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Padmitra Campaign: जहां लड़कियों के जींस पहनने और मर्जी से शादी पर बैठती थी खाप पंचायत वहां के घरों में पीरियड्स चार्ट की ये नई परंपरा दिल जीत लेगी

Padmitra Campaign: जहां लड़कियों के जींस पहनने और मर्जी से शादी पर बैठती थी खाप पंचायत वहां के घरों में पीरियड्स चार्ट की ये नई परंपरा दिल जीत लेगी
मोना सिंह की रिपोर्ट
Padmitra Campaign: उत्तर प्रदेश के जिस इलाके में इज्जत के नाम पर कत्ल की परंपरा काफी ज्यादा हो, वहां से आई ये खबर सुखद अहसास कराती है। जिस इलाके से लड़कियों के जींस पहनने और मर्जी से शादी करने पर कई बार खाप पंचायत बैठ जाती हो, उन इलाकों के घरों से दुनिया में फैले एक भयानक मिथ यानी अंधविश्वास को तोड़ा जा रहा है। ये अंधविश्वास जुड़ा है लड़कियों की माहवारी यानी पीरियड्स से। आपने सही सुना। वही पीरियड्स जिस पर हाल में अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन आई थी। वही पीरियड्स जिसे लेकर दुनिया के किसी देश में बुरी आत्मा कहा जाता है तो कहीं लड़कियों को अपवित्र मान लिया जाता है। उसी पीरियड्स को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के घर-घर में जागरूकता की मुहिम चलाई जा रही है।
घरों में बेटियां और महिलाएं अब माहवारी जैसे प्रतिबंधित विषय पर खुलकर बात कर रही हैं। और पीरियड चार्ट बनाकर लगा रही हैं। ताकि वे और परिवार के सदस्य पीरियड्स के समय की जरूरतों और सावधानियों का ध्यान रख सकें। मेरठ के करीब 20 से अधिक गांव में यह पीरियड चार्ट घरों में लगाए गए हैं। इसमें घर की महिला सदस्यों के नाम के साथ माहवारी की तारीख लिखी जाती है, ताकि हर महीने पीरियड आने का सही समय पता चल सके। गांव में सेनेटरी पैड भी तुरंत नहीं मिल पाते तो, वे इसके लिए सेनेटरी पैड की पहले से व्यवस्था कर सकें। मेरठ के किठौर और लावण खरखौदा बहसूमा, नंगली, ताशी, कुराली, अफजलपुर,महालका अख्तियारपुर, चरला, हाजीपुर इटायरा, इख्तियारपुर और जवेरी गांव के घरों में पीरियड चार्ट लगाए जा चुके हैं। यह चार्ट पैडमित्र अभियान के तहत लगाए जा रहे हैं।
क्या है पैड मित्र अभियान
महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान होने वाली समस्याओं और उनकी जरूरतों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सेल्फी विथ डॉटर फाउंडेशन की एक पहल है, पैड मित्र अभियान। इसका उद्देश्य पीरियड चार्ट हर घर में लगाना है। सेल्फी विथ डॉटर फाउंडेशन के संस्थापक सुनील जागलान के अनुसार माहवारी के समय घर की सदस्यों में जागरूकता का अभाव और पीरियड समय पर ना आना ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से महिलाएं कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। इसलिए पीरियड चार्ट पर घर की प्रत्येक महिला सदस्यों के नाम के साथ उनकी माहवारी की तारीख भी लिखी जाती है। जिससे घर के पुरुष सदस्य भी इस बारे में जागरूक हो सकें। क्योंकि इस दौरान महिलाएं थकान, हाथ पैर में सूजन, पैर में दर्द, कमर दर्द, बुखार, भूख न लगना... जैसी समस्याओं का सामना तो करती ही हैं और बहुत-सी महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन भी समय पर नहीं मिल पाते। खास तौर पर गांव में। इसके अलावा बड़ी उम्र की महिलाएं तो माहवारी की तारीख का ध्यान रख लेती हैं, लेकिन स्कूल कॉलेज जाने वाली लड़कियां अक्सर भूल जाती हैं। और ऐसे में पीरियड्स का स्कूल या कॉलेज में अचानक आ जाना उनके लिए समस्या पैदा करता है। पीरियड चार्ट की वजह से वह उस तारीख पर अपने साथ सेनेटरी पैड रख सकती हैं।
पैडमित्र अभियान से बदल रहा समाज
सेल्फी विथ डॉटर फाउंडेशन की शुरुआत 2017 में हुई थी। यह एनजीओ महिलाओं के हितों के लिए काम करता है। पीरियड चार्ट को लेकर यह 2020 से उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश राजस्थान और हरियाणा में सक्रिय है। यह फाउंडेशन महिला शिक्षा, स्वास्थ्य अधिकारों और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए काम करता है। महिलाओं में माहवारी की समस्याओं से संबंधित कुछ विशेष करने के लिए इस संस्था के संस्थापक सुनील जागलान ने अपने साथी डॉक्टरों की सलाह पर पीरियड चार्ट की मुहिम शुरू की थी। मेरठ में अब तक 65 से 70 घरों में पीरियड चार्ट्स लगाए जा चुके हैं।
250 में से केवल 70 चार्ट बचे
मेरठ में पीरियड चार्ट की मुहिम दिसंबर 2021 में शुरू हुई थी। इसके तहत शहर में इस मुहिम से संबंधित पोस्टर लगवाए गए और स्कूल, कॉलेज की छात्राओं से संपर्क किया किया गया।सेल्फी विथ डॉटर फाउंडेशन ने इसके लिए लाडो पंचायत भी शुरू की। इसमें भी लड़कियों को इकट्ठा कर इस बारे में बातचीत कर व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किए गए। शुरुआत में ढाई सौ चार्ट बांटे गए, लेकिन जब सेल्फी विथ डॉटर फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर पीरियड चार्ट के बारे में लोगों को जागरूक करना शुरू किया तो पता चला कि 250 में से केवल 65-70 चार्ट ही लगे हुए हैं। बाकी या तो फाड़ दिए गए या लगाने नहीं दिए गए।
क्या पीरियड चार्ट से स्वस्थ हो पाएंगी बेटियां?
सेल्फी विथ डॉटर फाउंडेशन के डायरेक्टर का कहना है कि पीरियड चार्ट पर नजर रखने से माहवारी की अनियमितताओं और समस्याओं पर भी नजर रखी जा सकती है। वे कहते हैं कि पीरियड चार्ट पर तारीख नोट करने वाली महिलाओं के पूरे साल के चार्ट लिए जाएंगे।अगर पीरियड की तारीखों में मिलती है तो उन महिलाओं की सूची तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी। जिससे आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऐसी महिलाओं की मदद कर सकें और उन्हें उचित इलाज मुहैया हो पाए।
विरोध और अभद्र टिप्पणियों का करना पड़ा सामना
सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में कई ऑनलाइन और ऑनलाइन और 10 फिजिकल लाडो पंचायतें करवाई। और इस दौरान कई जगह लोगों ने इसका विरोध किया और अभद्र टिप्पणी भी की ।
पीरियड चार्ट पर बन चुकी है शॉर्ट फिल्म
पीरियड चार्ट पर सेल्फी विथ डॉटर फाउंडेशन के डायरेक्टर सुनील जागलान द्वारा शॉर्ट फिल्म भी बनाई गई है। इस फिल्म का पूरा खर्च भी उन्होंने ही उठाया है। फिल्म के मुख्य कलाकार हिमाचल प्रदेश की रिश्दा हैं। वे इस मुहिम की ब्रांड एंबेसडर भी हैं। और अब तक कई राज्यों की महिलाओं के बीच जाकर उन्हें जागरूक कर चुकी हैं।
अब साथ दे रहे घर के पुरुष सदस्य भी
शुरुआत में पीरियड्स चार्ट लगाने पर महिलाएं घर के पुरुषों के सामने असहज महसूस करती थीं। मेरठ की रहने वाली आलिया एक गृहणी हैं। उनके घर पर सास, ससुर ,देवर साथ ही कई पुरुष रिश्तेदार भी आते जाते रहते हैं। वे कहती हैं कि शुरू में यह सब असंभव लगता था, लेकिन पति और सास से बातचीत की तो उन्होंने मेरी हिम्मत बढ़ाई और मैं घर में पीरियड चार्ट लगा सकी। अब घर के सदस्यों में भी परिवर्तन आया है। उन्हें मेरे पीरियड के बारे में पता होता है। वे अब मेरा पहले से ज्यादा ख्याल रखते हैं। मेरठ की अल्फिशा और आलिया ने भी अपने-अपने घरों में पीरियड चार्ट लगाए हुए हैं। वह कहती हैं कि घर के पुरुष सदस्य जैसे पिता और भाई भी अब इस बारे में सामान्य हो चुके हैं। और पीरियड के समय उनका ज्यादा ख्याल रख रहे हैं। इसके साथ ही हमें भी पता चलता रहता है कि अब हमारे पीरियड अनियमित हुए।
दुनिया में पीरियड्स को कहीं बुरी आत्मा तो कहीं दवा की तरह इस्तेमाल
पीरियड्स को लेकर पूरी दुनिया में कई तरह की बातें सामने आती हैं। पर अधिकतर देशों में इसे लेकर अंधविश्वास ही ज्यादा हैं। इस्लाम धर्म को मानने वाले देश जैसे इजराइल और अफगानिस्तान में पीरियड्स के दौरान वेजाइनल एरिया को साफ सुथरा करने की मनाही होती है। क्योंकि इसके पीछे यह मान्यता है कि ऐसा करने पर लड़की बांझपन या इनफर्टिलिटी की समस्या से ग्रसित हो सकती है। बांग्लादेश में माना जाता है कि पीरियड्स के पैड से बुरी आत्माएं आकर्षित होती हैं, इसलिए इस्तेमाल के बाद पीरियड्स के पैड को दफनाने का रिवाज है। पश्चिम बंगाल में पहली महावारी के खून को गाय के दूध या नारियल के तेल में मिलाकर पीना शक्तिवर्धक माना जाता है। वहीं, इटली में मान्यता है कि मासिक धर्म के दौरान यदि कोई खाद्य पदार्थ बनाता है तो इससे कोई आपदा या विपत्ति आ सकती है।
इसी तरह भारत में भी मासिक धर्म के दौरान अशुद्ध होने की वजह से रसोई में प्रवेश वर्जित होता है। पोलैंड में माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से पार्टनर की मृत्यु हो जाती है। अमेरिका में मान्यता है कि माहवारी की गंध भालू को आकर्षित करती है इसलिए इस दौरान जंगल में या कैंपिंग के लिए नहीं जाना चाहिए। फिलीपींस की मान्यता के अनुसार, पहले पीरियड के बाद स्वस्थ त्वचा पाने के लिए पीरियड के खून से चेहरा धोना चाहिए। इससे चेहरे की निखर जाती है। यानी इसका दवा की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। नेपाल में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अलग-थलग झोपड़ी या गौशाला में रखा जाता है। पर अपने साउथ इंडिया में सबसे अनोखी और खुशनुमा परंपरा है। दक्षिण भारत में पहली माहवारी को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस उत्सव में जिस किशोरी को माहवारी हुई हो, उसे दुल्हन की तरह तैयार किया जाता है और उपहार दिए जाते हैं। यह समारोह भव्य तरीके से मनाया जाता है। वहीं, उत्तर भारत के कई राज्यों में पीरियड के दौरान महिलाओं को अलग-थलग रहना पड़ता है और यहां तक कि परिवार के पुरुष सदस्यों को इस बारे में जानकारी न होने से उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।











