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न हाजिरी लगी ना स्कूल खुले, यूपी के 18 जिलों में स्कूली बच्चों के निवाले का बिल कटा 9 करोड़

Janjwar Desk
31 May 2021 8:56 AM GMT
न हाजिरी लगी ना स्कूल खुले, यूपी के 18 जिलों में स्कूली बच्चों के निवाले का बिल कटा 9 करोड़
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यूपी के 18 जिलों में बच्चों के निवाले के नाम पर 9 करोड़ का घोटाला.स्कूल खुले नहीं धन आवमटित हो गया. photo - janjwar

यूपी में 11 फरवरी से 31 मार्च के बीच में छात्राओं के भोजन, सामान व अन्य मद में प्रदेश के 18 जिलों में नौ करोड़ रुपये निकाल लिए गए, जबकि प्रेरणा पोर्टल पर छात्राओं की विद्यालयों में उपस्थिति की सूचना शून्य है...

जनज्वार ब्यूरो, लखनऊ। कोरोना काल में उत्तर प्रदेस के सभी कस्तूरबा विद्यालय तो बंद थे, लेकिन वहीं घोटालेबाज़ अफ़सर कतई चौकन्ने और सजग रहे। नतीजा यह हुआ कि बालिकाओं के भरण-पोषण के नाम पर करोड़ों रुपए धीरे से ढीले कर लिए गए। इसके साथ ही विभागीय शिक्षा मंत्री माननीय डॉ. सतीश द्विवेदी की कार्यप्रणाली पर फिर से बड़ा सवाल है।

शिक्षा विभाग के अंतर्गत महानिदेशक स्कूल एवं राज्य परियोजना निदेशक निशातगंज लखनऊ की तरफ से 24 मई 2021 को पत्र संख्या के0जी0वी0बी/3-33/428/2021-22 के मुताबिक प्रदेश के 18 जनपदों में वित्तीय वर्ष 2020-21 का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का भोजन मद, मेडिकल केयर, कन्टीजेंसी मद, स्टेशनरी मद सहित शिक्षण सामग्री के मद की धनराशि के भुगतान का विवरण किया गया है।

पत्र के मुताबिक बरेली, बिजनौर, देवरिया, फतेहपुर, गाजियाबाद, गोण्डा, कांशीराम नगर, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, प्रतापगढ़, रायबरेली, सन्तकबीर नगर, श्रावस्ती, सोनभद्र, सुल्तानपुर, वाराणसी व उन्नाव जिलों में ये सामग्री आवंटित किए जाने की बात कही गई है। साथ ही सभी जनपदवार कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में आवर्तक मद की शत-प्रतिशत धनराशि खर्च किए जाने का दावा भी किया गया है।


गौरतलब है कि प्रदेश में बालिकाओं को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराए जाने हेतु कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित किए जाते हैं। चूंकी यह विद्यालय आवासिय होते हैं तो छात्राएं विद्यालय में ही रहती हैं, जिसके चलते इनके भोजन, स्टेशनरी, साबुन, तेल व अन्य जरूरी सामान के लिए शासन स्तर से बजट दिया जाता है। इधर, कोरोना काल के चलते विद्यालय बंद हैं और सभी छात्राएं अपने घर पर हैं।

प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्रालय की तरफ से पोषित इन विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई होती है। प्रदेश के कई जिलों में 11 फरवरी से 31 मार्च के बीच में छात्राओं के भोजन, सामान व अन्य मद में प्रदेश के 18 जिलों में नौ करोड़ रुपये निकाल लिए गए, जबकि प्रेरणा पोर्टल पर छात्राओं की विद्यालयों में उपस्थिति की सूचना शून्य दर्शाया गया है। पूरा मामला जब प्रेरणा पोर्टल से सामने आया तब जाकर इसका खुलासा हुआ है।

अब मामले को लेकर बात शासन तक पहुंची है और राज्य परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद ने इन जिलों के बीएसए से जवाब मांगा है। प्रेरणा पोर्टल पर छात्राओं की उपस्थिति न होने के बावजूद भोजन मद, मेडिकल केयर, कंटीजेंसी मद एवं स्टेशनरी मद में शत-प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया गया है। जो कि वित्तीय अनियमितता में आता है।


और तो और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी अनियमितता बरतने में कोताही नहीं की गई है। पीएम का भी अधिकारियों के अंदर डर नहीं दिखाई दिया। मामले में बीएसए राकेश सिंह का कहना है कि, 'पोर्टल पर छात्राओं की उपस्थिति न दर्ज करना बड़ी अनियमितता को दर्शाता है। मामले में पिंडरा स्थित वार्डन से जवाब मांगा गया था, जिसमें उनका कहना है कि, 25 मार्च से अचानक विद्यालय बंद हो जाने के कारण उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज नहीं की जा सकी।

प्रदेश के कुल 18 जिलों से जो धनराशि निकाली गई है उनमें बरेली 84 लाख, बिजनौर में 74 लाख, देवरिया में 68 लाख, फतेहपुर में 31 लाख, गाजियाबाद में 18 लाख, गोंडा में 96 लाख, कांशीराम नगर में 31 लाख, मऊ में 23 लाख, मेरठ में 26 लाख, मुरादाबाद में 39 लाख, प्रतापगढ़ में 76 लाख, रायबरेली में 63 लाख, संतकबीरनगर में 38 लाख, श्रावस्ती में 26 लाख, सोनभद्र में 26 लाख, सुल्तानपुर में 44 लाख, उन्नाव में 47 लाख, वाराणसी में 37 लाख रुपए शामिल हैं।

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