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उत्तर प्रदेश

यूपी के फतेहपुर में दो नाबालिग दलित बहनों की हत्या, रेप के बाद आंखें फोड़े जाने की आशंका

Janjwar Desk
17 Nov 2020 7:39 AM GMT
यूपी के फतेहपुर में दो नाबालिग दलित बहनों की हत्या, रेप के बाद आंखें फोड़े जाने की आशंका
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दोनों दलित बहनें नाबालिग थीं और उनके पिता परिवार के भरण पोषण करने के लिए मुंबई में मजदूरी करते हैं, शवों के पोस्टमार्टम से और जानकारी सामने आएगी...

जनज्वार, फतेहपुर। उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले के असोथर थाना क्षेत्र के छिछनी गांव में चना का साग तोड़ने जंगल गई दो दलित नाबालिग बहनों की कथित रूप से हत्या कर शव तालाब में फेंकने की घटना से जिले में सनसनी फ़ैल गई है। खबर पाते ही जिले के आला अधिकारी देर रात मौके पर पहुंचे और घटना का बारीकी से जायजा लिया।

अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि सोमवार को देर रात छिछनी गांव में दिलीप धोबी की पुत्री सुमी, उम्र 12 वर्ष व उसकी छोटी बहन किरण, उम्र 8 वर्ष के शव जंगल में एक तालाब में मिले हैं। उन्होंने ने परिजनों के हवाले से बताया कि सोमवार को दोपहर करीब 12 बजे जंगल चना का साग तोड़ने गई थीं। देर शाम तक घर वापस नहीं आयीं तो लोग खोजने निकले। दोनों की लाश जंगल नाला-नदी के समीप स्थित एक भूमिधारी तालाब में पड़े सिंघाड़े में तैरती मिली हैं।

उन्होंने बताया कि दोनों की दोनों की आंखों में चोट के निशान हैं। मामले की जांच करायी जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही घटना की हकीकत सामने आयेगी। उधर ग्रामीणों के अनुसार किशोरियों का पिता दिलीप मुंबई में हैं। वह परिजनों का भरण-पोषण करने के लिए प्राइवेट नौकरी करते हैं। पिता को घटना की सूचना दे दी गई है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण असोथर पुलिस को शव ले जाने से रोक रही थी। पुलिस जोर जबरदस्ती कर शव लेकर थाना भाग गई है। ग्रामीणों को हत्या की आशंका है।

लीपापोती करता रहा थानेदार

घटना की रात एसओ ने बताया था कि बच्चियों के हाथ पैर बंधे हुए थे। दोनों की दोनों आंखों की भौंहों में घाव थे। शव को सबसे पहले खोजने वाले चाचा सहित आधा दर्जन लोगों को पुलिस रात से ही अपने कब्जे में ले लिया है। किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। एसओ की अगुवाई में पुलिस ने रात को ही जबरन तालाब में डूबने की बात लिखाई है।

ग्रामीणों के मुताबिकएसपी-डीएम भी घटना की हकीकत दबाने में जुटे हैं। दोनों की डेड बॉडी पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई है। वहीं सूत्रों की माने तो डाक्टरों की कमेटी पर भी मुंह न खोलने का दबाव बनाया गया है।

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