करोड़ों का मालिक सुशील अंसल कैसे जेल में गर्म पानी के लिए करता है मिन्नत, 15 दिन बाद मिलती है राहत

नई दिल्ली। करोड़ों-अरबों का मालिक और शान-शौकत से जीवन जीने वाला कैसे छोटी-छोटी चीजों यहां तक की गर्म पानी पीने के लिए तरस जाता है। गर्म पानी की चाह में जेल में एक जगह से दूसरी जगह अर्जी लगाता है और मन्नत करता है कि उसे किसी तरह गर्म पानी या पानी गर्म करने के लिए हीटिंग पैन उपलब्ध करा दिया जाये।
उपहार अग्निकांड में तिहाड़ जेल संख्या दो में बंद कैदी नंबर-618 सुशील असंल जिसकी उम्र 82 वर्ष है और कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त है। पिछले दिनों जेल के अंदर फिसल कर गिर जाने की वजह से हल्की चोट भी लग गई।
दिल्ली की सर्दी, उम्र और बीमारी का हवाला देकर करोड़ों का मालिक सुशील अंसल ने कांपते हांथों से जेल के चीफ मेडिकल ऑफिसर काे एक चिट्ठी लिखी की उसे गर्म पानी पीने के लिए पानी गर्म करने वाली हीटिंग पैन (केतली) उपलब्ध करा दिया जाए। सीएमओ से होते हुए अर्जी जेल के कई अधिकारियों के पास गई। 15 दिनों तक अर्जी एक जगह से दूसरी जगह तक घूमते हुए जेल अधीक्षक के पास पहंुची। इसके बाद अंसल को पानी गर्म करने के लिए केतली मिल पाई है।
गौरतलब है कि 1997 में हुए उपहार सिनेमा अग्निकांड में सुशील और गोपाल अंसल दो भाइयों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था। 24 साल पहले का उपहार सिनेमा अग्निकांड हादसा काफी भयावह था। यह उस वक्त का बहुचर्चित मामला बन गया था। हादसे में 59 लोगों की जान गई थी, जिसमें अंसल बंधुओं को दोषी ठहराया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2 साल की जेल की सजा सुनाई थी।
पिछले साल नवंबर में पटियाला हाउस कोर्ट स्थित मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा की अदालत ने उपहार अग्निकांड के सबूतों से छेड़छाड़ मामले में दोषी ठहराए गए सुशील और गोपाल अंसल को सात साल की जेल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने सुशील और गोपाल अंसल पर 2.25 करोड़-2.25 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया और उन्हें हिरासत में लेने का भी आदेश दिया था। उससे पहले दोनों बेल पर बाहर थे।
इनके अलावा, कोर्ट के एक पूर्व कर्मचारी दिनेश चंद शर्मा और 2 अन्य पीपी बत्रा और अनूप सिंह को भी 7 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी और इन तीनों पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। जज ने अपने फैसले में कहा था कि कई रात सोचने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि पांचों दोषी सख्त सजा के हकदार हैं। इस मामले में फैसला सुनाए जाने के बाद जमानत पर बाहर चल रहे पांचों दोषियों को हिरासत में ले लिया गया।











