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Jhula pul Uttarakhand: गुजरात के मोरबी हादसे के बाद उत्तराखंड के झूला पुलों की भी होगी जांच, बाकी पुलों का भी हुआ परीक्षण

Janjwar Desk
1 Nov 2022 11:55 AM IST
Jhula pul Uttarakhand: गुजरात के मोरबी हादसे के बाद उत्तराखंड के झूला पुलों की भी होगी जांच, बाकी पुलों का भी हुआ परीक्षण
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Jhula pul Uttarakhand: गुजरात के मोरबी हादसे के बाद उत्तराखंड के झूला पुलों की भी होगी जांच, बाकी पुलों का भी हुआ परीक्षण

Jhula pul Uttarakhand: गुजरात के मोरबी में झूला पुल गिरने की वजह से हुई मौतों के बाद उत्तराखंड सरकार भी राज्य में झूला पुलों की स्थिति को लेकर चौकन्नी हो गई है। प्रदेश के सभी झूला पुलों की मजबूती परखने का काम शुरू हो गया है।

Jhula pul Uttarakhand: गुजरात के मोरबी में झूला पुल गिरने की वजह से हुई मौतों के बाद उत्तराखंड सरकार भी राज्य में झूला पुलों की स्थिति को लेकर चौकन्नी हो गई है। प्रदेश के सभी झूला पुलों की मजबूती परखने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही प्रदेश में अन्य पुलों की स्थिति जानी जा रही है। उल्लेखनीय बात यह है कि प्रदेश की तीर्थनगरी ऋषिकेश में विश्वप्रसिद्ध लक्ष्मण झूले पर लोगों की आवाजाही पर साल 2019 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। पुल का सपोर्टिंग वायर टूटने के बाद यह फैसला लिया गया था। लक्ष्मण झूला के बराबर में ही बजरंग पुल का निर्माण किया जा रहा है, जो अभी पूरा नहीं हुआ है।

मालूम ही है कि गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर केबल ब्रिज हादसे में अब तक 141 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 140 साल पुराने इस पुल को हाल ही में मरम्मत किए जाने के बाद इसे दोबारा खोला गया था। गुजरात में हुए इस बड़े हादसे के बाद देश के दूसरे राज्यों की सरकारें भी अपने अपने राज्यों में बने पुलों की स्थिति को लेकर चौकन्नी हो गई हैं। ऐसे में उत्तराखंड सरकार ने भी राज्य में झूला व अन्य पुलों की सुरक्षा को परखने का काम शुरू कर दिया है। उत्तराखंड राज्य में गुजरात जैसा ही विश्व प्रसिद्ध पुल ऋषिकेश का लक्ष्मण झूला भी है।

135 साल पुराना है ऋषिकेश का लक्ष्मण झूला पुल

जूट की रस्सियों से बने इस लक्ष्मण झूला पुल पर लोगों को छींके में बिठाकर रस्सियों से खींचा जाता था। साल 1889 में कोलकता के सेठ सूरजमल झुहानूबला ने लोहे की तारों से इसका दोबारा निर्माण कराया था. उन्हें स्वामी विशुदानंद से इसकी प्रेरणा मिली थी। लेकिन साल 1924 में आई तेज बाढ़ में झूला बह गया था। जिसके बाद में इसकी फिर से मरम्मत कर और मजबूती के साथ तैयार किया गया था। करीब 135 साल पुराना यह पुल इलाके में कई मेलों को स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। लोग एक कस्बे से दूसरे कस्बे में जाने के लिए इसका उपयोग करते थे। लेकिन इस पुल का सपोर्टिंग वायर टूटने के कारण उत्तराखंड सरकार ने साल 2019 में इस पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही बंद कर दी थी। ऋषिकेश के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रखने वाले लक्ष्मण झूला के उपयोग पर यह रोक 13 जुलाई 2019 को लगाई गई थी। जिसके बाद टिहरी और पौड़ी को जोड़ने वाले इस पुल से केवल पैदल जाने वालों को ही जाने की अनुमति थी। लेकिन संभावित हादसे के डर के चलते 13 अप्रैल 2022 को इस पुल से पैदल निकलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा भी प्रदेश में नए पुराने कई झूला पुल हैं, जो लोगों की आवाजाही का सुगम जरिया बने हुए हैं। लेकिन गुजरात में झूला पुल टूटने की घटना के बाद राज्य के सभी पुलों की मॉनिटरिंग महसूस की जाने लगी है।

डीजीपी ने दिए सभी जिला प्रमुखों को निर्देश

इसी के चलते प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने सुरक्षा के लिहाज से उत्तराखंड के सभी जिलों में झूला पुलों की स्थिति जांचने के निर्देश दिए हैं। पुलिस को दी गई हिदायत में कहा गया है कि पुलों से संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बाद ही आवाजाही होने जाए। जिन पुलों को बंद किया गया है, उन पर किसी भी तरह आवाजाही हुई तो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश में कई जगह आवाजाही के लिए झूला पुलों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें कुछ पुराने हैं, तो कई नए भी बने हुए हैं।

डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने सभी जिला पुलिस को निर्देश जारी किए गए हैं कि झूला पुलों की स्थिति की भलीभांति जांच कर ली जाए। इन पुलों के संबंध में जो तकनीकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाती है, उनका भी अवलोकन कर लिया जाए। ऋषिकेश का लक्ष्मण झूला पुल पुराना है। यहां पर अतिरिक्त चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

झूला पुल के अलावा प्रदेश के दूसरे पुलों की भी टेस्ट होगी हेल्थ

इसके अलावा प्रदेश में पुराने और जर्जर हो चुके दूसरे पुलों को बदलने और उनकी जगह अधिक क्षमता वाले पुलों का निर्माण करने की मंशा से लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश में ऐसे 436 पुराने पुल चिन्हित कर लिए हैं। इन पुलों में अधिकांश पुल राज्य के पर्वतीय जिलों में हैं। राज्य मार्गों पर बने ये पुल या तो पुराने या जर्जर हो चुके हैं या फिर वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते ये उनका लोड सहने के योग्य नहीं हैं। बी श्रेणी के इन पुलों को चिन्हित करने प्रमुख सचिव आरके सुंधाशु ने निर्देश दिए थे। उनके निर्देश पर पुराने पुलों की सूची तैयार कर ली गई है। प्रमुख अभियंता लोनिवि अयाज अहमद के मुताबिक इन सभी पुलों के प्रस्ताव शासन को भेज दिए जाएंगे। जिन 436 पुलों को चिन्हित किया गया है उनमें राज्य मार्ग पर 207, मुख्य जिला मार्ग पर 65, अन्य जिला मार्ग पर 60, ग्रामीण मार्ग पर 104 पुल हैं।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि उन पुलों को सबसे पहले बदला जाएगा जो सबसे अधिक प्रयोग में लाए जा रहे हैं और जिन पर वाहनों की आवाजाही का अधिक दबाव है। ये भी देखा जाएगा कि इनमें से कितने पुल सामरिक और पर्यटन व यात्रा के महत्व से जुड़े हैं। इस बाबत लोनिवि के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु का कहना है कि हम समय-समय पर पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराते हैं। सेफ्टी ऑडिट पर ही लक्ष्मण झूला पुल को बंद किया गया। 436 पुराने पुलों की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इन पुलों को वित्तीय उपलब्धता और उनके महत्व को देखते हुए चरणबद्ध ढंग से बदला जाएगा। उन्हें ए श्रेणी लोड में परिवर्तित करेंगे।

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