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भाजपा के नगीने जब मुंह खोलते हैं तो मूर्खता भी शरमाती है

Janjwar Desk
13 Aug 2020 8:47 AM GMT
भाजपा के नगीने जब मुंह खोलते हैं तो मूर्खता भी शरमाती है
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बिप्लब देब ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि 'हरियाणा में जाट रहते हैं, हरियाणा के जाटों के पास दिमाग की कमी होती है, लेकिन वे ताकतवर होते हैं। वे दिमाग में बंगालियों से मेल नहीं खा सकते हैं, बंगालियों को बुद्धिमान होने के लिए भारत में जाना जाता है....

दिनकर कुमार का विश्लेषण

भाजपा के ऐसे कई नेता हैं जो अक्सर बेसिर पैर के बयान देते रहते हैं। उनकी बातों में न कोई युक्ति होती है न ही सच्चाई की झलक होती है। दूसरों को नीचा दिखाने, सांप्रदायिक वैमनष्य को बढ़ावा देने और विज्ञान को ठेंगा दिखाने के लिए वे मूढ़ता की किसी भी सीमा को लांघते रहते हैं। अचरज की बात है कि ऐसे नगीनों को भाजपा काफी अहमियत देती है और कभी भी इस तरह की बयानबाजी पर रोक लगाने की कोशिश नहीं करती। सोचने की बात यह भी है कि ऐसे धुरंधर नेताओं के अनर्गल बयानों से भाजपा को चुनाव में कोई नुकसान भी नहीं होता है। तो क्या इसका मतलब यह समझा जाए कि मतदाताओं की बुद्धि भी व्हाट्सएप विश्वविद्यालय पर बांटे जा रहे ज्ञान तक ही सीमित है?

वैसे गौर से देखा जाए तो ये नेता गण अपने प्रधान सेवक से प्रेरणा ग्रहण कर इस तरह के बयान देते रहते हैं। प्रधान सेवक भी बोलते हुए भूगोल, इतिहास, विज्ञान और मिथक की ऐसी खिचड़ी पकाते हैं कि सुनने वाले अवाक हो जाते हैं। कभी नाली से गैस निकालने की बात कहते हैं तो कभी तक्षशिला को बिहार में स्थित विश्वविद्यालय बताते हैं। कभी बादलों में रडार के सिग्नल छिपाने की बात कहते हैं तो गांधी जी का नाम मोहनलाल करमचंद गांधी बताते हैं। कभी आज़ादी के समय एक डॉलर की कीमत एक रुपए के बराबर बताते हैं तो कभी गणेश के सिर प्रत्यारोपण को संसार का प्रथम अंग प्रत्यारोपण बताते हैं।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था: 'हरियाणा में जाट रहते हैं। हरियाणा के जाटों के पास दिमाग की कमी होती है, लेकिन वे ताकतवर होते हैं। वे दिमाग में बंगालियों से मेल नहीं खा सकते हैं। बंगालियों को बुद्धिमान होने के लिए भारत में जाना जाता है।' इसके बाद मुख्यमंत्री के भाषण का 50 सेकंड का एक वीडियो कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ऑनलाइन पोस्ट किया, जिन्होंने देब के विचार को 'भाजपा की मानसिकता' का संकेत बताया।

जब काफी आलोचना होने लगी तो देब ने माफी मांगते हुए ट्वीट लिया, 'अगरतला प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम में मैंने जाट और पंजाबी भाइयों के बारे में कुछ लोगों के विचारों का उल्लेख किया था। मेरा इरादा किसी भी समुदाय को चोट पहुंचाने का नहीं था। मुझे पंजाबी और जाट दोनों समुदायों पर गर्व है। मैं एक लंबे समय तक उनके साथ रहा हूं।' बिप्लब देब ने 2018 में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला, जब भाजपा ने तीन दशक के वाम शासन को समाप्त कर दिया था। देब अक्सर विवादित बयान देते रहते हैं। पिछले साल नवंबर में उन्होंने दावा किया कि मुगलों ने त्रिपुरा की कला और वास्तुकला पर 'बमबारी' करके राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट करने का निश्चय किया था।

देब से उससे पहले दावा किया था कि महाभारत के दिनों में इंटरनेट और उपग्रह संचार मौजूद थे। उन्होंने कहा, 'यूरोपीय और अमेरिकी दावा कर सकते हैं कि यह उनका है, लेकिन यह वास्तव में हमारी तकनीक है।' इसके अलावा 2018 में देब ने कहा कि पानी में ऑक्सीजन का स्तर 'स्वचालित रूप से' बढ़ जाता है अगर बतख उनमें तैरते हैं और वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों के बीच बतख वितरित करना चाहते हैं।

इसी तरह अपने बिगड़े बोलों के चलते अक्सर विवादों में रहने वाले पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने हाल ही में कहा कि अस्पताल संस्कृति से अधिक मंदिर संस्कृति की जरूरत है। घोष ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन का विरोध करने वालों पर निशाना साधा और कहा कि वहां अस्पताल के निर्माण की वकालत करने वालों में समझ की कमी है कि 'अस्पताल संस्कृति से अधिक मंदिर की संस्कृति की आवश्यकता है।'

उन्होंने कहा कि जो लोग अयोध्या में अस्पताल के पक्ष में बोल रहे हैं, वे खुद ही जनता को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं। हालांकि, घोष ने किसी पार्टी अथवा व्यक्ति का नाम नहीं लिया है. उन्होंने कहा कि जो लोग अपने धर्म के बारे में बोलने से डरते हैं, वे राम मंदिर निर्माण के खिलाफ बोल रहे हैं लेकिन जो लोग अपनी आस्था पर गर्व करते हैं और भगवान राम की पूजा करते हैं, वे इसका समर्थन कर रहे हैं। इससे पहले नई दिल्ली के शाहीन बाग को लेकर घोष ने पूछा था कि वहां एक भी प्रदर्शनकारी की मौत क्यों नहीं हो रही जबकि वे दिल्ली की भीषण ठंड में खुले में प्रदर्शन कर हे हैं।

घोष ने कहा था, 'हमें पता चला है कि सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं महिलाएं और बच्चे दिल्ली की सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। मैं हैरान हूं कि उनमें से कोई बीमार क्यों नहीं हुआ? उन्हें कुछ हुआ क्यों नहीं? एक भी प्रदर्शनकारी की मौत क्यों नहीं हुई? यह बेहद चौंकाने वाला है। क्या उन्होंने कोई अमृत पी लिया है कि उन्हें कुछ हो नहीं रहा है, लेकिन बंगाल में कुछ लोगों द्वारा घबराहट में खुदकुशी करने का दावा किया जा रहा है।'

नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ शुरू हुए देशव्यापी आंदोलन के दौरान दिलीप घोष ने कहा था कि राज्य में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि नुकसान पहुंचाने वाले लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वोटर थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का नुकसान पहुंचाने वालों को बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश, असम और कर्नाटक में कुत्तों की तरह गोली मारी गई।

इसी तरह असम के भाजपा के विधायक शिलादित्य देव ने यह कहकर विवाद छेड़ दिया है कि असमिया साहित्य के एक महत्वपूर्ण दिवंगत साहित्यकार सैयद अब्दुल मलिक (1919-2000) एक 'जिहादी' थे। देव ने मीडिया से कहा, 'यह एक साजिश है जो 1936 में सर सैयद मुहम्मद सादुल्ला के शासनकाल के दौरान शुरू हुई थी कि असम को बांग्लादेश में शामिल किया जा सके और अभी भी इसके लिए प्रयास जारी है। सैयद अब्दुल मलिक ने राज्य को बांग्लादेश में बदलने के इरादे से 'बौद्धिक जिहाद' को तेज किया।'

असमिया समाज में हुई तीखी प्रतिक्रिया को देखते हुए भाजपा बचाव की मुद्रा में आ गई है। राज्य के एक अन्य भाजपा नेता मुमिनुल ऐवल ने भाजपा के होजाई क्षेत्र के विधायक शिलादित्य देव को असम साहित्य सभा के पूर्व सभापति सैयद अब्दुल मलिक को 'बौद्धिक जेहादी' करार देने के लिए असम के लोगों से माफी मांगने के लिए कहा है।

(दिनकर कुमार पिछले तीस वर्षों से पूर्वोत्तर की राजनैतिक मसलों की रिपोर्टिंग करते रहे हैं।)

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