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ग्राउंड रिपोर्ट : भाजपा राज में गुजरात के कच्छ की जनता को हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिल पायेगा पीने का पानी

Prema Negi
23 Nov 2019 1:58 PM GMT
ग्राउंड रिपोर्ट : भाजपा राज में गुजरात के कच्छ की जनता को हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिल पायेगा पीने का पानी
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गुजरात का कच्छ जिला अकालग्रस्त होने के कारण हर साल होती है पीने के पानी की किल्लत और आ जाता है हजारों लोगों और पशुओं का जीवन खतरे में, अब हाईकोर्ट ने दिया गुजरात सरकार को 10 मुद्दों के आधार पर आपातकालीन व्यवस्था करने का आदेश...

गुजरात के कच्छ से दत्तेश भावसार की ग्राउंड रिपोर्ट

जनज्वार। पानी मानव सृष्टि और पशु सृष्टि के लिए बहुत ही जरूरी है, लेकिन पीने के पानी के लिए लोगों को हाईकोर्ट जाना पड़े, ऐसा सिर्फ गुजरात मॉडल में ही हो सकता है। गुजरात के कच्छ जिले में पीने के पानी की समस्या को लेकर गुजरात सरकार गंभीर न होने के कारण लोगों को माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करके जीने के मूलभूत अधिकार पीने के पानी के लिए लड़ना पड़ रहा है।

च्छ जिला बरसों से अति सूखा प्रभावित क्षेत्र है। इसके कारण कच्छ जनपद में हमेशा पानी की बहुत ही किल्लत रहती है और इस इलाके में पानी को बहुत ही कीमती माना जाता है, मगर गुजरात सरकार की बेरुखी के कारण कई सालों से पानी के मामले में कच्छ से अन्याय हो रहा है। फिर वह पीने का पानी हो या सिंचाई का पानी, हर मामले में गुजरात सरकार द्वारा कच्छ की जनता के साथ अन्याय किया जाता है। शासन में सत्तासीन भाजपा के जनप्रतिनिधियों को समस्या का पता होने के बावजूद वो मौन धारण किए हुए हैं।

भौगोलिक क्षेत्रफल के हिसाब से देखा जाये तो कच्छ भारत का दूसरा सबसे बड़ा जिला है, जिसमें 10 तालुका, 875 गांव, 6 नगर पालिका मिलाकर लगभग 24 लाख लोग रहते हैं। यहां 19 लाख के करीब पशुओं की संख्या है। इस हिसाब से कच्छ जिले को पूरे दिन का 450 MLD (मिलियन लीटर डे) पानी की जरूरत है, जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार शहरी लोगों को 140 लीटर, गांव के लोगों को 100 लीटर, गाय-भैंस को 60 लीटर और छोटे पशुओं को 20 लीटर पानी प्रतिदिन के हिसाब से शामिल हैं।

कच्छ के गांवों में यह तस्वीर आम है, पानी संग्रहण के लिए बने टैंक दे रहे सूखे की गवाही

स मसले पर भुज के विधायक डॉ. निमाबहेन आचार्य कहते हैं, 'पानी के विस्तार में कभी छोटी-मोटी समस्या आई है तो उसको सुलझाया गया है और विस्तार बड़ा होने के कारण तकनीकी खराबी कभी-कभी समस्या उत्पन्न होती थी, जिसको हमने समय समय पर सुलझा लिया था।'

समें उद्योगों का पानी भी शामिल किया गया है, जबकि कच्छ के लोगों को और पशुओं को पीने का पानी भी नहीं मिल पा रहा है। कच्छ के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए जिले के सामाजिक कार्यकर्ता आदमभाई चाकी ने उच्चतम न्यायालय में 106/2019 जनहित याचिका दायर की थी। इसमें मांग की थी कि कच्छ के लोगों और पशुओं को पानी दिया जाए। जनहित याचिका में कहा गया था कि गुजरात सरकार लोगों को पीने का पानी मुहैया नहीं करवा रही।

स संदर्भ में कई गांवों के सरपंचों के एफिडेविट कोर्ट में दायर किए थे, जिसमें कच्छ के लोगों को 15-15, 20-20 दिनों तक पानी की सप्लाई न होने का मामला उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया गया था। इन सारे तथ्यों की जानकारी मिलने के बाद उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ने यह सुनवाई अपने पास रखी और उनके साथ अन्य एक अन्य जज की बेंच बनाकर पूरी सुनवाई और तथ्यों को जानने के बाद गुजरात सरकार के Gujarat water supply and sewerage board के अधिकारियों को पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया, मगर सरकारी बाबुओं की तरफ से पानी की सप्लाई लगातार लोगों के बीच होने के दावे किए जाते रहे।

हीं राज्य सरकार द्वारा आम लोगों को पानी उपलब्ध न करा पाने पर कच्छ के सांसद विनोद भाई चावड़ा कहते हैं कि वे सांसद का सत्र चालू होने के कारण दिल्ल्ली में थे, इसलिए इस केस से अवगत नहीं हैं।

च्छ के स्थानीय लोग कहते हैं, हमारे लिए पानी का प्रश्न अति गंभीर और विकट है, क्योंकि औसतन 10 में से 7 साल सूखे के होते हैं और सूखे की स्थिति में लोगों और पशुओं के लिए पानी की बड़ी किल्लत हो जाती है। गौरतलब है कि कच्छ जिला पशुपालन का केंद्र है, इसी कारण यहां पर पशुओं की संख्या ज्यादा है।

दमभाई चाकी के अनुसार, पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को देखते हुए कच्छ जिले में अकाल के कारण हजारों लोग पलायन कर चुके हैं और हर साल गर्मी के मौसम में हजारों पशुओं को 200 से 300 KM दूर ले जाना पड़ता है। कच्छ के लिए पानी की समस्या मूलभूत है, जबकि गुजरात सरकार ने माननीय उच्च न्यायालय में एफिडेविट दिया है ​कि सबकुछ ठीक चल रहा है और जिले में पानी की किसी तरह की किल्लत नहीं है।

कच्छ के गांवों में यह तस्वीर आम है, पानी संग्रहण के लिए बने टैंक दे रहे सूखे की गवाही

गुजरात सरकार के जवाब में कच्छ जनपद की कई पंचायत के सरपंचों ने एफिडेविट के स्वरूप में गांव की स्थिति माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष रखी और माननीय उच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार को 10 सूत्रीय कार्यक्रम बनाकर आपातकाल की तरह कच्छ के लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करने का आदेश दिया है।

च्चे जिले में पानी का प्रश्न अति गंभीर होने के कारण माननीय उच्च न्यायालय ने हेल्पलाइन शुरू करने का भी भी आदेश दिया है, जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। कोर्ट के फैसले से कच्छ के लोगों को और पशुओं को बड़ी राहत की उम्मीद जतायी जा रही है।

गुजरात वाटर सप्लाई एंड सिवरेज बोर्ड के अधिकारी एजी वनरा कहते हैं, माननीय हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि पानी की सप्लाई को चालू रखिए और उचित लगे तो इमरजेंसी सुविधा का उपयोग कीजिये। हम उसका पालन करेंगे।

च्च न्यायालय के इस आदेश के बाद जब जनज्वार ने संबंधित Gujarat water supply and sewerage board के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया, जिस कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ पाया।

हीं विभागीय सूत्रों से यह जानकारी भी सामने आयी है कि कच्छ के लोगों के हिस्से का पानी सरकार उद्योगों के लिए दे रही है, जबकि पीने के पानी का कोई अन्य उपयोग नहीं किया जा सकता।

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