मध्य प्रदेश

MP के जिस भाजपा कोषाध्यक्ष ने पार्टी के लिए खपाए 40 साल, संकट में एक भी नेता ने उसका फोन तक नहीं उठाया

Janjwar Desk
1 May 2021 3:58 PM GMT
MP के जिस भाजपा कोषाध्यक्ष ने पार्टी के लिए खपाए 40 साल, संकट में एक भी नेता ने उसका फोन तक नहीं उठाया
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'सबका साथ, सबका विकास' और 'संगठन में शक्ति है' जैसे नारों को तकिया कलाम की तरह रटने वाली भाजपा नेताओं का हो ना हो कोरोना काल में मंत्र बदल गया है...

जनज्वार ब्यूरो, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक ऐसा वाक्या सामने आया है कि जिसके लिए 'यूज एण्ड थ्रो' वाली कहावत एकदम सटीक बैठती है। यहां जनसंघ के जमाने से संगठन की सेवा करने वाले जिला भाजपा कोषाध्यक्ष आगर के परिवार पर संकट आया तो इंदौर में पार्टी के नेताओं ने फोन तक नहीं उठाया। जिससे जिला भाजपा कोषाध्यक्ष महोदय खासे परेशान दिखे।

दरअसल आगर जिला भाजपा कोषाध्यक्ष संतोष गोयल के छोटे भाई की पत्नी को कोरोना संक्रमण हो गया। भाई की पत्नी का अस्पताल में इलाज चल रहा था, जिसके लिए वह मदद चाहते थे। इसके लिए उन्होने पार्टी के तमाम नेताओं को फोन लगाया लेकिन ना ही किसी ने फोन उठाया और ना ही जवाब देना उचित समझा। बताया जाता है कि गोयल जनसंघ के समय से पार्टी का झंडा बुलंद कर रहे थे और विपरीत हालातों में पार्टी का काम करते रहे हैं।

'सबका साथ, सबका विकास' और 'संगठन में शक्ति है' जैसे नारों को तकिया कलाम की तरह रटने वाली भाजपा नेताों का हो ना हो कोरोना काल में मंत्र बदल गया है। तभी तो महामारी के इस विकट समय जब अपने संकट में आए तो मदद करनी तो दूर फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझा। और ये सब हो भी भाजपा में ही सकता है। यही सब हुआ आगर जिला भाजपा कोषाध्यक्ष संतोष गोयल के साथ।

तहसील स्तर पर संघ के कार्यवाहक रहे मौजूदा कोषाध्यक्ष गोयल के छोटे भाई कमल कुमार गोयल इंदौर में ही रहते हैं। कमल की पत्नी को कोरोना हो गया। उन्हें इंदौर के प्रमिला देवी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। संक्रमण अधिक होने की वजह से डॉक्टरों ने इंजेक्शन लवाने की सलाह दी। जिसे लेकर गोयल ने इंदौर के विधायकों से लेकर तमाम उंचे-नीचे तक नेताओं को फोन लगाया। एक भी नेता ने गोयल का फोन नहीं उठाया, उठाया भी तो मदद का फर्जी आश्वासन देकर फिर फोन ही बंद कर दिया।

भाजपा जिलाध्यक्ष आगर संतोष गोयल इस वाकये के बाद खासे आहत हैं। वह तमाम विधायकों नेताों से भाई की पत्नी को इंजेक्शन आखिरकार नहीं दिला पाए। बाद में इधर-उधर से जुगाड़ हुआ। दुखी गोयल को मलाल ये नहीं कि उनके फोन पर इंजेक्शन नहीं मिला, बल्कि उन्हें इस बात का मलाल है कि जिस पार्टी की उन्होने 40 साल से भी अधिक सेवा की, मन लगाकर काम किया। उनके नेता बात तक करने को तैयैर नहीं हैं।

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