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Gujarat Riots 2002 : PM मोदी को क्लीनचिट के खिलाफ जाकिया जाफरी की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को होगी सुनवाई

Janjwar Desk
6 Oct 2021 11:37 AM GMT
Gujarat Riots 2002 : PM मोदी को क्लीनचिट के खिलाफ जाकिया जाफरी की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को होगी सुनवाई
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(गुलबर्ग मामले को लेकर जकिया ने नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व वाली तत्कालीन गुजरात सरकार पर इन दंगों को समर्थन देने का आरोप लगाया था)

Gujarat Riots 2002 : गुलबर्ग मामले को लेकर जकिया ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन गुजरात सरकार पर इन दंगों को समर्थन देने का आरोप लगाया था। जकिया का कहना है कि उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने दंगों पर नियंत्रण करने के लिए सख्त कदम उठाए होते तो यह घटना नहीं होती।

6 Oct. 2021 जनज्वार डेस्क। 2002 के गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को एसआईटी (SIT) की क्लीनचिट के खिलाफ कांग्रेस नेता एहसान जाफरी (Ahsan Jafri) की पत्नी जाकिया जाफरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India) 26 अक्तूबर को सुनवाई करेगा। जस्टिस एएम खानविलकर (Justice AM Khanvilkar) की पीठ ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा,अब सुनवाई टालने की याचिकाकर्ता की अब कोई अपील स्वीकार नहीं की जाएगी।

जस्टिस एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रवि कुमार की बेंच ने जकिया जाफरी के वकील कपिल सिब्बल द्वारा सुनवाई टालने की अपील स्वीकार कर ली। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि अब कोई भी सुनवाई टाली नहीं जाएगी। सिब्बल ने कहा-मैं व्यक्तिगत रूप से शर्मिंदा हूं। करीब 23 हजार पन्नों का रिकॉर्ड है। हमें थोड़ा और समय चाहिए। सुनवाई की डेट एकाएक आ गई।

इस पर कोर्ट ने कहा सुनवाई की जानकारी पहले ही दी गई थी। तो सिब्बल (Kapil Sibbal) ने कहा कि वो एक बार सुनवाई टालने की अपील करते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर की तारीख तय की है।

2002 में गुजरात दंगों (Gujarat Riots 2002) के दौरान उन्मादी भीड़ ने गुलबर्ग सोसाइटी को घेरकर इसमें आग लगा दी थी, इसमें 73 वर्षीय एहसान जाफरी (Ahsan Jafri) समेत 69 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से 39 लोगों के शव तो बरामद हो गए थे जबकि 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था। गौरतलब है कि अयोध्या से कार सेवा कर लौट रहे साबरमती एक्‍सप्रेस के डिब्बों में गोधरा स्टेशन पर उपद्रवियों ने आग लगा दी थी जिससे 50 से अधिक लोग जिंदा जल गए थे। इस घटना के बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क गए थे जिसमें गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार भी शामिल था।

कांग्रेस के भूतपूर्व सांसद एहसान छठी लोकसभा (Lok Sabha) के सदस्य रहे। एक समय उनकी गिनती गुजरात में कांग्रेस के प्रभावी नेताओं में होती थी। पति की नृशंस हत्या के बाद एहसान की बुजुर्ग विधवा जकिया जाफरी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। अपनी इस 'जंग' में जकिया को 2009 में तब बड़ी कामयाबी मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए एसआईटी को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे।

गुलबर्ग मामले को लेकर जकिया ने नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व वाली तत्कालीन गुजरात सरकार पर इन दंगों को समर्थन देने का आरोप लगाया था। जकिया का कहना है कि उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने दंगों पर नियंत्रण करने के लिए सख्त कदम उठाए होते तो यह घटना नहीं होती।

जकिया के अलावा उनकी बेटी नशरीन जाफरी हुसैन भी प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ काफी मुखर रही है। प्रधानमंत्री मोदी के सेल्‍फी विद डाटर अभियान के बाद निशरीन ने अपने पिता स्वर्गीय एहसान जाफरी के साथ अपनी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की थी।

घटना के करीब 10 साल बाद आठ फरवरी, 2012 को एसआईटी ने मोदी तथा 63 अन्य को क्लीन चिट देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि जांच एजेंसी को आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाने योग्य कोई सबूत नहीं मिला।जकिया ने एसआईटी के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने के गुजरात उच्च न्यायालय के पांच अक्टूबर, 2017 के आदेश को 2018 में उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।

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