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यूपी : जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करना मतलब भ्रष्टाचारियों से लोहा लेना, शिकायतकर्ता पर ही उल्टे दर्ज होते हैं मुकदमे

Janjwar Desk
5 Aug 2021 10:58 AM GMT
यूपी : जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करना मतलब भ्रष्टाचारियों से लोहा लेना, शिकायतकर्ता पर ही उल्टे दर्ज होते हैं मुकदमे
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('जिस विभाग में गलत हो रहा हो रहा हो और उसी विभाग के अधिकारी की शिकायत करेंगे तो समस्या का कैसे निस्तारण होगा ?,' फोटो में : राजेश सिंह )

मिर्ज़ापुर के छोटे से क्षेत्र अहरौरा में जब हमने जनसुनवाई पर शिकायत करने वाले दर्जनों लोगों से बात की तो मामला जानकर हैरान रह गए...

मिर्जापुर से पवन जायसवाल की रिपोर्ट

जनज्वार। उत्तर प्रदेश सरकर के द्वारा एक पोर्टल का संचालन किया जाता है। जिस ऐप का नाम जनसुनवाई पोर्टल है। इस जनसुनवाई पोर्टल की कहानी बिल्ली को दूध की रखवाली का काम मिल जाए कुछ वैसी है। जनसुनवाई पोर्टल का मुख्य उद्देश्य यह है कि उत्तर प्रदेश का कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत अथवा समस्या इस पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करवा सकता है और उसे सम्बंधित अधिकारी व सम्बंधित विभाग में भेजकर उसका निस्‍तारण करवा सकता है। परंतु कम ही लोगों को पता होगा कि संबंधित विभाग की शिकायत की जांच उसी विभाग के अधिकारी व कर्मचारी करते हैं जिनके खिलाफ आप लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच करने के लिए पोर्टल के माध्यम से गुहार लगाते हैं।

मिर्ज़ापुर के छोटे से क्षेत्र अहरौरा में जब हमने जनसुनवाई पर शिकायत करने वाले दर्जनों लोगों से बात की तो मामला जानकर हैरान रह गए। बारी-बारी से लोगों से बात की तो सबने अलग-अलग कहानियां बताईं।

राजेश सिंह नाम के एक व्यक्ति मिले जो क्षेत्र की समस्याओं को लेकर आए दिन अधिकारियों को पत्र लिखते हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग समस्याओं के करीब एक दर्जन से ऊपर मामले जनसुनवाई पर दर्ज किये गए हैं। हर मामले को संज्ञान भी लिया गया, बराबर विभाग के लोग कॉर्डिनेट भी करते रहे लेकिन जब फाइनल रिपोर्ट लगी तो किसी समस्या का निस्तारण नहीं किया गया।


अलबत्ता राजेश सिंह के ऊपर भ्रष्ट लोगों की नजर हो गयी, यहां तक जिसके निस्तारण के लिए सम्बंधित विभाग की शिकायत की थी उस विभाग के लोगों व अन्य भ्रष्ट लोगों की टीम के द्वारा एक ही केस में इनके ऊपर दर्जनों मुकदमे दर्ज कर दिये। जब इससे भी विभाग के लोगों का मन नहीं भरा तो भ्रष्ट अधिकारियों से मिलीभगत कर शासन को गैंगेस्टर की कार्यवाही करने के लिए पत्र लिख दिये।

आरटीआई कार्यकर्ता आशीष केशरी कहते हैं, 'जिस विभाग में गलत हो रहा हो रहा हो और उसी विभाग के अधिकारी के खिलाफ आप IGRS पर शिकायत करेंगे तो वही विभाग के अधिकारी आपकी शिकायत का कैसे सही से निस्तारण होगा ? जो कि बहुत सोचनीय हैं। इसमे और सुधार होना चाहिए ताकि लोगो को न्याय मिल सके।'

वहीं जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायकर्ता अमित सिंह ने कहा, 'चोर को ही किसी दूसरे चोर को पकड़ने के लिए कैसे कहा जा सकता है। यानी जिसपर आरोप हो और उसी व्यक्ति को जांच करने के लिए बोल दिया जाए तो वो अपने बचाव के लिए हर हथकंडा अपनाता है। ऐसे में लोग न्याय का उम्मीद कैसे कर सकते हैं।'

इस तरह कई लोग सामने आए जिन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करवायी। करीब 99 फीसदी लोगों का यही कहना था कि इस पोर्टल पर शिकायत करने से कोई फायदा नहीं होता, अलबत्ता आप शिकायत करके खुद विरोधियों, भ्रष्ट अधिकारियों के निशाने पर आ जाते हैं।

इससे पहले की सरकार में तो इस पोर्टल पर मजाक चल ही रहा था। लेकिन इस सरकार से लोगों की उम्मीदें कुछ ज्यादा ही बढ़ गयीं। मुख्यमत्री योगी भी लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों और मंत्रियों सभी को निर्देश दिए हैं कि कोई भी फाइल किसी भी टेबल पर तीन दिन से अधिक नहीं रुकनी चहिये। यह होने भी लगा। परन्तु अफसरशाही और लालफीताशाही को कौन दुरुस्त करे जिनकी आदत टेबल के नीचे से रिश्वत लेने की ही बन चुका है, इसको सुधार पाना आसान काम नहीं है।

आखिर पुरानी व्यवस्थाओं में रचे-बसे लोग इतनी जल्दी सुधरने का नाम तो ले नहीं सकते। ना ही एक पीड़ित अपनी आवाज सीधे लखनऊ बैठे सिपहसालारों तक पहुँचा सकता है। ऐसे में जो चल रहा है उसे ही लोग प्रक्रिया मान लेते हैं, घूस लेने के आदि लोग अपनी व अपने विभाग की कमियों पर पर्दा डालने के लिए पीड़ित की बातों को अनसुना कर जनसुनवाई पर मन मुताबिक रिपोर्ट लगाकर मामले का निपटारा कागजों पर कर देते हैं।

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