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Paramhans Das : जानिए कौन हैं परमहंस दास जो हिंदू राष्ट्र के लिए लुटिया भर पानी में लेने वाले थे जल समाधि

Janjwar Desk
2 Oct 2021 12:44 PM GMT
Paramhans Das : जानिए कौन हैं परमहंस दास जो हिंदू राष्ट्र के लिए लुटिया भर पानी में लेने वाले थे जल समाधि
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(मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं महंत परमहंस दास)

Paramhans Das : परमहंस के परिवार का अयोध्या से काफी लगाव था और अक्सर आना-जाना लगा रहता था। जब परमहंस 17 साल के थे तब वह अपने परिवार के साथ अयोध्या में गोपाल दास महाराज के मंदिर आए....

Paramhans Das जनज्वार। संत परमहंस दास तपस्वी छावनी के महंत है। परमहंस दास अल्पसंख्यकों पर अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। महंत परमहंस की विचारधारा भारत को अखंड हिंदू राष्ट्र बनाने के पक्ष में हैं। जिस कारण वह इस्लाम और ईसाई धर्म के लोगों की भारत में नागरिकता खत्म करने की मांग करते रहते हैं।

कौन है परमहंस दास

परमहंस दास अभी तपस्वी छावनी के महंत हैं। उनका जन्म सन् 1972 में मध्य प्रदेश के सीधी जिले में हुआ। जहां वह अपने माता- पिता, भाई और दो बहन के साथ रहते थे। परमहंस के परिवार का अयोध्या से काफी लगाव था और अक्सर आना-जाना लगा रहता था। जब परमहंस 17 साल के थे तब वह अपने परिवार के साथ अयोध्या में गोपाल दास महाराज के मंदिर आए। पूरा परिवार वापस मध्यप्रदेश चला गया लेकिन परमहंस दास अयोध्या से वापस नहीं गए। परमहंस दास कुछ दिन गोपाल दास महाराज के आश्रम में रहे।

सरयू किनारे कुटिया बनाकर रहे

परमहंस दास कुछ दिन गोपाल दास महाराज के आश्रम में रहने के बाद वहां से निकल गए और सरयू किनारे कुटिया बनाकर रहने लगे। परमहंस शिष्य के रूप में दाखिल हुए थे। वहां की परंपरा थी कि नया शिष्य मंदिरों में संत की सेवा करता है और प्रसाद ग्रहण करता है। परमहंस को भी कुछ दिनों तक यही करना पड़ा। अयोध्या में जहां पर परमहंस की कुटिया थी, वह इलाका पानी में डूब जाता था। इसलिए कमर भर पानी में चलकर लोग सड़क पार कर आते थे।

सर्वेश्वर दास ने परमहंस को महंत घोषित किया

अयोध्या के सरयू नदी के किनारे कुटिया बनाकर परमहंस 12 साल तक रहे। जब 29 साल के हुए तो वहां से निकल गए। इसके बाद वह वृंदावन, काशी और ऋषिकेश में अलग-अलग मंदिरों में भटकते रहे। 2017 में 44 साल की उम्र में परमहंस दोबारा अयोध्या लौट आए। सरयू के किनारे कुटिया में रहने के दौरान उनकी मुलाकात तपस्वी छावनी के महंत सर्वेश्वर दास से हुई। तपस्वी छावनी के महंत सर्वेश्वर दास एक सरल सीधे स्वभाव के तपस्वी थे। तब सर्वेश्वर दास का परिचय परमहंस से हुआ। सर्वेश्वर दास परमहंस को पसंद करने लगे। जिसके बाद तपस्वी छावनी में कुछ दिन रहने के बाद सर्वेश्वर दास ने परमहंस को महंत घोषित कर दिया।

महंत बनने के बाद अपने कारनामों से सुर्खियों में आए

महंत की उपाधि मिलने के बाद परमहंस ने तुरंत ही 2018 में अपने व्यक्तित्व के नई पहचान बनाने की शुरुआत कर दी। जिसके बाद परमहंस अपने विचारों और कारनामों को लेकर सुर्खियों में छा गए। सरकार से मांग तो सभी करते हैं। लेकिन परमहंस अपनी मांग को पूरा करने के लिए उनके द्वारा दी गई चेतावनी के कारण चर्चा का विषय बने रहते हैं। अक्टूबर 2018 में महंत परमहंस ने राम मंदिर के निर्माण को लेकर अपनी मांग रखी उन्होंने सरकार से कहा एक कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण शुरू करवाएं। अपनी इस मांग को लेकर वह आमरण अनशन पर बैठ गए।

10 अक्टूबर की रात को अयोध्या पुलिस ने उन्हें उठा लिया और लखनऊ के पीजीआई हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। लेकिन वह भी परमहंस का अनशन जारी रहा। तब यूपी (UP) के मुख्यमंत्री ( chief minister) योगी आदित्यनाथ (yogi aadityanath) ने उन्हें अपने आवास (house) पर बुलाकर वार्तालाप की और जूस पिलाकर उनका आमरण अनशन खत्म करवाया। इसके बाद फिर संत परमहंस चर्चा में आए और राम मंदिर के निर्माण को लेकर अपनी गतिविधियां तेज कर दीं।

2019 में कुंभ मेला लगा, तो वहां भी महंत परमहंस ने राम मंदिर निर्माण को लेकर एक बार फिर से अपना अनशन शुरू कर दिया। जिसके बाद वासुदेवानंद सरस्वती ने उनका अनशन तुड़वाया।

नृत्य गोपाल दास से हुआ विवाद

नृत्य गोपाल दास अयोध्या के सबसे बड़े संत और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। साल 2020 में नृत्य गोपाल दास के साथ संत परमहंस का एक विवाद चर्चा का विषय बना। भाजपा के पूर्व सांसद और राम मंदिर न्यास के अध्यक्ष रहे रामविलास दास वेदांती और परमहंस के बीच नृत्य गोपाल दास को लेकर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई। जो बेहद ही विवादास्पद थी।

ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद नृत्य गोपाल दास के शिष्यों ने परमहंस की तपस्वी छावनी पर स्थित आवास को घेर लिया और हमला करने की कोशिश की। हालांकि संत परमहंस को अयोध्या पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला जिसके बाद 27 दिनों तक संत परमहंस गाजियाबाद के डासना मंदिर में रहे थे। वहां भी संत परमहंस अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर अनशन शुरू करने के कारण चर्चा का विषय बने रहे।

हिंदू राष्ट्र की मांग पर पहले भी सजाई थी चिता

परमहंस राम मंदिर के निर्माण को लेकर अक्सर अनशन कर केंद्र सरकार को चेतावनी देते थे। वह भारत को एक 'अखंड हिंदू राष्ट्र' बनाने का विचार सदैव सामने रखते हैं। 25 मई को दोपहर 12:00 बजे परमहंस दास ने आत्मदाह करने की घोषणा की थी। उन्होंने हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर अपनी तपस्वी छावनी में स्थित अपने आवास के बाहर ही चिता सजा दी थी। यहां तक की चिता पूजन भी कर लिया था। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें उनके ही कमरे में नजरबंद कर दिया और उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।

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