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दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगों से पटी दुकानें, लेकिन नहीं मिल रहा कोई खरीददार

Janjwar Desk
8 Aug 2020 9:33 AM GMT
दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगों से पटी दुकानें, लेकिन नहीं मिल रहा कोई खरीददार
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सदर बाजार के दुकानदार मुन्ना कुमार कहते हैं कि अभी तो हमें एक ही उम्मीद नजर आ रही है कि बस स्कूल खुल जाएं तो हमारा कुछ माल निकल जाए, दुकान में करीब 2 लाख का माल रखा हुआ है, समझ नहीं आ रहा है कि क्या करना है? कोई खरीददार ही नहीं....

मोहम्मद शोएब की रिपोर्ट

नई दिल्ली। दिल्ली के सदर बाजार में जो लोग राष्ट्रीय ध्वज और अन्य तरह के झंडे बेचने का व्यापार करते हैं, वो स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अभी भी ग्राहकों के आने का इंतजार कर रहे हैं। कोरोना की वजह से इस साल झंडा खरीदने वालों की संख्या बहुत कम है।

दुकानदारों के मुताबिक इस वर्ष पिछले साल की तुलना में झंडा बिल्कुल नहीं बिक रहा। कोरोना के चलते स्कूल, दफ्तर, रेस्तरां और मॉल्स बंद हैं, जहां 15 अगस्त के मौके पर सबसे ज्यादा तिरंगे लगाए जाते हैं।

सदर बाजार के अंदर हर तरह के तिरंगे मिलते हैं। जैसे, कार हैंगर, साफा, रिस्ट बैंड, स्टैंड फ्लैग, बैच, कपड़ा और कागज के तिरंगे आदि। इस साल मास्क तिरंगा भी बाजारों में आया हुआ है।

दिल्ली के सदर बाजार में झंडे का व्यापार करने वाले हरप्रीत सिंह ने बताया, शून्य कारोबार हुआ है। पिछले साल फुर्सत नहीं थी, इतना काम था। सुबह से एक झंडा बिका है वो भी जय श्री राम लिखा हुआ। स्कूल, मॉल्स, रेस्तरां और दफ्तर बंद है। कहां लगेंगे झंडे? लोग तिरंगा खरीदने आ ही नहीं रहे हैं।

सदर बाजार में व्यापार करने वाले मुन्ना कुमार शाह ने आईएएनएस को बताया, कोरोना की वजह से बहुत नुकसान हो गया है। स्कूल बंद होने की वजह से इस साल तिरंगा बिक नहीं रह है। कोई लेने ही नहीं आ रहा। 15 अगस्त के मौके पर बस 10 फीसदी बिक्री हुई है।

उन्होंने कहा, अभी तो हमें एक ही उम्मीद नजर आ रही है कि बस स्कूल खुल जाएं तो हमारा कुछ माल निकल जाए, दुकान में करीब 2 लाख का माल रखा हुआ है। समझ नहीं आ रहा है कि क्या करना है? पिछले साल का भी कुछ माल अभी रखा हुआ है। लेकिम खरीददार ही नहीं।

सदर बाजार में झंडा विक्रेता संजय कथोरिया ने आईएएनएस को बताया, स्कूल बंद होने की वजह से इस साल काम मंदा है। पहले के मुकाबले करीब 25 फीसदी खरीददार आ रहे हैं। इस साल किसी भी बाहरी व्यक्ति ने आकर यहां दुकान नहीं लगाई। पहले किराये पर दुकान ले लिया करते थे और तिरंगे का व्यापार करते थे।

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