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आनंद और प्यार के त्योहार में 35 फीसदी बढ़ी कंडोम की बिक्री

Janjwar Team
22 Sep 2017 10:58 AM GMT
आनंद और प्यार के त्योहार में 35 फीसदी बढ़ी कंडोम की बिक्री
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गुजरात सरकार ने हिंदू संगठनों के दबाव में सनी लियोनी का विज्ञापन तो हटा दिया है लेकिन गुजरात का गरबा 'खेलो मगर प्यार से' के आनंद में डूबा हुआ है...

जनज्वार, अहमदाबाद। गुजरात में नवरात्रों के दौरान सन्नी लिओनी के कंडोम के विज्ञापन को भगवा संगठनों के दबाव के चलते वापिस लेना पड़ा है। विज्ञापन के जरिए युवाओं को संदेश दिया गया था, इन नवरात्रों में खेलिए जरूर, मगर प्यार से।

इस विज्ञापन को हटाने की वजह बताई जा रही है कि इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। वहीं गुजरात राज्य केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट है कि हर साल नवरात्रों में कंडोम की बिक्री काफी हद तक बढ़ जाती है और इस साल इस बिक्री में 35 फीसदी का उछाल आया है।

गुजरात स्टेट फेडरेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (जीएसएफसीडीए) के अनुमान के मुताबिक, नवरात्रि के आसपास कंडोम और गर्भनिरोधकों की बिक्री में उछाल आता है। इस साल बिक्री में 35% की वृद्धि हुई है। नवरात्रि के दौरान, गर्भ निरोधकों और कंडोम की बिक्री इतनी बढ़ती है कि कई पान की दुकानों ने जो अक्सर रात तक खुली रहती हैं, ने भी कंडोम बेचना शुरू कर दिया है।

एक ही मौका होता है जब परिवार और समाज को लड़के—लड़कियों के एक साथ होने पर आपत्ति नहीं होती। गुजरात को इस मामले में प्रगतिशील कहा जा सकता है कि यहां के युवा गरबे के दौरान गर्भनिरोधकों का बेझिझक इस्तेमाल करते हैं, जिसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था।

गौरतलब है कि गुजरात में नवरात्रों के दौरान हर साल देर रात तक गरबे में भारी तादाद में लड़के—लड़कियां इकट्ठा होते हैं। उत्सव के माहौल में गरबे के बहाने घरवालों से छुपकर एक दूसरे के साथ ये युवा समय बिताते हैं। प्रेम और सेक्स में उन्मुक्त जीवन जीना चाह रहे युवा जोड़ों के लिए गरबा के उत्साह और रोमांच में डूबे ये दिन किसी मनचाहे वरदान की तरह आते हैं। लोग गुजरात में नवरात्रों और गरबे को गुजराती वेलेंटाइन डेज भी कहने लगे हैं।

हालांकि गुजरात में नवरात्रों में कंडोम का विज्ञापन पहली बार आया है, पर इसे जाहिर तौर पर एक अच्छी पहल के बतौर लिया जाना चाहिए था न कि इससे किसी की भावनाएं आहत होनी चाहिए थी।

गुजरात राष्ट्रीय मेडिको संगठन (जीएनएमओ), जो कि आरएसएस से संबद्ध डॉक्टरों की संस्था है, ने अपने 7,000 सदस्यों से राज्यभर में कंडोम के विज्ञापन का विरोध करने का आग्रह किया था।

यह बात किसी से छुपी नहीं कि गुजरात में गरबा और नवरात्र धार्मिक उत्सव से ज्यादा प्रेमियों के लिए प्रेम का उत्सव है। जहां कंडोम के साथ—साथ गुप्तचर एजेंसियों का धंधा भी चमक जाता है। सालभर अपने बच्चों की खबर न रखने वाले खुद विवाहेतर संबंधों में मशगूल एलीट मां—बाप अपनी बेटी पर जासूसों से नजर रखते हैं, मगर इस सबके बीच सवाल तो बनता है कि कंडोम के इस्तेमाल का विज्ञापन समाज विरोधी कैसे हो सकता है।

क्या हमारा समाज युवा वर्ग को बिना कंडोम के इस्तेमाल के सेक्स करने की सलाह दे रहा है। बिना कंडोम के इस्तेमाल के बाद में गर्भपात और एक लड़कियों का भयंकर मानसिक, शारीरिक कष्ट से क्या धर्म और संस्कृति मजबूत होंगे।

ये सवाल अपनी जगह है कि धार्मिक उत्सव प्रेम के उत्सव में तब्दील होता है, लड़के—लड़कियां गरबे के बहाने एक—दूसरे से मिलते हैं। लेकिन गौर से देखा जाए तो पूंजी और अंधश्रद्धा के बल पर खड़े किये गए धर्म और संस्कार के लबादे के हर बड़े आडंबर के पीछे के पीछे कितनी गंदगी है।

धर्म और संस्कृति के झंडाबरदार कहे जाने वाले भारत के अब तक के सबसे बड़े धर्मगुरु शंकराचार्य, आसाराम, राम रहीम सारे बलात्कारी बाबा निकले, मगर समाज में उस तरह का विरोध सामने नहीं आया जैसा कि आना चाहिए था। हां, बाबाओं का बचाव करने वालों की फौज जरूर सामने आई।

आज जब युवा लड़के—लड़कियां खुद निर्णायक भूमिका में हैं, गुजरात में गरबे के दौरान कंडोम और गर्भ निरोधक के बढ़ते इस्तेमाल को गलत कैसे ठहराया जा सकता है।

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