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आंदोलन

इलाहाबाद में महिलाओं की उठी आवाज, पूंजीपतियों के अरबों माफ तो हम गरीबों का लाख-दो लाख क्यों नहीं?

Janjwar Desk
13 Aug 2020 2:24 PM GMT
इलाहाबाद में महिलाओं की उठी आवाज, पूंजीपतियों के अरबों माफ तो हम गरीबों का लाख-दो लाख क्यों नहीं?
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ऐपवा की नेता रूपा और कर्ज मुक्ति अभियान से जुड़ी मंजू गौतम ने कहा कि देश कोरोना वायरस संकट की वजह से लॉकडाउन हुआ है, सभी कामकाज बंद हैं, स्वयं सहायता चलाने वाली महिलाओं द्वारा लगातार कर्जमाफ़ी के सवाल को कई महीनों से उठाया जाता रहा है.....

प्रयागराज। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) की तरफ से देशव्यापी कर्ज मुक्ति दिवस के तहत प्रयागराज जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एसीएम को सौंपा गया। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर महिलाओं ने जिला कार्यालय पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने 'अमीरों का कर्जा माफ तो गरीबों का क्यों नहीं', 'कर्जों की वसूली पर रोक लगाओ', '100000 तक के कर्ज को मुफ्त करो', 'स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी महिलाओं का सामूहिक कर्ज माफ करो' जैसे नारे भी लगाए।

ऐपवा की नेता रूपा और कर्ज मुक्ति अभियान से जुड़ी मंजू गौतम ने कहा कि देश कोरोना वायरस संकट की वजह से लॉकडाउन हुआ है, सभी कामकाज बंद हैं, स्वयं सहायता चलाने वाली महिलाओं द्वारा लगातार कर्जमाफ़ी के सवाल को कई महीनों से उठाया जाता रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्देश जारी किया था कि 31 अगस्त तक कर्ज वसूली पर रोक रहेगी लेकिन इस दौर में भी माइक्रोफाइनेंस संस्थान और प्राइवेट बैंक कर्ज की किश्त वसूल रहे हैं। महिलाओं के आंदोलन के बाद कुछ जगहों पर ये पीछे हटे हैं लेकिन प्रयागराज समेत कई जगहों पर अभी भी महिलाओं को धमकाकर जबरन वसूली कर रहे है। एक जगह तो असमर्थता जताने पर यहां तक कहा गया कि शरीर बेचकर पैसा जमा करो। कहीं कोई महिला अगर किस्त जमा करने की स्थिति में नहीं है तो उसके घर का सामान उठाकर ले जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छोटे रोजगार काम- धंधे बंद है। लॉकडाउन से पहले महिलाओं ने जो भी कर्ज लिए हैं, वह शौक से नहीं मजबूरी में लिए हैं। आज जबकि भोजन का इंतजाम कठिन है तब लोन की किस्त कहां से जमा करें ? इसलिए हमारी मांग है कि महिलाओं से कर्ज वसूली बंद किया जाए, जब पूंजीपति अरबों रुपयों का कर्ज नहीं चुकाते तो हमारी सरकार देश के खजाने से (जिसे जनता टैक्स भरती हैं) उनका कर्ज चुकाती है और महिलाएं जो कि पहले हमेशा अपना कर्ज चुकाती रही हैं उन्हें इस संकट के समय में भी सरकार मदद नहीं कर रही है!

महिलाओं ने कहा कि आज कोरोना संक्रमण तेज रफ्तार से बढ़ रहा है. स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग भयभीत और निराश हैं, लेकिन फाइनेंसर कम्पनियां नागरिकों की चिंता के बजाय अपने कर्जे की वसूली में लगी हुई है। इस वसूली को शक्ति से रोक लगाकर शीघ्र हमारी मांगों को पूरा किया जाए। ऐपवा ने मांग की है कि-

1- स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी महिलाओं के सामूहिक कर्ज माफ किया जाय,

2- एक लाख रूपये तक का निजी कर्ज चाहे वो सरकारी, माइक्रोफाइनेंस संस्थानों अथवा निजी बैंकों से लिए गए हो, का लॉकडाउन के दौर का सभी किस्त माफ किया जाय,

3- सभी छोटे कर्जो की वसूली पर 31 मार्च 2021 तक रोक लगाई जाय,

4- स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार और उनके उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करो,

5- एक लाख रूपये (₹100000) तक के कर्ज को ब्याज मुक्त बनाया जाय,

6- शिक्षा लोन को ब्याज मुक्त किया जाय,

7- सामूहिक कर्ज के नियमन के लिए राज्य स्तर पर एक अथॉरिटी बनाई जाय,

8- स्वरोजगार के लिए दस लाख रूपये तक के कर्ज 0.4% दर हो,

9-जिस छोटे कर्ज का ब्याज मूलधन के बराबर या उससे अधिक दे दिया गया हो उस कर्ज को समाप्त किया जाय.

इस प्रदर्शन में रूपा, मंजू, बबली, मुन्नी देवी, विभा, गायत्री, गीता, मिस्बाह, पूजा, सोनी, उषा, शकीला, बैजंती देवी, सोनी, गायत्री, सावित्री, गुड्डी,शिवानी सिबा, रूबी आदि महिलाएं शामिल हुईं।

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