सीआईडी विभाग कर रहा है। आरोप लगाया गया है कि सुसाइड नोट में कथित तौर पर अर्णब गोस्वामी और दो अन्य लोगों ने उनके 5 करोड़ 40 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया, इसलिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

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