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राजनीति

मनीष शर्मा की मौत के साथ दफन हो गए दरवेश हत्याकांड के सारे राज

Prema Negi
24 Jun 2019 3:26 AM GMT
मनीष शर्मा की मौत के साथ दफन हो गए दरवेश हत्याकांड के सारे राज
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मनीष के पिता ने लगाया है आरोप कि मनीष ने नहीं मारी थी खुद को गोली, यूपी बार काउंसिंल की नवनिर्वाचित अध्यक्ष दरवेश यादव के स्वागत समारोह में साजिशन बुलाया गया था उसे दीवानी और मार दी गई गोली…

जेपी सिंह की रिपोर्ट

यूपी बार काउंसिल की नवनिर्वाचित अध्यक्ष दरवेश यादव की गोली मारकर हत्या करने वाले अधिवक्ता मनीष बाबू शर्मा की भी मौत हो गई है। मनीष ने आखिर ऐसा क्यों किया था? इस सवाल ने भी मनीष की मौत के साथ दम तोड़ दिया। अब पुलिस किस तरह इस हत्याकांड को सुलझायेगी यह भविष्य के गर्भ में छिपा है।

नीष के परिजनों के इस आरोप के बाद कि उनके बेटे ने स्वयं को गोली नहीं मारी थी, बल्कि उसे किसी और ने गोली मारी, इसे सुलझाना अब पुलिस के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। यह सवाल अब हमेशा के लिए सवाल ही बन गए हैं कि मनीष और दरवेश के बीच मुख्य झगड़े की वजह क्या थी? मनीष आखिर स्वागत समारोह वाले दिन इतना उग्र क्यों हो गया? सतीश यादव का क्या रोल था?

गौरतलब है की 12 जून को दीवानी कचहरी परिसर में दरवेश यादव का स्वागत समारोह चल रहा था। स्वागत समारोह में मैनपुरी में तैनात पुलिस इंसपेक्टर सतीश यादव भी मौजूद थे। ये बिना छुट्टी लिए आगरा आए थे। मनीष की दरवेश से सतीश के चक्कर में ही बोलचाल बंद चल रही थी।

नीष के परिजनों का आरोप है कि इंस्पेक्टर सतीश यादव ने एक माह पहले मनीष के घर आकर दरवेश से बात नहीं करने की धमकी भी दी थी। अपने स्वागत समारोह में दरवेश यादव ने अधिवक्ता मनीष को साथी अधिवक्ता विनीत गोलेछा को घर भेजकर बुलवाया था।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक स्वागत समारोह के बाद अधिवक्ता अरविंद मिश्र के चैंबर में मनीष ने सतीश यादव को देखा तो मनीष और दरवेश में झड़प हुई। इसके बाद मनीष ने दरवेश यादव को गोलियां मार दीं और फिर अपने को भी गोली मार ली। इधर मनीष के पिता का आरोप है कि उसके बेटे ने खुद को गोली नहीं मारी। उसे साजिश के तहत दीवानी में बुलाया गया था और फिर उसे गोली मारी गई। मनीष की कनपटी पर बाईं ओर गोली लगी थी और दायीं ओर से पार हो गई थी। मनीष की जैकेट भी फटी हुई थी।

न तथ्यों से यह मामला और उलझ गया है कि क्या मनीष ने वाकई खुद को गोली मारी थी? इस सवाल का जवाब जानने के लिए मनीष के होश में आने का इंतजार किया जा रहा था। मनीष के बयान लेने के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में पुलिस भी तैनात थी। 11 दिन तक मनीष ने जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ी। 11वें दिन मनीष का निधन होने पर सारे सवालों के जवाब भी दफन हो गए हैं।

नीष और दरवेश के बीच मुख्य झगड़े की वजह क्या थी? मनीष आखिर स्वागत समारोह वाले दिन इतना उग्र क्यों हो गया? सतीश यादव का क्या रोल था? यह सवाल अब हमेशा के लिए सवाल ही बन गए हैं।

चहरी में दरवेश यादव और मनीष शर्मा का एक मुंशी है, जो लंबे समय से दोनों के साथ था। वही मनीष को बुलाकर दरवेश के पास लाया था। मुंशी दोनों के बीच चल रहे मनमुटाव से वाकिफ था। पुलिस ने उससे हकीकत जानने का प्रयास किया। उसने भी अपने बयान में यही कहा कहा है कि इंस्पेक्टर सतीश यादव नहीं आते तो शायद यह हत्याकांड नहीं होता। उन्हें देखकर ही मनीष शर्मा को गुस्सा आया था। 12 जून को वह भी दरवेश के साथ था। मनीष बाबू शर्मा अपने चैंबर में बैठे थे। दरवेश डॉक्टर अरविंद मिश्रा के चैंबर में बैठी थीं। नाश्ता चल रहा था। दरवेश ने उससे कहा कि मनीष को बुला लाए।

रवेश हत्याकांड में पुलिस को चश्मदीदों ने यह तो बताया है कि वरिष्ठ वकील अरविन्द मिश्रा के चैंबर में हत्या कैसे हुई लेकिन किसी के भी बयान में इस बात का जिक्र नहीं है कि दरवेश यादव और मनीष शर्मा की दोस्ती में दरार क्यों आई। जो मनीष बाबू शर्मा साए की तरह दरवेश के साथ रहता था, उसने उसे क्यों मार डाला?

खिर तीन महीने से उनके बीच बातचीत क्यों बंद थी? जबकि उनके बीच हुआ झगड़ा सार्वजनिक नहीं हुआ था। दोनों के बीच समझौते के लिए कोई पंचायत नहीं हुई थी। वह ठोस वजह अभी तक सामने नहीं आई है, जिससे दोस्ती दुश्मनी में तब्दील हुई।

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