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Jahareela Paanee : कहां सोई है मोदी सरकार, 80% घरों के लोग पी रहे जहरीला पानी, हो सकते हैं कैंसर और अल्जाइमर के शिकार

Janjwar Desk
6 Aug 2022 6:23 AM GMT
Jahareela Paanee : कहां सोई है मोदी सरकार, 80% घरों के लोग पी रहे जहरीला पानी, हो सकते हैं कैंसर और अल्जाइमर के शिकार
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 Jahareela Paanee : कहां सोई है मोदी सरकार, 80% घरों के लोग पी रहे जहरीला पानी, हो सकते हैं कैंसर और अल्जाइमर के शिकार

Jahareela Paanee : जल शक्ति मंत्रालय के एक डॉक्युमेंट के मुताबिक देश की 80 फीसदी से ज्यादा आबादी जहरीला पानी पी रही है।

Jahareela Paanee : पेयजल ( Portable water ) के लिए भूजल स्रोतों ( ground water ) पर निर्भर देश की 80 फीसदी से ज्यादा आबादी जहरीला पानी ( Poisonous water ) पीने के लिए मजबूर है। ऐसे लोग किसी भी समय कैंसर और अल्जाइमर जैसे गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इसके बावजूद मोदी सरकार ( Modi Government ) इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधकर बैठी हुई है। जबकि इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। ऐसा इसलिए कि ये आंकड़े किसी गैर सरकारी संगठनों के नहीं, बल्कि जल शक्ति मंत्रालय के हैं। इसके बावजूद इस दिशा को कोई कदम नहीं उठाना व रणनीति तैयार न करने से साफ है कि केंद सरकार जनहित को लेकर कितना चिंतित है।

जल शक्ति मंत्रालय के डॉक्युमेंट में क्या है?

जल शक्ति मंत्रालय के एक डॉक्युमेंट के मुताबिक देश की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी के घरों में पानी ग्राउंड वाटर से जाता है। भूजल के इस पानी में जहरीली धातुओं की मात्रा तय मानक से कई गुणा ज्यादा पाई गई है। स्पष्ट है अगर आप नियमित रूप से जहरीला पानी ( Jahreela Paanee) पीएंगे तो गंभीर रोग से ही ग्रसित होंगे। जल शक्ति मंत्रालय के डाक्युमेंट के मुताबिक देश के 209 जिलों के ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक और 491 जिलों में आयरन की मात्रा तय मानक से ज्यादा मिली है। यह गभीर चिंता का विषय है।

491 जिलों में आयरन की मात्रा काफी ज्यादा

मोदी सरकार ने 31 जुलाई 2022 को संसद को सूचित किया कि 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 209 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में आर्सेनिक पाया गया है। इसी तरह, देश के 18 राज्यों के 152 जिलों के कुछ हिस्सों में यूरेनियम की खोज की गई है।

जल शक्ति राज्य मंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा कि 21 राज्यों के 176 जिलों के हिस्सों मेंए 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 491 जिलों के कुछ हिस्सों में आयरन पाया गया है। जबकि 11 राज्यों के 29 जिलों के कुछ हिस्सों में कैडमियम पाया गया है। देश के 16 राज्यों के 62 जिलों सहित 14,709 लोहा प्रभावित, 671 फ्लोराइड प्रभावित, 814 आर्सेनिक प्रभावित, 9,930 लवणता प्रभावित, 517 नाइट्रेट प्रभावित और 111 भारी धातु प्रभावित बस्तियां हैं।

आयरन का ज्यादा होना जहर के समान

Jahareela Paanee : अहम सवाल यह है कि आर्सेनिक, आयरन, नाइट्रेट, यूरेनियम, फ्लोराइड, नमक आदि की मात्रा पानी में ज्यादा होना स्वास्थ्य के लिए घातक है। इंसान को बहुत कम मात्रा में आर्सेनिक चाहिए होता है। इसकी मात्रा ज्यादा हो गई तो ये शरीर में कई तरह के निगेटिव इफेक्ट्स पैदा कर सकता है। इसी तरह आयरन हमारे शरीर में खून बनाने के लिए जरूरी फैक्टर है। इसके न होने से खून की कमी हो जाती हैए लेकिन शरीर में तय मात्रा में ही आयरन का होना जरूरी है। जब लंबे समय तक ज्यादा आयरन शरीर में जाता है तो यह जहर की तरह काम करने लगता है। इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इसी तरह अन्य रासायनिक पदार्थों की भी एक इंसान को स्वस्थ रहने के लिए काफी उपयोगी है, लेकिन इसकी मात्रा ज्यादा होना नुकसानदेह होता है। ताज्जुब की बात यह है कि देश की 80 फीसदी आबादी इस समस्या से पीड़ित है और मोदी सरकार कुंडी मारकर बैठी है।

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