राष्ट्रीय

किसान आंदोलन पर मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त, पूछा- 9 हजार कंपनियां हो रहीं प्रभावित तो क्या कर रहे हैं राज्य

Janjwar Desk
15 Sep 2021 7:44 AM GMT
किसान आंदोलन पर मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त, पूछा- 9 हजार कंपनियां हो रहीं प्रभावित तो क्या कर रहे हैं राज्य
x

(किसान आंदोलन को लेकर मानवाधिकार आयोग ने कई राज्यों को नोटिस जारी किया है) File pic.

आयोग ने इन राज्यों के मुख्य सचिव और डीजीपी से पूछा है कि आंदोलन से स्थानीय लोगों की जीवनचर्या और लगभग 9 हजार कंपनियां प्रभावित हो रही हैं तो ऐसे में राज्यों की सरकारें क्या कदम उठा रहीं हैं..

जनज्वार। पिछले कई महीनों से चल रहे किसान आंदोलन (Farmers protest) को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अब सख्त रूप अपना लिया है। आयोग ने कई राज्यों से जबाब तलब किया है। आयोग ने इन राज्यों के मुख्य सचिव और डीजीपी से पूछा है कि आंदोलन से स्थानीय लोगों की जीवनचर्या और लगभग 9 हजार कंपनियां प्रभावित हो रही हैं तो ऐसे में राज्यों की सरकारें क्या कदम उठा रहीं हैं।

दरअसल, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (National Human rights Commission) को किसान अमदोलन के संबंध में कई शिकायतें मिली हैं। इनमें से कई शिकायतें ऐसी भी हैं, जिनमें 9000 से अधिक सूक्ष्म, मध्यम और बड़ी कंपनियों को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव के आरोप हैं।

साथ ही परिवहन (Transportation) पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायतें भी मिली हैं। इन शिकायतों में कहा गया है कि यात्रियों, रोगियों, शारीरिक रूप से विकलांग लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को सड़कों पर भारी भीड़ के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आयोग को ऐसी भी शिकायतें मिलीं हैं कि किसानों के आंदोलन (protest) के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और सीमाओं पर बैरिकेड्स लगा दिए जाते हैं।

इन शिकायतों को लेकर अब आयोग ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government), मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार, मुख्य सचिव, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान (UP, Haryana and Rajsthan) और पुलिस आयुक्त, दिल्‍ली को नोटिस जारी कर उनसे संबंधित कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

वहीं आयोग को प्राप्त कई शिकायतों में यह भी आरोप है कि धरना स्थल (protest Centre) पर प्रदर्शन कर रहे किसानों द्वारा कोरोना प्रोटोकॉल (Covid protocol) का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके अलावा, आरोप है कि मार्ग की नाकाबंदी के कारण निवासियों को अपने घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

आयोग की ओर से कहा गया है कि चूंकि आंदोलन में मानव अधिकारों (human rights) का मुद्दा शामिल है जबकि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने के अधिकार का भी सम्मान किया जाना चाहिए। आयोग को विभिन्न मानव अधिकार मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।इसलिए, आयोग ने विभिन्न राज्यों को नोटिस जारी करने के साथ-साथ कुछ और कार्रवाई भी की है।

मानवाधिकार आयोग ने आर्थिक विकास संस्थान (आईईजी) से औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियो व उत्पादन पर किसानों के आंदोलन के प्रतिकूल प्रभाव (Reverse effects) और वाणिज्यिक और सामान्य उपभोक्ताओं पर असुविधा और अतिरिक्त व्यय आदि सहित परिवहन सेवाओं में व्यवधान की जांच करने और आगामी 10 अक्टूबर तक इस मामले में एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

साथ ही, आयोग द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार (Government of India) को विभिन्न पहलुओं पर किसानों के आंदोलन के प्रतिकूल प्रभाव और विरोध स्थलों पर कोविड प्रोटोकॉल के पालन के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

वहीं, आयोग ने कहा है कि धरना स्थल पर मानव अधिकार कार्यकर्ता के साथ कथित सामूहिक बलात्कार (gangrape) के मामले में डीएम, झज्जर (Jhajjar) से मृतक के नजदीकी रिश्‍तेदार को मुआवजे के भुगतान के संबंध में कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी। इसे लेकर डीएम, झज्जर को आगामी 10 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक अनुस्मारक जारी किया गया है।

जबकि दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) से अनुरोध किया गया है कि वे सर्वेक्षण करने के लिए टीमों को नियुक्त करें और किसानों द्वारा लंबे समय तक आंदोलन के कारण आजीविका, लोगों के जीवन, वृद्ध और कमजोर व्यक्तियों पर प्रभाव का आकलन करने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

Next Story

विविध

Share it