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झारखंड

अरुणा राय-ज्यां द्रेज ने कहा, हेमंत की नई योजना शहरी रोजगार गारंटी एक्ट का बन सकती है आधार

Janjwar Desk
26 Jun 2020 12:41 PM GMT
अरुणा राय-ज्यां द्रेज ने कहा, हेमंत की नई योजना शहरी रोजगार गारंटी एक्ट का बन सकती है आधार
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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी उम्मीद जताई है कि यह योजना शहरी रोजगार गारंटी अधिनियम के लिए जमीन तैयार करेगी, ताकि उस दिशा में भविष्य में आगे बढा जाए...

जनज्वार, रांची। सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय व अर्थशास़्त्री ज्यां द्रेज सहित कई अन्य प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संयुक्त रूप से एक पत्र लिख कर उनके द्वारा प्रस्तावित मुख्यमंत्री श्रमिक योजना की तारीफ की। तारीफ करने के साथ ही इन लोगों ने हेमंत सोरेन को उसके कार्यान्वयन को लेकर कई सुझाव दिए और कहा है कि यह योजना वर्तमान संकट में आगे का रास्ता दिखाती है और अन्य राज्यों के लिए अनुकरण का उदाहरण हो सकता है। हेमंत सोरेन ने हाल ही में कोरोना लाॅकडाउन की वजह से घर लौटे शहरी प्रवासी श्रमिकों को ध्यान में रखते हुए इस रोजगार योजना का प्रस्ताव रखा है।

अपने पत्र में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी उम्मीद जताई है कि यह योजना शहरी रोजगार गारंटी अधिनियम के लिए जमीन तैयार करेगी, ताकि उस दिशा में भविष्य में आगे बढा जाए। इन लोगों ने यह भी कहा है कि इस योजना को अमल में लाने से पहले जनता के बीच इसका एक ड्राफ्ट रखना चाहिए और उनसे सलाह लेनी चाहिए।

मनरेगा की ड्राफ्टिंग में अहम भूमिका अदा करने वाले इन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि उसके अनुभव के आधार पर हम शहरी रोजगार गांरटी योजना में कुछ प्रस्ताव आपके (सरकार के) ध्यान में करना चाहते हैं। सुझाव में कहा गया है कि जिनके पास मनरेगा श्रमिक कार्ड है, उनका नाम इस शहरी रोजगार गारंटी योजना से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। सुझाव में कहा गया है कि जिनका नाम दोनों जाॅब कार्ड में है और शहरी हैं, उन्हें इस योजना के तहत 100 दिन का रोजगार हासिल करने देना चाहिए।

सुझाव में कहा गया श्रमिकों को दी जाने वाली मजदूरी राज्य की तय शहरी न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होनी चाहिए और इसमें यह प्रावधान होना चाहिए कि जीवन यापन में आने वाले खर्च के अनुरूप इसमें संशोधन हो। समय पर मजदूरी मिलना श्रमिकों का वैधानिक अधिकार है इसका जिक्र किया गया है। इस योजना के लिए शहरी स्थानीय निकाय को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है और कहा गया है कि श्रमिकों के चयन व उनकी सूची तय करने में इनकी भूमिका हो और यह शहरी वार्ड सभा के द्वारा होना चाहिए।

इस योजना के तहत चुने जाने वाले कार्याें का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि बिल्डिंग निर्माण, मेंटेनेंस कार्य, रोड, फुटपाथ, पुल निर्माण को शामिल किया जाना चाहिए। पार्क, हवा, पानी, मिट्टी की गुणवत्ता की निगरानी, मूल्यांकन व सर्वेक्षण, पालिका कार्यालयों, स्कूलों व पार्काें में उनके श्रम का उपयोग हो सकता है। इसके साथ ही बच्चों, बुजुर्गाें विशेष रूप से निःशक्तों की देखभाल में उनका उपयोग किया जाता है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि आम तौर पर शहरी निकाय में प्राववेट पार्टी के द्वारा काम होता है, लेकिन इसमें स्थानीय शहरी निकाय को जिम्मेवार बनाना चाहिए और उन्हें निजी ठेकेदारों की जगह काम के लिए प्राथमिकता देना चाहिए।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में अरुणा राय, एनी राजा, जेम्स हेरंज, ज्यां द्रेज, निखिल डे, जयती घोष, अनिंदिती अधिकारी, रक्षिता स्वामी, अमित भोंसले, राजेंद्रन नारायणन और नचिकेत उडुपा का नाम शामिल है।

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