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अब सरकारी अनुमति लिए बिना 300 से कम श्रमिकों वाली कंपनियां कर सकेंगी छंटनी, सरकार ने पेश किया बिल

Janjwar Desk
20 Sep 2020 8:21 AM GMT
अब सरकारी अनुमति लिए बिना 300 से कम श्रमिकों वाली कंपनियां कर सकेंगी छंटनी, सरकार ने पेश किया बिल
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File photo

इसके पास होने के बाद औद्योगिक संबन्ध संहिता में संशोधन कर नया नियम लागू कर दिया जाएगा, 300 से कम कार्यबल वाली कंपनियों को अपने स्टाफ की छंटनी के लिए सरकार से किसी अनुमति की जरूरत नहीं रह जाएगी, अर्थात बिना सरकार की पूर्वानुमति के बिना ही ऐसी कंपनियां अपने कर्मचारियों की छंटनी कर सकती हैं....

नई दिल्लीविपक्षी दलों के विरोध के बीच केंद्रीय श्रम मंत्री सन्तोष गंगवार ने लोकसभा में औद्योगिक संबन्ध संहिता संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। इसके पास होने के बाद औद्योगिक संबन्ध संहिता में संशोधन कर नया नियम लागू कर दिया जाएगा। 300 से कम कार्यबल वाली कंपनियों को अपने स्टाफ की छंटनी के लिए सरकार से किसी अनुमति की जरूरत नहीं रह जाएगी। अर्थात बिना सरकार की पूर्वानुमति के बिना ही ऐसी कंपनियां अपने कर्मचारियों की छंटनी कर सकती हैं।

अभी नियम है कि 100 से कम कर्मचारी वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान या संस्थान ही सरकारी मंजूरी के बिना कर्मचारियों को हटा सकते थे। इस साल की शुरुआत में संसदीय समिति ने 300 से कम स्टाफ वाली कंपनियों को सरकार की अनुमति के बिना कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने या कंपनी बंद करने का अधिकार देने की बात कही थी। कमेटी का कहना था कि राजस्थान में पहले ही इस तरह का प्रावधान है। इससे वहां रोजगार बढ़ा और छटनी के मामले कम हुए।

केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने शनिवार को लोकसभा में नए श्रम संहिता बिल को पेश किया। सदन में महामारी रोग (संशोधन) विधेयक 2020, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (सेकंड एमेंडमेंट) बिल, 2020 और टैक्सेशन ऐंड अदर लॉज (रिलेक्सेशन ऐंड अमेंडमेंट) बिल 2020 पास किया गया।

विधेयक का कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने विरोध किया। चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि नया विधेयक लाने से पहले श्रमिक संगठनों और संबंधित पक्षों के साथ फिर से चर्चा की जानी चाहिए थी। अगर यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है तो मंत्रालय को फिर से यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नये विधेयकों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि लोग इस पर सुझाव दे सकें। इसमें प्रावसी मजदूरों की परिभाषा भी स्पष्ट नहीं है। तिवारी ने कहा कि श्रमिकों से जुड़े कई कानून अभी भी इसके दायरे से बाहर हैं, इस पर भी ध्यान दिया जाए।

लोकसभा में शनिवार को उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 पेश किये गये जिसमें किसी प्रतिष्ठान में आजीविका सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा को विनियमित करने, औद्योगिकी विवादों की जांच एवं निर्धारण तथा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान किये गए हैं।

लोकसभा में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने इन तीनों संहिताओं संबंधी विधेयक को पेश किया। इससे पहले गंगवार ने उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 को वापस लिया जो पहले पेश किये गये थे।

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