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Kanpur News : वाल्मीकि न होते तो दुनिया में राम को कौन जानता : मोहन भागवत

Kanpur News : कानपुर में संघ प्रमुख भागवत बोले - वाल्मीकि न होते तो दुनिया में राम को कौन जानता (file photo_
Kanpur News : दो दिन पहले वर्ण और जाति की समाप्ति की घोषणा करने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( RSS ) प्रमुख मोहन भागवत ( Mohan Bhagwat ) उत्तर भारत के पहले 'स्वर संगम घोष' शिविर में शिरकत के लिए कानपुर के दो दिवसीय दौरे पर हैं। कानपुर के भागवत नाना राव पार्क में वाल्मीकि समाज के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों, जातियों और समुदायों के लोग अपने हैं। अपनेपन से सारा काम हो जाता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( RSS ) के प्रमुख मोहन भागवत ( Mohan Bhagwat ) ने कहा कि अगर वाल्मीकि ( Valmiki ) नहीं होते तो आज दुनिया में राम के नाम को कौन जानता। उनकी कृति की वजह से ही राम लोकप्रिय हुए और आज हमारे आराध्य देव हैं।
अब उनके इस बयान के तरह-तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि क्या जो काम मोहन भागवत जो काम हिंदू-मुस्लिमों को बांटकर नहीं कर सके, उसे भाईचारे के नाम पर पूरा करेंगे। अगर ऐसा है तो इसमें बुराई नहीं है, लेकिन उन्हें यह बताना होगा कि इसके पीछे उनकी मंशा क्या है? इसका जिक्र करना जरूरी है। जरूरी इसलिए कि संघ की बातों पर सभी भरोसा नहीं करते। अगर वो सभी को साथ लेना चाहते हैं कि उन्हें भी आश्वस्त करना होगा कि वो जो करने जा रहे हैं, उसमें सबकी भलाई तय है।
दो दिन पहले नागपुर में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि वर्ण और जाति जैसी अवधारणाओं को पूरी तरह से खत्म करने की वकालत की है। अब इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है। सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म होना चाहिए। पूर्वजों ने जो गलतियां की, अब उसे सुधारने की जरूरत है।
इसका जवाब देते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ( AIMIM Chief Asaduddin owaisi ) ने कहा कि सच तो यह है कि भारत में धार्मिक असंतुलन है। उन्होंने संघ प्रमुख से कहा आप चिंता मत करो। मुस्लिम आबादी नहीं बढ़ रही है बल्कि कम हो रही है। सबसे ज्यादा कंडोम का इस्तेमाल मुसलमान कर रहे हैं। इस बात की जानकारी संघ प्रमुख लोगों को क्यों नहीं देते।











