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हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ रेप के आरोप को किया खारिज, कहा - विवाह के झूठे वादों में दम नहीं

Janjwar Desk
6 Nov 2022 2:25 PM IST
पर्सनल लॉ की आड़ में नाबालिग से संबंध बनाकर बच निकलना मुश्किल, ऐसा करना पॉक्सों के दायरे से बाहर नहीं : केरल हाईकोर्ट
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पर्सनल लॉ की आड़ में नाबालिग से संबंध बनाकर बच निकलना मुश्किल, ऐसा करना पॉक्सों के दायरे से बाहर नहीं : केरल हाईकोर्ट

Kerala High Court Decision on Rape Case : केरल हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच का मामला आपसी सहमति से यौन संबंध से जुड़ा है। इसने विवाद का रूप उस समय धारण कर लिया जब वकील ने एक अन्य लड़की से भी करीबी के संबंध बना लिए।

Kerala High Court Decision on Rape Case : केरल हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच का मामला आपसी सहमति से यौन संबंध ( consensual sex ) से जुड़ा है। इसने विवाद का रूप उस समय धारण कर लिया जब वकील ने एक अन्य लड़की से भी करीबी के संबंध बना लिए। केरल हाईकोर्ट ( Kerala High court ) ने रेप ( Rape case ) के एक मामले को खारिज करते हुए कहा कि रेप के मामले में विवाह का झूठा वादा कोई विशेष आरोप नहीं माना जा सकता। जब तक इसे साबित करने के लिए पुखता आधार न हों। दरअसल, एक महिला एक वकील के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाया था। महिला का आरोप था कि वकील ने विवाह का झूठा वादा ( false marrige promises ) कर उसके साथ रेप ( Rape ) किया, लेकिन कोर्ट ने इसे इस आरोप को गंभीर नहीं माना। साफ कर दिया कि विवाह का वादा कोई विशेष आरोप नहीं हैं। केरल हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ रेप के मामले को भी खारिज ( rape case dismiss ) कर दिया।

केरल हाईकोर्ट ( Kerala High court ) के इस फैसले पर महिला ने कोई खास आपत्ति नहीं जताई, लेकिन लोक अभियोजक का कहना था कि दोनों के बीच मामला समापत हो जाने के बाद भी हाईकोर्ट रेप ( Rape ) का आरोप को खारिज नहीं कर सकता।

इसके उलट केरल हाईकोर्ट ( Kerala High court ) ने केस को खारिज करते हुए कहा कि अभियोक्ता के बयान में कोई विशेष आरोप नहीं है। वकील पर शादी करने का झूठे वादे का आरोपों में भी दम नहीं है। महिला ने आरोप लगाया था कि वकील की ओर से शादी के वादों के झांसे में आकर वह यौन संबंध बनाने के लिए राजी हुई थी। हालांकि, महिला अपने आरोपों के पक्ष में अदालत के सामने कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई। वहीं, लोक अभियोजक ने तर्क दिया था कि उच्च न्यायालय केवल इस आधार पर रेप के आरोप को खारिज नहीं कर सकता कि वो अस्पष्ट है।

जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने कहा कि महिला कथित संभोग ( sex with consent ) की तारीखों का खुलासा करने में भी सक्षम नहीं है। दोनों पिछले चार वर्षों से आपसी सहमति से संबंध में थे। महिला का यह आरोप की वकील ने शादी करने का वादा किया था, गलत है। महिला का आरोप यह भी है कि वकील ने उसे धोखा देने के मकसद से शादी का वादा कर भरोसा में लिया था। यह मामला आपसी सहमति से यौन संबंध से जुड़ा है। दोनों के बीच आपसी सहमति से यौन संबंध ने विवाद का रूप उस समय धारण कर लिया जब तथाकथित रूप से वकील ने एक अन्य लड़की से भी करीबी के संबंध बना लिए, न कि गलत वादों की वजह से।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह सामान्य बात है कि यदि कोई पुरुष किसी महिला से शादी करने के अपने वादे से मुकर जाता है तो उनके द्वारा किया गया यौन संबंध धारा 376 के तहत बलात्कार का अपराध नहीं होगा। जब तक यह स्थापित नहीं हो जाता है कि इस तरह के कृत्य के लिए सहमति बिना किसी इरादे के शादी का झूठा वादा देकर प्राप्त की गई थी। ऐसी स्थिति में तो यह और भी समझ से परे हो जाता है कि याचिकाकर्ता और आरोपी दोनों वकील हैं और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। दोनों को पता है कि आपसी सहमति से यौन संबंध को अपराध होता।

Kerala High Court Decision on Rape Case : हाईकोर्ट ने दीपक गुलाटी बनाम हरियाणा राज्य (2013) और ध्रुवराम मुरलीधर सोनार (डॉ) बनाम महाराष्ट्र राज्य (2019) में शीर्ष अदालत के फैसलों का हवाला देते हुए इस मामले को खाजिर कर दिया। हाईकोर्ट ने शंभू कारवार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2022) में सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शादी के झूठे वादे पर बलात्कार के लिए अभियोजन पक्ष में, विचार किया जाने वाला महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि क्या उसके आरोप से संकेत मिलता है कि आरोपी ने पीड़िता से शादी करने का वादा किया था जो कि शुरुआत में झूठा था, जिसके आधार पर पीड़िता को यौन संबंध बनाने के लिए राजी हुई।

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