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महाभारत के युधिष्ठिर गजेंद्र चौहान ने ट्वीटर पर बताया उन्हें मिला है दादा साहब फाल्के अवार्ड, लोगों ने लगा दी क्लास

Janjwar Desk
13 July 2021 5:28 AM GMT
महाभारत के युधिष्ठिर गजेंद्र चौहान ने ट्वीटर पर बताया उन्हें मिला है दादा साहब फाल्के अवार्ड, लोगों ने लगा दी क्लास
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केसीएफ के कथित इसी अवार्ड को युधिष्ठिर गजेंद्र चौहान ने दादा साहेब फाल्के अवार्ड बताकर ट्वीट किया था.

'दादा साहेब फाल्के' के नाम पर एक पुरस्कार केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है, जिसे भारतीय फ़िल्म उद्योग का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है, फिल्मकार राकेश शर्मा ने गजेंद्र को मिले अवार्ड पर सवाल उठाया है....

जनज्वार ब्यूरो। 90 के दशक में टीवी पर प्रसारित हुआ धारावाहिक महाभारत में युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान एक अवार्ड के लिए ट्रोल हो रहे हैं। गजेंद्र चौहान ने ट्वीटर पर खुद का एक फोटो शेयर किया है, इस फोटो में वह एक अवार्ड से सम्मानित होते हुए दिख रहे हैं, जिसे उन्होने 'दादा साहब फाल्के' अवार्ड बताया है।

अपने ट्वीट में गजेंद्र चौहान लिखते हैं कि 'सम्मानित- मुझे भारतीय फिल्म उद्योग में मेरे काम के लिए आज मुंबई में लीजेंड दादा साहब फाल्के पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया। मेरे शुभचिंतकों को धन्यवाद।'

अवार्ड वाले ट्वीट के बाद गजेंद्र एक ट्वीट और करते हैं 'कल मुंबई में आयोजित लीजेंड दादा साहब फाल्के पुरस्कार समारोह की झलक, श्री जैसे कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया. अनूप जलोटा, श्री. अनु मलिक, श्री राहुल शेवाले सांसद, श्री मुकेश ऋषि, श्री अरुण बख्शी, सुधाकर शर्मा, श्री अनिल नागरथ, श्रीकृष्णा चौहान।'

दरअसल फ़िल्म उद्योग में अविस्मरणीय योगदान के लिए 'दादा साहेब फाल्के' के नाम पर एक पुरस्कार केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है, जिसे भारतीय फ़िल्म उद्योग का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है। फिल्मकार राकेश शर्मा ने गजेंद्र को मिले अवार्ड पर सवाल उठाया है।

राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के साथ सरकार की ओर से इस पुरस्कार के लिए चुने गए कलाकार के नाम का एलान होता है और पुरस्कार राष्ट्रपति देते हैं। गजेंद्र चौहान को जो पुरस्कार हासिल हुआ उनका नाम इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से मिलता जुलता है। इसी को लेकर ट्विटर यूज़र उन्हें ट्रोल करने लगे और अवार्ड फेक बता रहे हैं।

ट्वीटर यूजर डॉ. विष्णु राजगड़िया लिखते हैं 'अच्छे दिन में नमूनों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। एक इस नमूने को देखिए। दो कौड़ी का अवार्ड उठा लाया, मानो सचमुच 'दादा साहेब फाल्के अवार्ड' मिला हो। यह भी मोदी जी को फर्जी कोटलर अवार्ड जैसा मामला है। द डेली गार्डियन के लेख जैसा मामला है। अनपढ़ भक्तों को मूर्ख बनाए रखना है।'

गौरतलब है कि केंद्र की आई मोदी सरकार के दौरान गजेंद्र चौहान को पुणे स्थित भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (FTII) का चेयरमैन बनाया गया था। जहां छात्रों के भारी विरोध की वजह से उनकी नियुक्ति विवादों में रही थी। कारण था महाभारत के बाद गजेंद्र ने कई सी ग्रेड फिल्मों में किरदार निभाए थे।

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