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राजनीति

हिंसा के लिए सीधे हरियाणा की 'खटारा' सरकार जिम्मेदार

Janjwar Team
25 Aug 2017 7:22 PM GMT
हिंसा के लिए सीधे हरियाणा की
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हिंसा, हत्या, अराजकता और आगजनी के आगे जो सरकार इतनी खटारा और लाचार हो उसे सत्ता में रहने का हक ही क्या है? राम रहीम के समर्थकों को सरकार ने जान—बूझकर इकट्ठा होने का दिया अवसर, कभी लगाई ही नहीं धारा 144, राज्य की हरियाणा सरकार की डेरा वालों से मिलीभगत

जनज्वार, हरियाणा। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को बलात्कार मामले में हुई सजा के बाद से हरियाणा समेत आसपास के प्रदेशों में माहौल बहुत तनावपूर्ण हो चुका है। बाबा समर्थकों द्वारा किए जा रहे हिंसक आंदोलन में अब तक 25 की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर है। और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर है कि बेचारगी खींसे निपोर रहे हैं।

सशक्त शासन और मजबूत सरकार का दंभ भरने वाले प्रधानमंत्री मोदी के ये भाजपाई मुख्यमंत्री हैं जिनसे राज्यों की जिम्मेदारियां संभाले नहीं संभल रहीं और हर मोर्चे पर एक के बााद एक फेल हो रहे हैं। अभी चंद दिनों पहले ही यूपी के गोरखपुर में एक हफ्ते में सैकड़ों बच्चों के मरने के मामले में योगी की फजीहत हुई। उनकी उपस्थिति में भी बच्चे अस्पताल में मरते रहे लेकिन उन्हें पता ही नही चला कि अस्पताल अराजकता और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा है।

दिन के 2.30 बजे आए फैसले के बाद जैसे पूरे हरियाणा आगजनी और हिंसा की आग में डेरा के भाड़े के गुंडों ने ढकेल दिया, उससे साफ है कि खट्टर ने पुलिस को अपना काम नहीं करने दिया। पुलिस हर कदम पर राजनीतिक दबाव में रही और हर एक्शन पर वह भाजपा और नेताओं से आदेश लेती रही। अगर पुलिस को खट्टर की खटारा सरकार ने अपना काम करने दिया होता तो कत्तई यह स्थिति राज्य की नहीं बनती।

अबतक हुई हिंसा के कारण कमसे कम राज्य का 100 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। सिर्फ हरियाणा में सौ से अधिक बसें और गाड़ियां फूंक दी गयी हैं। सवाल है कि ऐसी खटारा सरकार को सत्ता में बने रहने का हक ही क्या है जो खुद ही लोगों को अराजकता फैलाने का मौका दे रही हो।

'स्वराज इंडिया के हरियाणा प्रवक्ता राजीव गोदारा के मुताबिक राम रहीम के अनुयायियों कि भारी भीड़ जमा होने और पंचकुला निवासियों की सुरक्षा व कानून व्यवस्था बिगड़ने देने के लिए हरियाणा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उसका कहना है कि हरियाणा सरकार व पंचकुला प्रशासन ने डरे—सहमे पंचकुला वासियों को एक आरोपी राम रहीम के समर्थन में जुटी भीड़ के हवाले करने व पूरे शहर का जीवन उस भीड़ के रहमोकरम पर छोड़ने का काम किया है।

गौरतलब है इस घटना के बाद पंचकुला के स्कूल व दफ्तर बंद करने पड़े, क्योंकि पंचकुला प्रशासन ने धारा 144 सी आर पी सी लागू की, मगर पांच या पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक ही नहीं लगाई।

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इस घटना के मद्देनजर गौर करने वाली बात यह है कि चूंकि राम रहीम को बलात्कार मामले में कोर्ट में पेश होना था तो डेरा सच्चा सौदा अनुयायी पिछले कई दिन से लगातार पंचकुला ही नहीं सिरसा में भी भारी संख्या जमा हो रहे थे। जिसके चलते पंचकुला, सिरसा व आसपास के क्षेत्र में आम लोगों में डर का माहौल व्याप्त हो गया था। इसीलिए सरकार को स्कूल बंद करने पड़े, लोग घरों में बंद होकर रह गये, मगर सरकार ने इसके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की।

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हर मामले में यही होता आया है कि कानून व्यवस्था बिगड़ने की घटनाओं के लिए सत्तासीन सरकार ही जिम्मेदार होती है, क्योंकि अंतोत्गतवा ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने के लिए वह खुद जिम्मेदार होती है। सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि सरकार अपने वोट की भूख के चलते ही हालत को बिगाड़ने में सहायक की भूमिका निभा रही है।

इसी के मद्देनजर इंडिया ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि वह राज्य में खराब हुई हालत के लिए जिम्मेवारी ले और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कि जाये।

हरियाणा सरकार ने 18 अगस्त को धारा 144 लागू की, मगर इसके तहत सिर्फ हथियार लेकर चलने पर रोक लगाई गई। पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक नहीं लगाई गई। 24 अगस्त को जब हाईकोर्ट ने सरकार को तलब किया व जवाब माँगा, तब 18 अगस्त को जारी किये गए आदेश में पंचकुला उपायुक्त ने नया आदेश जारी कर पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई।

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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ आने वाले फैसले के मद्देनजर पंचकुला में भारी मात्रा में डेरा अनुयायी इकट्ठे हुए तो पंचकुला निवासी सहम गए। इसीलिए तीन दिन के लिए स्कूल और दफ्तर बंद हो गए।

हाईकोर्ट में जब यह मामला पहुंचा कि स्कूल—दफ्तर तीन दिन से बंद हैं, तब हरियाणा सरकार के वकील ने पंचकुला में धारा 144 लगाए जाने के आदेश कोर्ट के सामने पेश किये। उसी से पता चला कि पंचकुला के उपायुक्त द्वारा धारा 144 के आदेश पास किया गया, मगर कहीं भी पांच या पांच से अधिक लोगों के इकट्ठे होने पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी।

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