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स्वाति मालीवाल का टूटा अनशन लेकिन सीएम-डिप्टी सीएम ने नहीं दी कोई तवज्जो

Janjwar Team
23 April 2018 9:09 AM GMT
स्वाति मालीवाल का टूटा अनशन लेकिन सीएम-डिप्टी सीएम ने नहीं दी कोई तवज्जो
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आना तो दूर, अनशन टूटने पर समर्थन में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने नहीं किया एक ट्वीट तक

स्वतंत्र कुमार की रिपोर्ट

दिल्ली। आखिरकार जैसे जैसे स्वाति के अनशन मामले में जनज्वार ने रिपोर्टिंग की वैसा ही हुआ। जनज्वार ने बता दिया था कि केंद्र सरकार के 12 साल या उससे कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप करने वालों के खिलाफ अध्यादेश लेकर आएगी और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल और उनकी टीम इसे अपनी जीत बताकर अनशन तोड़ लेंगी। ऐसा हुआ भी।

कल स्वाति ने अपना अनशन तोड़ लिया, लेकिन जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा था कि जिस आम आदमी पार्टी से स्वाति जुड़ी हैं उस पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल स्वाति का अनशन तुड़वाने आएंगे और साथ मे डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी अनशन तुड़वाने के समय साथ रहेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। न तो अरविंद केजरीवाल अनशन स्थल पर पहुंचे और न ही मनीष। लिहाजा स्वाति का अनशन कुछ बच्चियों ने तुड़वाया।

ये रहे कल के अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के ट्वीट, मगर स्वाति के अनशन तोड़ने को लेकर नहीं किया कोई ट्वीट

इतना ही नहीं, अरविंद केजरीवाल या मनीष सिसोदिया ने अनशन तुड़वाना तो दूर स्वाति के अनशन टूटने पर समर्थन में एक ट्वीट तक नहीं किया, जबकि बात बात पर अरविंद केजरीवाल हो या मनीष सोशल मीडिया पर अपने विचार रखते हैं लेकिन स्वाति के अनशन टूटने पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।

अब हम इसके पीछे का असल कारण। दरअसल 20 अप्रैल को जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ये हलफनामा दिया कि सरकार बच्चियों के रेपिस्टों के लिए कानून में फांसी का प्रावधान करने जा रही है तो अरविंद केजरीवाल स्वाति के पास अनशन स्थल पर पहुंचे और उन्होंने स्वाति से अनशन तोड़ने जी अपील की।

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अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार के इस कदम को स्वाति के अनशन की सफलता के तौर पर भुनाना चाहते थे, लेकिन मालीवाल ने अमशन तोड़ने से साफ इंकार कर दिया। सूत्र ये भी बताते हैं कि केजरीवाल ने मालीवाल के सामने ये प्रस्ताव भी रखा था कि वो साउथ के सुपर स्टार व राजनीति में अभी प्रवेश करने वाले एक नेता से अनशन तुड़वा देंगे, लेकिन स्वाति ने अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया।

इसके बाद अरविंद केजरीवाल अनशन स्थल से तमतमाते हुए निकल गए। इसी का परिणाम है कि आज अनशन टूटने पर आप के बड़े नेताओं की तरफ से कोई कोई अनशन स्थल पर नहीं गया, सिवाय स्वास्थ्य मंत्री के। न ही सोशल मीडिया पर समर्थन में कुछ लिखा।

सूत्र बताते हैं कि स्वाति को ये लग रहा था कि उसके अनशन की वजह से केंद्र सरकार झुक गई है और ये कानून लेकर आ रही है तो लगे हाथ अपनी दूसरी मांगें भी मनवा ली जाएं, जिससे वो ये संदेश देने में कामयाब हो जायें कि कैसे एक महिला ने अपने दम पर सत्ता को हिला दिया।

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इसी का नतीजा है कि स्वाति ने कैबिनेट में आर्डिनेंस पास होने के बाद भी पीएम मोदी को पत्र लिखा कि वो सारी मांगें पूरी होने तक अपना अनशन नही तोड़ेंगी, लेकिन शाम तक उनको ये एहसास हो गया कि ये सब केंद्र सरकार ने पब्लिक के उस गुस्से को शांत करने के लिए किया है जो उन्नाव और कठुआ रेप की घटनाओं के बाद लोगों में देखने को मिल रहा था, इसलिए बिना देरी किये और अपने 6 घंटे पहले लिखे पीएम के पत्र को भूलते हुए स्वाति ने अपना अनशन खत्म कर दिया।

एक कारण और बताया जा रहा है आम आदमी पार्टी की इस अनशन से दूरी का। दरअसल अरविंद केजरीवाल को ये डर भी सता रहा था कि यदि स्वाति की सारी मांगें मान ली गईं तो वो पार्टी में सबसे बड़ी नेता बन जाएंगी। इसलिये भी इस अनशन से दूरी बनाई गई।

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