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उत्तर प्रदेश

इंसानियत को तार-तार करती UP पुलिस, अपाहिज रिक्शेवाले को बुरी तरह पीटा और युवती का सरेआम यौन शोषण

Janjwar Desk
18 Sep 2020 1:44 PM GMT
इंसानियत को तार-तार करती UP पुलिस, अपाहिज रिक्शेवाले को बुरी तरह पीटा और युवती का सरेआम यौन शोषण
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अपाहिज रिक्शेवाले ने रो-रोकर बताई पुलिसिया बर्बरता की कहानी

कन्नौज के थाना सौंरिख में तैनात सिपाही किरनपाल ने क्षेत्र के बाजार में ई-रिक्शा चला रहे दिव्यांग को साइड में खड़ा न होने के नाम पर बुरी तरह पिटाई कर दी गई। दिव्यांग इस वक्त रोता रहा, गिड़गिड़ाता रहा, पर साहब तो वर्दी पहनकर ऑन ड्यूटी हो चुके थे....

जनज्वार। उत्तर प्रदेश पुलिस की या तो संवेदना मर गई है अथवा मुखिया से अधिक मिली छूट का नतीजा क्रूरतम होता जा रहा है। कल और आज यूपी में दो ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनने मानवता को चोट पहुंचाई है। कल 17 सितंबर को लखनऊ और आज कन्नौज में खाखी ने मानवता को शर्मसारर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

पुलिस के शिकार बने अपाहिज का आरोप है कि वह अपने बीमार बेटे की दवाई लेने जा रहा था और जब पुलिस को मात्र 100 रुपये न दे सका, इसलिए उसकी दुर्गति कर दी गई।

वहीं दूसरी तरफ कल की 17 सितंबर को हुए बेरोजगार प्रोटेस्ट में लखनऊ में पुलिसकर्मी ने प्रोटेस्ट कर रही लड़की को जिस तरह और तरीके से पकड़ा था उसके लिए वह सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल हुआ। उसने प्रदर्शनकारी लड़की को जिस तरह से पकड़ा था शायद वह यौन उत्पीड़न के दायरे में न आये।

विकलांग के साथ कन्नौज पुलिस की बेहूदगी को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर किया जा रहा है और यूपी पुलिस को ट्रोल भी किया जा रहा है।

इस पुलिसकर्मी ने, जो यूपी पुलिस का इंस्पेक्टर था और माथे पर अशोक लाट भी लगा रखी थी, मर्यादा और शपथ तो गई किनारे मानवता को भी तार-तार कर दिया। इस दृश्य को जहां भी जिसने भी देखा होगा उसकी मुट्ठियाँ भिंची जरूर होंगी। गुस्सा तो आया ही होगा, समाज में खाखी नाम की इस मौजूदगी पर। और अगर नहीं आया तो आप निष्ठुर निष्क्रिय हैं। लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सुशील दुबे ने पोस्ट करते हुए जो लिखा है फ़ोटो सहित नीचे पढ़ देख सकते हैं। 'जनज्वार' ने यह फोटो छापना मुनासिब नहीं समझा। तो आज का दूसरा मामला एक दिव्यांग पर कन्नौज में हुई क्रूरता का है।

कन्नौज के थाना सौंरिख में तैनात सिपाही किरनपाल ने क्षेत्र के बाजार में ई-रिक्शा चला रहे दिव्यांग को साइड में खड़ा न होने के नाम पर बुरी तरह पिटाई कर दी गई। दिव्यांग इस वक्त रोता रहा, गिड़गिड़ाता रहा, पर साहब तो वर्दी पहनकर ऑन ड्यूटी हो चुके थे, फिर कैसे भला मान जाते।

उसे उठाकर थाने लाया गया, पीछे पीछे रिक्शेवाले की गर्भवती पत्नी वर्दीधारियों से छोड़ देने की भीख सी मांगती हुई हाथ जोड़े चली जा रही थी। मारने से पेट नहीं भरा तो पकड़कर ले जा रहे साहब ने थाने के अंदर जाते ही उसे धक्का देकर दूर फेंक दिया।

साहब छोड़ देव 'विकलांग' हैं, बिलखती हुई पत्नी बार बार गुहार लगा रही थी। उसे शायद अभी ये भी पता नहीं था कि उसका पति अब विकलांग नहीं रहा, बल्कि देश के पीएम ने उन्हें दिव्यांग नाम का नया तोहफा दे दिया है। थाने के अंदर विकलांग रोता हुआ कह रहा था कि वह अपने बीमार बच्चे की दवा लेने जा रहा था। वह साइड में भी चल रहा था बस मैने 100 रुपये नहीं दिए जिसके बाद मुझे बुरी तरह पीटा गया। बहुत बुरी तरह मारा है मुझे साहब, दिव्यांग बिलखकर रो रहा था।

इस मसले पर संबंधित थाना प्रभारी निरीक्षक विजय बहादुर वर्मा कहते हैं, सिपाही व दिव्यांग दोनों को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा जा रहा है। जांच में सिपाही दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ये दोनों ही घटनाएं सुबह से सोशल मीडिया पर घूम रही हैं। बावजूद इसके कार्रवाई शायद ही हो। होगी भी तो क्या लाइन हाजिर, निलंबन ज्यादा से ज्यादा एक आध महीने का वेतन रुक जाएगा और क्या उसके बाद फिर बहाली। वो इन्हें भी पता है। इन दोनों ही घटनाओं से सरकार को सबक लेने की जरूरत है, क्योंकि सत्ता का जहाज ऐसे ही डूबता होना पढ़ाया बताया और सिखाया जाता है।

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