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खोरी गांव : टूटे घर को देख बेहोश हुई विधवा कल्पना, कहा पुरुष पुलिसकर्मियों ने की मेरे साथ बदतमीजी

Janjwar Desk
18 July 2021 1:25 PM GMT
खोरी गांव : टूटे घर को देख बेहोश हुई विधवा कल्पना, कहा पुरुष पुलिसकर्मियों ने की मेरे साथ बदतमीजी
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(अभी तक नगर निगम द्वारा 5000 से ज्यादा घरों को तोड़ दिया गया, मगर 5 परसेंट लोगों को भी नगर निगम अस्थाई रूप से आश्रय नहीं दे पाया)

आज कल्पना अपने टूटे घर को देखकर बेहोश होकर गिर पड़ी। कुछ वर्षों पहले कल्पना के पति का स्वर्गवास हो गया, कल्पना के दो बच्चे हैं। पिछले 2 दिन से पुलिस संरक्षण एवं नीमका जेल में रही कल्पना के 2 अनाथ बच्चे खोरी में ही बिलखते रहे.....

जनज्वार ब्यूरो। जब यूनाइटेड नेशन के स्पेशल रिपोर्टयर एड्यूक्येट हाउसिंग ने भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर चिंता व्यक्त की और भारत सरकार व हरियाणा सरकार को तुरंत बेदखली रोकने की अपील की, तब खोरी निवासी कल्पना ने बोला कि भारत की सरकार इतनी कठोर है कि इस महामारी में हमें बेदखल करने पर तुली है, जबकि तीसरे देश के शीर्ष स्तर के मानवाधिकार संगठन ने खोरी के प्रति चिंता इसलिए प्रकट की क्योंकि वे मानवाधिकार को सम्मान करते हैं।

कल्पना कहती हैं, 'खोरी के प्रति इसलिए चिंता इसलिए प्रकट की गयी, क्योंकि मानवाधिकार को सम्मान करते हैं। जेल ले जाते समय मुझे जिस तरह से पुरुष पुलिसकर्मियों ने धक्का मुक्की की एवं मेरे कपड़े फट गए, मानो मुझ विधवा को तनिक देर के लिए लगा कि कानून को ताक पर रखने वाले सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करने आ गए। जिन्हें महिला का सम्मान नहीं पता वो क्या क्या हमारी रक्षा कर पाएंगे।

आज कल्पना अपने टूटे घर को देखकर बेहोश होकर गिर पड़ी। कुछ वर्षों पहले कल्पना के पति का स्वर्गवास हो गया, कल्पना के दो बच्चे हैं। पिछले 2 दिन से पुलिस संरक्षण एवं नीमका जेल में रही कल्पना के 2 अनाथ बच्चे खोरी में ही बिलखते रहे, परंतु प्रशासन के किसी भी आला अधिकारी ने कल्पना के बच्चों को अस्थाई रूप से आश्रय प्रदान नहीं किया।

इस मामले में मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव के सदस्य निर्मल गोराना कहते हैं, कभी मीडिया तो कभी सामाजिक संगठनों के खोरी में प्रवेश पर रोक लगाकर आखिर हरियाणा सरकार कौनसे सामाजिक न्याय की स्थापना कर रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री फरीदाबाद में आकर बेदखल मजदूरों से नहीं मिले और बीजेपी कार्यालय के भूमि पूजन में लगे रहे। साथ ही सांसद मूलचंद शर्मा बेदखल एवं बेघर हुए परिवारों से मिलने की बजाय भूमि पूजन करते हुए नजर आए। एक सांसद एवं मुख्यमंत्री से राज्य की जनता यह अपेक्षा नहीं कर सकती है।

मजदूरों के संकट काल में यदि राज्य सरकार उनसे मिलने भी जाती, तब भी मजदूरों को लगता कि उन्हें पुनर्वास निश्चित रूप से मिलेगा किंतु मुख्यमंत्री का फरीदाबाद जिले में आना और खोरी के मजदूर परिवारों को न मिलना इस बात को स्पष्ट करता है कि मंत्री एवं सांसद इन्हीं गरीब मजदूर परिवारों से वोट लेते हैं और जीतने के बाद उनका मुंह तक देखना पसंद नहीं करते हैं।

मजदूर आवास संघर्ष समिति के सदस्य मोहम्मद सलीम खान कहते हैं, अभी तक नगर निगम द्वारा 5000 से ज्यादा घरों को तोड़ दिया गया, मगर 5 परसेंट लोगों को भी नगर निगम अस्थाई रूप से आश्रय नहीं दे पाया और न ही 5000 परिवारों का पुनर्वास के लिए पंजीकरण करवा पाया।

नगर निगम के अधिकारी मीडिया में यह बात साझा कर रहे हैं कि 100 लोगों ने आकर अपना आवेदन जमा कराया है। इस बात से साफ जाहिर होता है कि प्रशासन एवं नगर निगम ने मजदूर परिवारों का संयुक्त सर्वे नहीं किया, जिसके पीछे साजिश यह रही कि कम से कम लोगों को पुनर्वास की सुविधा देनी पड़े, किंतु मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव पूर्ण प्रयास करेगा कि खोरी में रहने वाले हर परिवार को पुनर्वास की सुविधा हरियाणा सरकार से दिलाई जाए। इसके लिए मजदूर आवाज संघर्ष समिति खोरी गांव को यदि सड़क पर भी उतरना पड़ेगा तो वह पीछे नहीं हटेगा।

आज पांचवे दिन भी खोरी गांव में नगर निगम ने लगभग 10 से ज्यादा बुलडोजर लेकर दो हजार से ज्यादा घरों को तोड़ दिया। खोरी में बना हुआ चर्च भी आज नगर निगम के निशाने पर रहा।

अपने घर को टूटता देखकर बेबी बानो कहती है, 'मेरे मासूम बच्चे हैं और मैं हार्टअटैक की मरीज हूं, किंतु मेरे लिए नगर निगम की ओर से कोई पुनर्वास की सुविधा नहीं दी गई। बेबी का कहना यह भी है कि प्रशासन उसे घर देगा या नहीं उसे नहीं पता है, क्योंकि उसका हरियाणा की सरकार से विश्वास उठ चुका है।

मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव की सदस्य फुलवा ने बताया कि पुलिस एवं नगर प्रशासन के अधिकारी उन्हें जबरदस्ती राधा स्वामी सत्संग में धकेलने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि खोरी के लोग राधा स्वामी सत्संग में जाना पसंद नहीं कर रहे हैं। वे कहते हैं जिस गुरु को जो लोग नहीं मानते हैं, उन्हें उनके द्वार पर क्यों जाना है। यदि यह मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा भी होता तो भी शायद लोग जाने के बारे में सोचते। नगर निगम हम सभी को जबरदस्ती क्यों किसी धर्म संप्रदाय के चक्कर में डाल रही है। नगर प्रशासन को तत्काल ही प्लास्टिक लगाकर या तीन सेट लगाकर अस्थाई आश्रय तैयार करना चाहिए, ताकि इस भयंकर गर्मी एवं बरसात में हमारे बच्चों को सिर ढकने की जगह मिल जाए। नगर निगम कम से कम इतना जरूर करे कि हम तमाम लोगों को तब तक भोजन देता रहे, जब तक कि कोर्ट कोई फैसला नहीं सुना देती।

ग्रामीणाों का कहना कहना है खोरी में पुलिस प्रशासन द्वारा अंधाधुंध लोगों को गिरफ्तार कर झूठे मुकदमे में फंसाने का काम तीव्र गति से चलाया जा रहा है और जो खोरी गांव में मौजूद भी नहीं है उनका नाम भी एफआईआर में लिखकर उन्हें मुकदमों में फंसाने की चाल चली जा रही है, जिसका खोरी गांववासी विरोध कर रहे हैं।

मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव फिर से नगर निगम एवं नगर नगर प्रशासन से अनुरोध किया है कि बेदखल परिवारों को तत्काल घर की चाबी थमाई जाए, ताकि उन्हें किसी भी गुरु या धार्मिक संगठन का पंगु न बनना पड़े।

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