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Chhattisgarh News : हसदेव अरण्य को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, केवल दो खदानों के लिए कटेंगे 3.22 लाख पेड़, बघेल के खिलाफ आंदोलन तेज

Janjwar Desk
27 July 2022 8:30 AM GMT
Chhattisgarh News :  हसदेव अरण्य को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, केवल दो खदानों के लिए कटेंगे 3.22 लाख पेड़, बघेल के खिलाफ आंदोलन तेज
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Chhattisgarh News : हसदेव अरण्य को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, केवल दो खदानों के लिए कटेंगे 3.22 लाख पेड़, बघेल के खिलाफ आंदोलन तेज

Chhattisgarh News : आंदोलनकारियों का आरोप है कि जब 2018 में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे तो राहुल गांधी ने खुद लोगों से कोयला खनन न होने का वादा किया था। अब उन्हीं की पार्टी की सरकार में कोयला खनन के दूसरे फेज पर भी काम शुरू हो गया है।

Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में एक बार फिर कोयला खनन ( Coal Mining ) को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कोयला खान से हसदेव अरण्य ( Hasdev Aranya ) का इलाका विनाश की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। फिर कोयला खनन क्षेत्र के लोगों के हितों के अनुरूप नहीं है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि जब 2018 में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे तो राहुल गांधी ( Rahul Gandhi ) ने खुद लोगों से कोयला खनन न होने का वादा किया था। अब उन्हीं की पार्टी की सरकार में कोयला खनन के दूसरे फेज पर भी काम शुरू हो गया है। ऐसे में क्षेत्र के लोग ठगा सा महसूस कर रहे हैं और राहुल गांधी को वादों की याद दिला रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेता लोग कहते हैं कि कुछ हजार ही पेड़ कटेंगे, लेकिन सच यह है कि दो खदानों से 3.22 लाख पेड़ कटेंगे। आलोक पुतुल ने ट्विट कर दावा किया है कि छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य के केवल दो खदानों में 3.22 लाख पेड़ कटेंगे। आलोक पुतुल का दावा है कि एक के बाद एक झूठ गढ़ने वाले नेता और भ्रष्ट अधिकारी लगातार दावा करते रहे हैं कि यहां केवल कुछ हज़ार पेड़ कटेंगे और अभी केवल 300 पेड़ कटे हैं, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। उन्होंने राहुल गांधी ( Rahul Gandhi ) को याद दिलाते हुए कहा कि अगर आपको भरोसा न हो तो छत्तीसगढत्र विधानसभा के प्रस्ताव को पढ़ लीजिए।

स्थानीय गोंड आदिवासी समाज के लोगों का आरोप है कि यूपीए टू के समय 2011 में इस परियोजना को हरी झंडी दी गई थी। उस समय से ही स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। वर्ष 2010 तक इस इलाके में खनन को प्रतिबंधित रखा गया था। 2011 में तीस गांवों के लोगों ने कुछ सामजिक संगठनों के साथ मिलकर हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया था। 2011 में सरकार और पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि इन परियोजनाओं के अलावा इलाके में किसी और खनन परियोजना को मंज़ूरी नहीं दी जायेगी। पिछले 11 वर्षों से हसदेव के जंगलों को खनन के लिए दिए जाने का विरोध कर रहे हैं।




वर्ष 2015 में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ( Rahul Gandhi ) भी इस इलाक़े में आये और उन्होंने आदिवासियों के संघर्ष का समर्थन किया। तब राज्य में रमन सिंह की सरकार थी और मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश ( CM Bupesh Baghel ) कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष थे। 2018 में कांग्रेस ने विधानसभा के चुनावों में जब जीत हासिल की तो आन्दोलन कर रहे आदिवासियों और स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी कि अब पार्टी अपना वायदा निभाएगी और खनन बंद हो जाएगा लेकिन इसी साल परियोजना के दूसरे चरण को भी राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी। अब लोग भूपेश बधेल सरकार से भी नाराज हैं और कांग्रेस को चुनावी वादों की याद दिला रहे हैं।

इसके जवाब में हाल ही में बस्तर संभाग के कांकेर जिले के भानूप्रतापपुर में पत्रकारों से बात करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहा था कि बिजली चाहिए तो कोयला निकालना ही पड़ेगा। सीएम का कहना था कि कुछ लोग इसमें रुकावट डालने का प्रयास कर रहे हैं और अफवाह फैला रहे हैं कि 8 लाख पेड़ काटे जाएंगे जबकि वहां से मात्र 8 हजार पेड़ की काटे जाएंगे। हम वादा करते हैं कि जितने पेड़ कटेंगे हम उससे ज़्यादा पेड़ लगाएंगे। बघेल ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ को योजनाबद्ध तरीके से बदनाम करने का प्रयास दिल्ली से लेकर विदेश तक किया जा रहा है। आदिवासियों और आंदोलन से जुड़े संगठनों ने पिछले साल के अक्टूबर माह में सरगुजा जिले से लेकर राज्य की राजधानी रायपुर तक 300 किलोमीटर की पदयात्रा निकालकर विरोध भी जताया।

सीएम ( CM Bupesh Baghel ) का कहना है कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विद्युत् आपूर्ति के लिए इस कोयले की बेहद आवश्यकता है। इसलिए परसा ईस्ट केटे बासेन कोयला परियोजना के दूसरे चरण के खनन को मंज़ूरी भी दे दी गई है।

Chhattisgarh News : राजस्थान सरकार ने कोयले को निकलने का करार गुजरात की एक कंपनी से किया है। खनन के लिए मंज़ूरी केंद्र और राज्य सरकारों दी है। यानी अब परियोजना के दूसरे चरण के लिए ज़मीन के अधिग्रहण का काम भी चल रहा है और पेड़ों की कटाई का काम भी शुरू कर दिया गया है। यही वजह है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र के लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

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